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Maharajganj News: अब खुद को इंग्लैंड का निवासी बता रहा है जार्डन
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एजेंसियों को अलग-अलग बयान देकर परेशान कर रहा जार्डन, शुरू से संदिग्ध है उसकी पहचान
रिमांड पूरी होने के बाद पुलिस पहुंचा गई कारागार, शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंस के मार्फत कोर्ट में किया गया प्रस्तुत
महराजगंज। 11 जुलाई को नेपाल जाने की फिराक में पकड़े गए जार्डन ने एक बार फिर जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है। अब उसने खुद को (यूके) इंग्लैंड का मूल निवासी और अपना नाम जार्डन जोसेफ पीटर बताया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हुए उसे रिमांड अवधि पूर्ण होने के उपरांत बृहस्पतिवार देर शाम जिला कारागार की अभिरक्षा में सुपुर्द किया। शुक्रवार को उसे वीडियो कांफ्रेंस के जरिये न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। आज फिर सुनवाई होगी।
जानकारी के अनुसार, बिना वीजा पासपोर्ट के भारत से नेपाल जाने की कोशिस में विदेशी नागरिक जार्डन ब्राउन 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा के सोनौली जायसवाल मोहल्ला स्थित पिलर संख्या 516 (22) पर एसएसबी 22वीं वाहिनी के हत्थे चढ़ा था। एसएसबी ने अपनी पूछताछ के बाद सोनौली कोतवाली में उसके खिलाफ तहरीर देकर उसे सुपुर्द कर दिया।
इसके बाद आव्रजन व विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसके खिलाफ जांच की जा रही हैऑ। 12 जुलाई को लोकल व राज्य स्तरीय एजेंसियों ने उससे पूछताछ की लेकिन उसने हर एजेंसी को एक फिर अलग कहानी बताकर परेशान करने की कोशिश की। 13 जुलाई को पूछताछ के बाद उसे न्यायाधीश सीनियर डिवीजन की अदालत में प्रस्तुत किया गया जहां से अदालत ने उसे 14 दिनों के लिए कारागार भेज दिया गया।
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अमेरिकी दूतावास के आने के बाद मंजूर हुई थी रिमांड
शुरुआती पूछताछ में विदेशी नागरिक ने एक बात लगभग सभी एजेंसियों को बताई थी कि वह अमेरिका नेवी में रहा और कांट्रेक्ट पर काम कर रहा है। पूछताछ के बाद उसे कारागार भेजा गया था। इसके बाद अमेरिकी दूतावास से एक टीम जिला कारागार पहुंची। हालांकि जेल प्रशासन के मुताबिक दूतावास टीम ने जार्डन से नहीं बल्कि पूर्व में बंद एक दूसरे अमेरिकी नागरिक से मुलाकात की। जबकि दूतावास टीम ने सोनौली का दौरा कर उस स्थान की पड़ताल भी की जहां विदेशी नागरिक गिरफ्तार हुआ था। टीम के जाने के दूसरे दिन ही पुलिस ने रिमांड की अर्जी देकर उसे कस्टडी में लिया।
चार दिन तक पुलिस लाइन में की गई पूछताछ
17 जुलाई से 23 जुलाई तक उसे पुलिस लाइन में रखकर पुलिस व अन्य राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों ने पूछताछ की। पूछताछ में इस बार उक्त नागरिक ने पुलिस को खुद का नाम जार्डन जोसेफ पीटर व खुद को (यूके) इंग्लैंड का निवासी बताया, लेकिन अपने उद्देश्य को लेकर कोई भी पुष्ट बयान देने की जगह बरगलाने की कोशिश की। जांच एजेंसियों इसकी ट्रेवल हिस्ट्री व एयरपोर्ट इमीग्रेशन काउंटर तक जांच-पड़ताल कर इसके आने का उद्देश्य तलाश रही हैं, लेकिन अबतक इसमें विशेष सफलता नहीं मिल सकी है। इसी बीच रिमांड अवधि पूर्ण होने के बाद 23 जुलाई की देर शाम पुलिस अभिरक्षा में उसे मेडिकल चेकअप के बाद कारागार प्रशासन की सुपुर्दगी में सौंप दिया।
वर्जन
रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद जार्डन को पुलिस कारागार पहुंचा दिया गया है। शुक्रवार को वीसी के जरिये उसे न्यायाधीश के सामने पेश किया गया। जब तक पुलिस न्यायालय में चार्जशीट नहीं दाखिल करती तब तक उसे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
- वीके गौतम, अधीक्षक, जिला कारागार, महराजगंज
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रिमांड पूरी होने के बाद पुलिस पहुंचा गई कारागार, शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंस के मार्फत कोर्ट में किया गया प्रस्तुत
महराजगंज। 11 जुलाई को नेपाल जाने की फिराक में पकड़े गए जार्डन ने एक बार फिर जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है। अब उसने खुद को (यूके) इंग्लैंड का मूल निवासी और अपना नाम जार्डन जोसेफ पीटर बताया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हुए उसे रिमांड अवधि पूर्ण होने के उपरांत बृहस्पतिवार देर शाम जिला कारागार की अभिरक्षा में सुपुर्द किया। शुक्रवार को उसे वीडियो कांफ्रेंस के जरिये न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। आज फिर सुनवाई होगी।
जानकारी के अनुसार, बिना वीजा पासपोर्ट के भारत से नेपाल जाने की कोशिस में विदेशी नागरिक जार्डन ब्राउन 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा के सोनौली जायसवाल मोहल्ला स्थित पिलर संख्या 516 (22) पर एसएसबी 22वीं वाहिनी के हत्थे चढ़ा था। एसएसबी ने अपनी पूछताछ के बाद सोनौली कोतवाली में उसके खिलाफ तहरीर देकर उसे सुपुर्द कर दिया।
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इसके बाद आव्रजन व विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसके खिलाफ जांच की जा रही हैऑ। 12 जुलाई को लोकल व राज्य स्तरीय एजेंसियों ने उससे पूछताछ की लेकिन उसने हर एजेंसी को एक फिर अलग कहानी बताकर परेशान करने की कोशिश की। 13 जुलाई को पूछताछ के बाद उसे न्यायाधीश सीनियर डिवीजन की अदालत में प्रस्तुत किया गया जहां से अदालत ने उसे 14 दिनों के लिए कारागार भेज दिया गया।
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अमेरिकी दूतावास के आने के बाद मंजूर हुई थी रिमांड
शुरुआती पूछताछ में विदेशी नागरिक ने एक बात लगभग सभी एजेंसियों को बताई थी कि वह अमेरिका नेवी में रहा और कांट्रेक्ट पर काम कर रहा है। पूछताछ के बाद उसे कारागार भेजा गया था। इसके बाद अमेरिकी दूतावास से एक टीम जिला कारागार पहुंची। हालांकि जेल प्रशासन के मुताबिक दूतावास टीम ने जार्डन से नहीं बल्कि पूर्व में बंद एक दूसरे अमेरिकी नागरिक से मुलाकात की। जबकि दूतावास टीम ने सोनौली का दौरा कर उस स्थान की पड़ताल भी की जहां विदेशी नागरिक गिरफ्तार हुआ था। टीम के जाने के दूसरे दिन ही पुलिस ने रिमांड की अर्जी देकर उसे कस्टडी में लिया।
चार दिन तक पुलिस लाइन में की गई पूछताछ
17 जुलाई से 23 जुलाई तक उसे पुलिस लाइन में रखकर पुलिस व अन्य राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों ने पूछताछ की। पूछताछ में इस बार उक्त नागरिक ने पुलिस को खुद का नाम जार्डन जोसेफ पीटर व खुद को (यूके) इंग्लैंड का निवासी बताया, लेकिन अपने उद्देश्य को लेकर कोई भी पुष्ट बयान देने की जगह बरगलाने की कोशिश की। जांच एजेंसियों इसकी ट्रेवल हिस्ट्री व एयरपोर्ट इमीग्रेशन काउंटर तक जांच-पड़ताल कर इसके आने का उद्देश्य तलाश रही हैं, लेकिन अबतक इसमें विशेष सफलता नहीं मिल सकी है। इसी बीच रिमांड अवधि पूर्ण होने के बाद 23 जुलाई की देर शाम पुलिस अभिरक्षा में उसे मेडिकल चेकअप के बाद कारागार प्रशासन की सुपुर्दगी में सौंप दिया।
वर्जन
रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद जार्डन को पुलिस कारागार पहुंचा दिया गया है। शुक्रवार को वीसी के जरिये उसे न्यायाधीश के सामने पेश किया गया। जब तक पुलिस न्यायालय में चार्जशीट नहीं दाखिल करती तब तक उसे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
- वीके गौतम, अधीक्षक, जिला कारागार, महराजगंज