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Maharajganj: चार महीने में पूरा हो जाएगा भारीवैसी का जटायु संरक्षण केंद्र, सुंदरवन से आएगा जटायु का पहला जोड़ा
Thu, 11 Aug 2022 10:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 10:07 AM IST
सार
वन विभाग का मानना है कि चित्रकूट वन में ही प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष वनवास के दौरान सीताहरण के समय जटायु की मुलाकात हुई थी। जहां पर रावण से युद्ध करते समय जटायु घायल हो गए थे। विश्व में जटायु का मंदिर सिर्फ चित्रकूट में ही है। इसी पौराणिकता की वजह से जटायु के पहले जोड़े को संरक्षण केंद्र में लाना चाहते हैं। इसके अलावा अन्य वन क्षेत्र में भी जटायु की तलाश की जाएगी।
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भारीवैसी में जटायु संरक्षण केंद्र का निर्माण कार्य में तेजी आई।
- फोटो : MAHARAJGANJ
विस्तार
महराजगंज जिले के फरेंदा क्षेत्र का जटायु संरक्षण केंद्र के निर्माण का कार्य दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए शासन स्तर से बजट भी मिल गया है। जटायु संरक्षण केंद्र का कार्य पूरा हो जाने के बाद चित्रकूट के सुंदरवन से जटायु का पहला जोड़ा लाया जाएगा। रामायण काल से जटायु का संबंध होने के कारण वन विभाग चित्रकूट से जटायु लाने का फैसला किया है।
गोरखपुर वन प्रभाग के फरेंदा क्षेत्र के भारीवैसी में पांच हेक्टेयर जमीन पर जटायु संरक्षण केंद्र एवं प्रजनन केंद्र बनाया जा रहा है। इसके निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए शासन स्तर से बजट की दूसरी किस्त भी जारी हो गई है। जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और प्रदेश सरकार के बीच 15 वर्ष का समझौता किया गया है।
अभी तक सिर्फ तार बाड़, अस्पताल सहित कार्यालय का निर्माण हुआ था जो बजट के अभाव में अन्य कार्य बंद पड़ा था। अब आधुनिक सुविधाओं से जटायु संरक्षण केंद्र लैस होगा जिसमें सीसीटीवी कैमरा, परिसर में गार्ड रूम, जनरेटर रूम, प्रशासकीय भवन, नर्सरी ब्रीडिंग एवियरी, फूड सेक्शन व वेटेनरी सेक्शन बनाए जाएंगे।
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वन क्षेत्र में भी जटायु की तलाश की जाएगी
वन विभाग का मानना है कि चित्रकूट वन में ही प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष वनवास के दौरान सीताहरण के समय जटायु की मुलाकात हुई थी। जहां पर रावण से युद्ध करते समय जटायु घायल हो गए थे। विश्व में जटायु का मंदिर सिर्फ चित्रकूट में ही है। इसी पौराणिकता की वजह से जटायु के पहले जोड़े को संरक्षण केंद्र में लाना चाहते हैं। इसके अलावा अन्य वन क्षेत्र में भी जटायु की तलाश की जाएगी।
गोरखपुर डीएफ विकास यादव ने कहा कि शासन से बजट मिलने के बाद कार्य तेजी से कराया जा रहा है। दिसबंर तक पूरा हो जाएगा। कार्य पूरा होने के बाद प्रयास है कि चित्रकूट के सुंदरवन से जटायु के पहले जोड़े को जटायु संरक्षण केंद्र पर लाया जाए।
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गोरखपुर वन प्रभाग के फरेंदा क्षेत्र के भारीवैसी में पांच हेक्टेयर जमीन पर जटायु संरक्षण केंद्र एवं प्रजनन केंद्र बनाया जा रहा है। इसके निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए शासन स्तर से बजट की दूसरी किस्त भी जारी हो गई है। जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और प्रदेश सरकार के बीच 15 वर्ष का समझौता किया गया है।
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अभी तक सिर्फ तार बाड़, अस्पताल सहित कार्यालय का निर्माण हुआ था जो बजट के अभाव में अन्य कार्य बंद पड़ा था। अब आधुनिक सुविधाओं से जटायु संरक्षण केंद्र लैस होगा जिसमें सीसीटीवी कैमरा, परिसर में गार्ड रूम, जनरेटर रूम, प्रशासकीय भवन, नर्सरी ब्रीडिंग एवियरी, फूड सेक्शन व वेटेनरी सेक्शन बनाए जाएंगे।
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वन क्षेत्र में भी जटायु की तलाश की जाएगी
वन विभाग का मानना है कि चित्रकूट वन में ही प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष वनवास के दौरान सीताहरण के समय जटायु की मुलाकात हुई थी। जहां पर रावण से युद्ध करते समय जटायु घायल हो गए थे। विश्व में जटायु का मंदिर सिर्फ चित्रकूट में ही है। इसी पौराणिकता की वजह से जटायु के पहले जोड़े को संरक्षण केंद्र में लाना चाहते हैं। इसके अलावा अन्य वन क्षेत्र में भी जटायु की तलाश की जाएगी।
गोरखपुर डीएफ विकास यादव ने कहा कि शासन से बजट मिलने के बाद कार्य तेजी से कराया जा रहा है। दिसबंर तक पूरा हो जाएगा। कार्य पूरा होने के बाद प्रयास है कि चित्रकूट के सुंदरवन से जटायु के पहले जोड़े को जटायु संरक्षण केंद्र पर लाया जाए।