{"_id":"6a57ee8f00ab9966ed073a8d","slug":"irregularities-in-grants-complainant-questions-the-probe-submits-letter-expressing-dissatisfaction-maharajganj-news-c-206-1-go11002-181325-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनुदान में खेल : शिकायतकर्ता ने जांच पर सवाल उठाया, सौंपा असंतुष्टि पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनुदान में खेल : शिकायतकर्ता ने जांच पर सवाल उठाया, सौंपा असंतुष्टि पत्र
विज्ञापन
महराजगंज। बकरी अनुदान मामले में जांच टीम ने बुधवार को शिकायतकर्ता का पक्ष जानने के लिए बुलाया। बी पैक्स बेलसड़ के सभापति प्रदीप ने जांच टीम को असंतुष्टि का पत्र सौंप दिया। उन्होंने टीम को बताया कि यही असंतुष्टि पत्र वह सीवीओ व डीएम को भी भेजेंगे।
निराश्रित महिलाओं को बकरी पालन अनुदान देकर आय सृजन की योजना जनपद में कागजी बनकर रह गई है। आरोप है कि पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों ने लाभार्थियों से मिलकर अनुदान राशि की बंदरबांट कर ली। बेलसड़ बी पैक्स सभापति ने डीएम को शपथपत्र के साथ शिकायत पत्र देकर जांच की मांग की थी। मामले में सीवीओ ने चार जुलाई को कमेटी बनाकर जांच सौंपी। टीम 10 दिन बाद मंगलवार को अचानक धानी ब्लाक के कोइलाडाड़ में लाभार्थी शकुंतला व कुरैशा का बयान लेने पहुंच गई। इसकी सूचना शिकायतकर्ता को नहीं दी गई।
टीम के बुलाने पर बुधवार को शिकायतकर्ता ने जांच पर असंतोष जताते हुए पत्रक सौंपा। उन्होंने कहा कि मंगलवार को लाभार्थियों के घर धानी में तैनात पशु मित्र ने खरीदकर पहुंचाई गई बकरियों को टैग लगाया और दोपहर में टीम ने गुपचुप तरीके से बयान दर्ज कर लिया। जबकि नियमत: शिकायतकर्ता को जांच के वक्त मौके पर उपस्थित रखा जाता है, जिसका अनुपालन नहीं हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ब्लाॅक में 11 वर्ष तैनात रहे कर्मचारी ने निराश्रितों से मिलकर उनका हक मार लिया। जांच की भनक लगी तो तबादला करा लिया। जांच टीम पर इसकी सत्यता की पुष्टि करने का दायित्व था लेकिन टीम ने आरोपियों को 10 दिन का समय बचाव के लिए दे दिया। गड़बड़झाला में शामिल लोग खुद को व विभागीय साख बचाने के लिए समय सीमा में बकरी पहुंचा गए। इस योजना के तहत इलाज व बीमा में भी गड़बड़झाला हुआ।
विज्ञापन
निराश्रित महिलाओं को बकरी पालन अनुदान देकर आय सृजन की योजना जनपद में कागजी बनकर रह गई है। आरोप है कि पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों ने लाभार्थियों से मिलकर अनुदान राशि की बंदरबांट कर ली। बेलसड़ बी पैक्स सभापति ने डीएम को शपथपत्र के साथ शिकायत पत्र देकर जांच की मांग की थी। मामले में सीवीओ ने चार जुलाई को कमेटी बनाकर जांच सौंपी। टीम 10 दिन बाद मंगलवार को अचानक धानी ब्लाक के कोइलाडाड़ में लाभार्थी शकुंतला व कुरैशा का बयान लेने पहुंच गई। इसकी सूचना शिकायतकर्ता को नहीं दी गई।
विज्ञापन
टीम के बुलाने पर बुधवार को शिकायतकर्ता ने जांच पर असंतोष जताते हुए पत्रक सौंपा। उन्होंने कहा कि मंगलवार को लाभार्थियों के घर धानी में तैनात पशु मित्र ने खरीदकर पहुंचाई गई बकरियों को टैग लगाया और दोपहर में टीम ने गुपचुप तरीके से बयान दर्ज कर लिया। जबकि नियमत: शिकायतकर्ता को जांच के वक्त मौके पर उपस्थित रखा जाता है, जिसका अनुपालन नहीं हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ब्लाॅक में 11 वर्ष तैनात रहे कर्मचारी ने निराश्रितों से मिलकर उनका हक मार लिया। जांच की भनक लगी तो तबादला करा लिया। जांच टीम पर इसकी सत्यता की पुष्टि करने का दायित्व था लेकिन टीम ने आरोपियों को 10 दिन का समय बचाव के लिए दे दिया। गड़बड़झाला में शामिल लोग खुद को व विभागीय साख बचाने के लिए समय सीमा में बकरी पहुंचा गए। इस योजना के तहत इलाज व बीमा में भी गड़बड़झाला हुआ।