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Maharajganj News: सावन में इटहिया शिव मंदिर में श्रद्धा के साथ मनोरंजन भी, मेले की तैयारियां पूरी

Thu, 30 Jul 2026 01:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:40 AM IST
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In the month of Sawan, there is devotion as well as entertainment at Ithiya Shiva Temple, preparations for the fair are complete.
मिनी बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध पंचमुखी शिव मंदिर इटहियां ।
श्रद्धालुओं की मुरादों को पूरा करते हैं पंचमुखी महादेव
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राजा राजा बृषमसेन से जुड़ी है शिव मंदिर इटहिया के पंचमुखी शिवलिंग की कहानी
ठूठीबारी। मिनी बाबा धाम के नाम से विख्यात प्रसिद्ध शिव मंदिर इटहिया में सावन के महीने में काफी भीड़ लगती है। जनश्रुतियों के अनुसार पंचमुखी शिवलिंग के प्रादुर्भाव की कहानी निचलौल स्टेट के राजा बृषमसेन से जुड़ी हुई है।
सावन महीने में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पंचमुखी शिव मंदिर इटहिया सावन मास मे लगने वाले एक माह मेले को लेकर मंदिर प्रशासन द्वारा तैयारियां पूरी कर लिया गया है। मनोरंजन व्यवस्थापक संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि बच्चों एवं श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए मेला परिसर में मौत का कुआं, ब्रेकिंग डांस, झूला, ड्रेगन नाव, जलपरी, टावर झूला, मिक्सर झूला आदि लगाया गया है।
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पंचमुखी शिवलिंग पर गड़ौरा निवासी दिवंगत चन्द्रशेखर मिश्र ने 1968-69 में मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां सावन महीने में एक माह तक मेला लगता है। केवल जनपद से ही नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु पड़ोसी राज्य बिहार व नेपाल से आते हैं और जलाभिषेक करते हैं। हालांकि मंदिर के पंचमुखी शिवलिंग का इतिहास के संबंध में पुराणों में कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
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राजा की गाय शिवलिंग पर चढ़ाती थी दूध
पंचमुखी शिवलिंग इटहिया के संदर्भ में जनश्रुतियों के अनुसार, राजा बृषमसेन भगवान शंकर के अनन्य भक्त थे। उनके गौशाला में एक नंदनी नामक गाय थी। इसे राजा बहुत मानते थे तथा सुबह शाम उसका दर्शन करते थे। गाय जंगल में चरती थी। कुछ दिन के बाद नंदनी गाय ने दूध देना बंद कर दिया और अपना दूध जंगल के घने झाड़ियों में जमीन पर चढ़ाने लगी। जब राजा वृषमसेन को यह जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त स्थान पर खुदाई कराया। वहां एक पंचमुखी शिवलिंग मिला। इसे देखकर राजा भाव-विह्वल हो गए तथा पंचमुखी शिवलिंग की नियमित पूजा अर्चना करने लगे।


राजा को प्राप्त हुआ पुत्र रत्न
इसके परिणामस्वरूप राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई उसका नाम रत्नसेन रखा गया। राजा वृषमसेन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रत्नसेन निचलौल के राजा हुए तथा अपने पिता की तरह अपनी पत्नी स्वर्ण रेखा के साथ प्रतिदिन पंचमुखी शिवलिंग की पूजा अर्चना करते थे। राजा रत्नसेन के शासनकाल में एक दिन कुछ चोर रात में चोरी के उद्देश्य से राज्य में प्रवेश कर रहे थे। जब वे पंचमुखी महादेव मंदिर के सामने पहुंचे तो मंदिर के अंदर से आवाज आई कि गांव वालों जागो चोर चोरी करने गांव में आ गए हैं। ये सुनकर गांव के लोग जग गए और चोर भाग गए।
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