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Maharajganj News: 410 क्विंटल बारूद उगलेगा धुआं तो सांस लेना हो जाएगा दूभर
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जिले में 19 स्थानों पर 205 पटाखें की दुकानें सजकर तैयार, करीब एक करोड़ के पटाखे धुआं बनकर उड़ जाएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दिवाली पर पटाखे की धूम कहीं सेहत पर भारी न पड़ जाए। एक अनुमान के अनुसार 410 क्विंटल बारूद से धुआं निकलेगा तो सांस लेना दुश्वार हो जाएगा। वर्तमान में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 161 है। इसे थोड़े से खराब स्तर का माना जाता है। दिवाली के बाद हवा के प्रदूषण का स्तर बढ़ जाने की आशंका है।
जिले में 205 पटाखे की दुकानें सज चुकी हैं। प्रदूषण पर अंकुश की लाख कवायदों के बीच एक चिंता वाली खबर है। जाहिर है पटाखे का शोर और धुआं शहर में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर करेगा। ऐसे में शहरवासियों को सजग रहने की जरूरत है। कोशिश यही हो कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर उन्हीं पटाखों का इस्तेमाल हो, जिससे प्रदूषण कम से कम हो।
प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में पटाखों की 205 दुकानें लगी हैं। जिले में स्थायी रूप से पटाखे कारोबार से जुड़ी 58 दुकाने हैं। इसमें से जहां 11 पटाखे को बनाते हैं, वहीं 47 सिर्फ बेचते हैं। इस बार अब तक 205 लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं। जिले में 19 स्थानों पर पटाखे की दुकानें लगी हैं। अनुमानत: इन दुकानों पर करीब 410 क्विंटल बारूद मौजूद हैं।
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जानकारों के अनुसार इससे भी ज्यादा बारूद शहर के कई इलाकों में मौजूद अवैध दुकानों में है। इसके अलावा गोदाम भी हैं, जहां से पटाखे बेचे जाते हैं। अब बारूद की कुल खरीद कीमत देखें तो एक करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं, पटाखे में तीन से चार गुने की बचत है, अगर सभी पटाखे बिके तो एक दिन में एक करोड़ रुपये हवा में धुआं बनकर उड़ जाएंगे और शोर के साथ वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना तय है। 205 लाइसेंस जारी हुए हैं। इस साल किसी नए को दुकान लगाने की अनुमति तो नहीं मिली है। अब ये दुकानदार अपने साथ 20 किलो तक बारूद के पटाखे ला सकते हैं तो इस हिसाब से 410 क्विंटल बारूद होगा।
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पटाखों की दुकानों पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान
चिह्नत स्थलों पर लगने वाली दुकानों के बीच में नौ वर्गमीटर की दूरी होनी चाहिए।
दुकानें टिनशेड की होंगी, किसी तरह का कोई कपड़ा या टेंट नहीं लगाना है।
दो दुकानों के बीच में 200 लीटर पानी, 100 फीट बालू और फायर सिस्टम रखना अनिवार्य है।
कोई भी दुकानदार पटाखे का टेस्ट नहीं करेगा।
अग्निशमन विभाग की तरफ से दुकान लगने वाले स्थानों पर 18 छोटे-बड़े वाहनों के साथ दमकल कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
पांच फायर बुलेट पर कर्मचारी लगातार गश्त पर रहेंगे और कहीं भी आगलगी की घटना को काबू करने में मदद करेंगे।
अग्निशमन विभाग की तरफ से लोगों को जागरूक करते हुए पंफलेट का वितरण किया जाएगा।
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पहले से हवा की गुणवत्ता थोड़ी खराब...पटाखों से इसे और मत बिगाड़िए
बुद्धिजीवियों ने पटाखे न फोड़ने की अपील की, डॉक्टर भी कर रहे लोगों को जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर में धूल और धुआं के चलते पहले से ही हवा की गुणवत्ता थोड़ी सी खराब है। अब दिवाली-छठ पर पटाखे फूटेंगे तो धुआं इसे और बिगाड़ेगा। घरों से निकले कूड़ा-करकट को लोग जलाएंगे। ऐसे में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगा। सांस, हृदय और अस्थमा के रोगियों के लिए यह जानलेवा हो जाएगा। ऐसे में बुद्धिजीवियों की सलाह है कि बचाव के लिए हर किसी को समझदारी दिखानी होगी, क्योंकि थोड़ी सी खुशी बहुतों के लिए दुखदायक हो सकती है।
लोग पटाखे न फोड़कर प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर भी लोगों को प्रदूषण से सेहत को नुकसान से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उधर, नगर पालिका की ओर से अपील की जा रही है कि कूड़ों को इकट्ठा करके नगर निगम की गाड़ी को ही दें, जलाएं ना। ऐसी ही सावधानियों को बरत कर हम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोक सकते हैं साथ ही पटाखों के शोर को भी कम कर सकते हैं।
दिवाली पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में जुटे हैं। हवा में नमी होने की वजह से प्रदूषण के कारक (एयर पाल्यूटेंट) की परत बन जा रही है। इससे धुंध (स्मॉग) बन रहा है। बीते आठ दिनों से हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) खराब है। शुक्रवार को एक्यूआई का स्तर 161 दर्ज किया गया, जो थोड़ा खराब स्तर पर है। ऐसे में जब दिवाली पर जब पटाखे जलेंगे तो प्रदूषण अधिक बढ़ जाएगा।
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बारूद वरिष्ठ नागरिक और बीमार लोगों के लिए बहुत खतरनाक
दिवाली तो प्रकाश का पर्व है। प्रकाश को लेकर जितनी विधियां हैं, उनका प्रयोग करें। पटाखे का इस पर्व से कोई जुड़ाव नहीं है। यह तो धनाढ्य वर्ग का प्रदर्शन है। अब इसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते जा रहे हैं। यह बारूद वरिष्ठ नागरिक और बीमार लोगों के लिए बहुत खतरनाक है। समाज को इसके लिए संवेदनशील होने की जरूरत है। हर किसी को पटाखे न जलाने का संकल्प लेना चाहिए। ऐसा करके हम बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगा सकते हैं। इस लोग समझें। हर किसी के संवदेनशील होने से ही इस पर रोक लग सकती है।
- डॉ. घनश्याम शर्मा, सेवानिवृत, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान
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पटाखों से बचकर हरित पटाखों का प्रयोग करें
सर्दियों में वायु प्रदूषण काफी लंबे समय तक बना रहता है इसलिए गर्मियों की तुलना में अधिक तीव्र दर से सांस के साथ भीतर जाता है। दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पटाखों से बचकर हरित पटाखों (ग्रीन पटाखा ) का प्रयोग करें। वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए साल 2018 में ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट लाया गया था। इनमें एलुमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल नहीं होते हैं। इको-फ्रेंडली दीयों का प्रयोग से अधिकांश लोग दिवाली में घरों को रोशन करते हैं।
- डॉ. संजय राय, प्रवक्ता, भूगोल, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज बाली
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बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है
-- दिवाली पर आतिशबाजी का जबरदस्त प्रदर्शन होता है, जिसमें रोशनी एवं आवाज का अतिरेक पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करता है। प्राचीन काल में प्रभाव कम था, क्योंकि बारूद का उपयोग केवल युद्ध के समय होता था। बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है, साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है, जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है। अतिरिक्त मात्रा में कार्बन ब्लैक के उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते है।
-- तेज बहादुर पाल, प्रवक्ता, रसायन विज्ञान, राष्ट्रीय इंटर कालेज बाली
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शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए भी हानिकारक है। तेज आवाज के पटाखे बजने पर हृदय रोगियों को जो झटका लगता है। इसलिए शोर को जितना कम किया जा सके, उतना बेहतर होगा।
डॉ. एसएम रफीक, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ
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गंधक और पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती है। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
डॉ. एएम भाष्कर, फिजिशियन
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अप्रिय स्थिति में इन नंबरों पर करें सूचित
दुकानदार या आमजन जिले मेें कहीं भी दुकानों पर किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर अग्निशमन विभाग के नियंत्रण कक्ष 9454418796, 9454418795 व 8887620951 पर सूचित करें। सिसवा क्षेत्र में सहायता के लिए 9454418798 व 6387300058, निचलौल क्षेत्र मेें सहायता के लिए 8765390252, नौतनवां क्षेत्र के लिए 9415980689 पर सूचना दें। इसके साथ ही 101, 112 व अपने नजदीकी थाने के नंबर के माध्यम से भी वे सूचना दे सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दिवाली पर पटाखे की धूम कहीं सेहत पर भारी न पड़ जाए। एक अनुमान के अनुसार 410 क्विंटल बारूद से धुआं निकलेगा तो सांस लेना दुश्वार हो जाएगा। वर्तमान में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 161 है। इसे थोड़े से खराब स्तर का माना जाता है। दिवाली के बाद हवा के प्रदूषण का स्तर बढ़ जाने की आशंका है।
जिले में 205 पटाखे की दुकानें सज चुकी हैं। प्रदूषण पर अंकुश की लाख कवायदों के बीच एक चिंता वाली खबर है। जाहिर है पटाखे का शोर और धुआं शहर में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर करेगा। ऐसे में शहरवासियों को सजग रहने की जरूरत है। कोशिश यही हो कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर उन्हीं पटाखों का इस्तेमाल हो, जिससे प्रदूषण कम से कम हो।
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प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में पटाखों की 205 दुकानें लगी हैं। जिले में स्थायी रूप से पटाखे कारोबार से जुड़ी 58 दुकाने हैं। इसमें से जहां 11 पटाखे को बनाते हैं, वहीं 47 सिर्फ बेचते हैं। इस बार अब तक 205 लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं। जिले में 19 स्थानों पर पटाखे की दुकानें लगी हैं। अनुमानत: इन दुकानों पर करीब 410 क्विंटल बारूद मौजूद हैं।
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जानकारों के अनुसार इससे भी ज्यादा बारूद शहर के कई इलाकों में मौजूद अवैध दुकानों में है। इसके अलावा गोदाम भी हैं, जहां से पटाखे बेचे जाते हैं। अब बारूद की कुल खरीद कीमत देखें तो एक करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं, पटाखे में तीन से चार गुने की बचत है, अगर सभी पटाखे बिके तो एक दिन में एक करोड़ रुपये हवा में धुआं बनकर उड़ जाएंगे और शोर के साथ वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना तय है। 205 लाइसेंस जारी हुए हैं। इस साल किसी नए को दुकान लगाने की अनुमति तो नहीं मिली है। अब ये दुकानदार अपने साथ 20 किलो तक बारूद के पटाखे ला सकते हैं तो इस हिसाब से 410 क्विंटल बारूद होगा।
पटाखों की दुकानों पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान
चिह्नत स्थलों पर लगने वाली दुकानों के बीच में नौ वर्गमीटर की दूरी होनी चाहिए।
दुकानें टिनशेड की होंगी, किसी तरह का कोई कपड़ा या टेंट नहीं लगाना है।
दो दुकानों के बीच में 200 लीटर पानी, 100 फीट बालू और फायर सिस्टम रखना अनिवार्य है।
कोई भी दुकानदार पटाखे का टेस्ट नहीं करेगा।
अग्निशमन विभाग की तरफ से दुकान लगने वाले स्थानों पर 18 छोटे-बड़े वाहनों के साथ दमकल कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
पांच फायर बुलेट पर कर्मचारी लगातार गश्त पर रहेंगे और कहीं भी आगलगी की घटना को काबू करने में मदद करेंगे।
अग्निशमन विभाग की तरफ से लोगों को जागरूक करते हुए पंफलेट का वितरण किया जाएगा।
पहले से हवा की गुणवत्ता थोड़ी खराब...पटाखों से इसे और मत बिगाड़िए
बुद्धिजीवियों ने पटाखे न फोड़ने की अपील की, डॉक्टर भी कर रहे लोगों को जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर में धूल और धुआं के चलते पहले से ही हवा की गुणवत्ता थोड़ी सी खराब है। अब दिवाली-छठ पर पटाखे फूटेंगे तो धुआं इसे और बिगाड़ेगा। घरों से निकले कूड़ा-करकट को लोग जलाएंगे। ऐसे में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगा। सांस, हृदय और अस्थमा के रोगियों के लिए यह जानलेवा हो जाएगा। ऐसे में बुद्धिजीवियों की सलाह है कि बचाव के लिए हर किसी को समझदारी दिखानी होगी, क्योंकि थोड़ी सी खुशी बहुतों के लिए दुखदायक हो सकती है।
लोग पटाखे न फोड़कर प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर भी लोगों को प्रदूषण से सेहत को नुकसान से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उधर, नगर पालिका की ओर से अपील की जा रही है कि कूड़ों को इकट्ठा करके नगर निगम की गाड़ी को ही दें, जलाएं ना। ऐसी ही सावधानियों को बरत कर हम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोक सकते हैं साथ ही पटाखों के शोर को भी कम कर सकते हैं।
दिवाली पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में जुटे हैं। हवा में नमी होने की वजह से प्रदूषण के कारक (एयर पाल्यूटेंट) की परत बन जा रही है। इससे धुंध (स्मॉग) बन रहा है। बीते आठ दिनों से हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) खराब है। शुक्रवार को एक्यूआई का स्तर 161 दर्ज किया गया, जो थोड़ा खराब स्तर पर है। ऐसे में जब दिवाली पर जब पटाखे जलेंगे तो प्रदूषण अधिक बढ़ जाएगा।
बारूद वरिष्ठ नागरिक और बीमार लोगों के लिए बहुत खतरनाक
दिवाली तो प्रकाश का पर्व है। प्रकाश को लेकर जितनी विधियां हैं, उनका प्रयोग करें। पटाखे का इस पर्व से कोई जुड़ाव नहीं है। यह तो धनाढ्य वर्ग का प्रदर्शन है। अब इसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते जा रहे हैं। यह बारूद वरिष्ठ नागरिक और बीमार लोगों के लिए बहुत खतरनाक है। समाज को इसके लिए संवेदनशील होने की जरूरत है। हर किसी को पटाखे न जलाने का संकल्प लेना चाहिए। ऐसा करके हम बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगा सकते हैं। इस लोग समझें। हर किसी के संवदेनशील होने से ही इस पर रोक लग सकती है।
- डॉ. घनश्याम शर्मा, सेवानिवृत, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान
पटाखों से बचकर हरित पटाखों का प्रयोग करें
सर्दियों में वायु प्रदूषण काफी लंबे समय तक बना रहता है इसलिए गर्मियों की तुलना में अधिक तीव्र दर से सांस के साथ भीतर जाता है। दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पटाखों से बचकर हरित पटाखों (ग्रीन पटाखा ) का प्रयोग करें। वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए साल 2018 में ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट लाया गया था। इनमें एलुमिनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे खतरनाक केमिकल नहीं होते हैं। इको-फ्रेंडली दीयों का प्रयोग से अधिकांश लोग दिवाली में घरों को रोशन करते हैं।
- डॉ. संजय राय, प्रवक्ता, भूगोल, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज बाली
बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है
शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए भी हानिकारक है। तेज आवाज के पटाखे बजने पर हृदय रोगियों को जो झटका लगता है। इसलिए शोर को जितना कम किया जा सके, उतना बेहतर होगा।
डॉ. एसएम रफीक, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ
गंधक और पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती है। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
डॉ. एएम भाष्कर, फिजिशियन
अप्रिय स्थिति में इन नंबरों पर करें सूचित
दुकानदार या आमजन जिले मेें कहीं भी दुकानों पर किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर अग्निशमन विभाग के नियंत्रण कक्ष 9454418796, 9454418795 व 8887620951 पर सूचित करें। सिसवा क्षेत्र में सहायता के लिए 9454418798 व 6387300058, निचलौल क्षेत्र मेें सहायता के लिए 8765390252, नौतनवां क्षेत्र के लिए 9415980689 पर सूचना दें। इसके साथ ही 101, 112 व अपने नजदीकी थाने के नंबर के माध्यम से भी वे सूचना दे सकते हैं।