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Maharajganj News: हजरत इमामे हुसैन परिवार और 72 साथियों के जंग में हो गए थे शहीद
Sun, 07 Jul 2024 06:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 07 Jul 2024 06:20 PM IST
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मिठौरा। इस्लामिक नया साल मुहर्रम महीने की पहली तारीख से शुरू हो चुका है। मुहर्रम की दसवीं तारीख दुनिया भर के अकीदतमंदों के लिए गम लेकर आती है। सोमवार को मुहर्रम की पहली तारीख है।
सिंदुरिया मस्जिद के इमाम हाजी मोहम्मद हुसैन निजामी के अनुसार, मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म के इतिहास के ऐसे हिस्से की याद ताजा कर देता है जो पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए गम का कारण होता है। यही वो महीना है जिसकी 10वीं तारीख को इस्लाम के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमामे हुसैन अपने परिवार और 72 साथियों के कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे।
ये एक ऐसी जंग थी, जिसमें यजीद की हजारों की सेना के सामने हारना तय तो था, लेकिन इसके बाद भी हजरत इमाम हुसैन ने घुटने नहीं टेके। यजीदी सेना ने फरात नदी का पानी बंद कर दिया। तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर भी लड़ाई के समय में भी नमाज पढ़ा और वह इस्लाम धर्म के लिए सच्चाई की राह पर चलते हुए शहीद हो गए। उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि कैसी भी मुश्किल घड़ी आए नमाज नहीं छोड़ना चाहिए। अल्लाह और उसके रसूल हजरत मोहम्मद के बताए हुए इस्लाम धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। हजरत इमामे हुसैन दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुहर्रम के महीने में रोजे रखने के बहुत फायदे हैं। इस महीने का रोजा रमजान महीने के रोजे के अलावा अन्य रोजा से अच्छा है।
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सिंदुरिया मस्जिद के इमाम हाजी मोहम्मद हुसैन निजामी के अनुसार, मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म के इतिहास के ऐसे हिस्से की याद ताजा कर देता है जो पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए गम का कारण होता है। यही वो महीना है जिसकी 10वीं तारीख को इस्लाम के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमामे हुसैन अपने परिवार और 72 साथियों के कर्बला की जंग में शहीद हो गए थे।
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ये एक ऐसी जंग थी, जिसमें यजीद की हजारों की सेना के सामने हारना तय तो था, लेकिन इसके बाद भी हजरत इमाम हुसैन ने घुटने नहीं टेके। यजीदी सेना ने फरात नदी का पानी बंद कर दिया। तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर भी लड़ाई के समय में भी नमाज पढ़ा और वह इस्लाम धर्म के लिए सच्चाई की राह पर चलते हुए शहीद हो गए। उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि कैसी भी मुश्किल घड़ी आए नमाज नहीं छोड़ना चाहिए। अल्लाह और उसके रसूल हजरत मोहम्मद के बताए हुए इस्लाम धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। हजरत इमामे हुसैन दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुहर्रम के महीने में रोजे रखने के बहुत फायदे हैं। इस महीने का रोजा रमजान महीने के रोजे के अलावा अन्य रोजा से अच्छा है।
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