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Maharajganj News: जहां होनी थी हरियाली, वहां कंकरीट का जंगल
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मऊपाकड़ में शमशान घाट के तरफ जाने पर बना होटल व दुकान।संवाद
ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में धड़ल्ले से बन रहे मकान, दुकान, होटल, अधिकारी बेखबर
शहर को हरा भरा रखने की मंशा पर फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर को हरा-भरा रखने की मंशा पर पानी फिर गया है। ग्रीन बेल्ट एरिया में धड़ल्ले से मकान, दुकान, होटल बन कर तैयार हो चुके हैं। बस नाम की ग्रीन बेल्ट है। दस्तावेज में बेहतर ढंग से शहर हरा भरा दिखेगा, लेकिन असल तस्वीर देखकर हर कोई दंग रह जाएगा। हैरत की बात है कि शहर के ज्यादातर लोगों को ग्रीन बेल्ट के बारे में जानकारी भी नहीं है। टैक्स जमाकर नक्शा पास कराया, फिर मकान, दुकान बनवाकर दैनिक दिनचर्या में जुट गए। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के नक्शे को देखने पर पता चलता है कि जिस स्थान को पार्क दर्शाया गया है, वहां भी लोगों ने आराम से घर बनवा लिया है। संबंधित अधिकारियों ने कभी नोटिस देने की जहमत नहीं उठाई।
मंगलवार को शहर में ग्रीन बेल्ट की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले पहलू उजागर हुए। शहर के कालेज रोड से आगे बढ़ने पर मऊपाकड़ दुर्गा मंदिर मिला, यहां से थोड़ी दूरी तय करने पर एक इंटरलाकिंग सड़क मिली। यह सड़क सीधे श्मशान घाट की ओर जाती है। सड़क से लेकर बलिया नाले के किनारे श्मशान घाट तक कागज में ग्रीन बेल्ट दर्शाया गया है। यहां होटल, रेस्टारेंट, बड़ी दुकानें व तमाम घर बन चुके हैं। कंकरीट की इमारत से ग्रीन बेल्ट की खूबसूरती को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि भैया ग्रीन बेल्ट क्या होता है। अपना जिला पूरी ग्रीन बेल्ट यानी जंगल के किनारे बसा है। यह बातचीत हो रही थी सुरेश कुमार रास्ते से होकर गुजर रहे थे। वह दो मिनट रुककर पूछते हैं, भाई फोटो क्यों ले रहे हैं। उनको बताया गया कि यह ग्रीन बेल्ट एरिया है। यह सुनकर वह हंसकर आगे बढ़ते हुए बोले कि क्या होगा, जब शुरू में ध्यान नहीं दिया गया। हर तरफ घर बन गया है तो हरियाली कहां से होगी।
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बलिया नाले के दोनों किनारे हैं ग्रीन बेल्ट
शहर में बलिया नाले का दोनों किनारे ग्रीन बेल्ट है। किनारे-किनारे मकान बन चुके हैं। पुल से शुरू होकर आगे तक मकान बना है। किनारों पर कुछ पुराने पेड़ लगे हैं। कहीं झाड़ियां नाले की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ तो नाले के किनारे तक घर बन चुके हैं। इस क्षेत्र के रहने वाले लोगों को पता ही नहीं है कि ग्रीन बेल्ट के दायरे में यह क्षेत्र आता है।
रामदीन यादव ने बताया कि यह पहली बार सुन रहा हूं कि बलिया नाले के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट है। अगर इस तरह का है तो अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
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पोखरी ग्रीन बेल्ट अतिक्रमण का शिकार
कोतवाली से बांसपार जाने वाले रोड पर आगे बढ़ने पर महज 200 मीटर की दूरी पर एक पोखरी है। इस को नक्शे में ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है, लेकिन मौके पर चारों तरफ से घर बन चुके हैं। वर्तमान तस्वीर देखकर पता ही नहीं चलता है कि यह ग्रीन बेल्ट है।
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भाजपा कार्यालय के सामने से नहर के बीच में पार्क एरिया
नक्शे में नहर से लेकर भाजपा कार्यालय के बीच तक क्षेत्र को पार्क एरिया बनाया गया है। इन स्थानों पर ज्यादातर जगह पर मकान, दुकान आदि बन चुके हैं। इस क्षेत्र के लोगों को पता नहीं है कि यह क्षेत्र पार्क के लिए संरक्षित है।
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शहर में कहां कहां हैं ग्रीन बेल्ट
-महुआ से बाइपास चौपरिया से होकर पुलिस लाइन तक
-नहर के पास सड़क
-महुअवा से तरकुलवा पिपरदेउरा के किनारे से होकर रमपुरवा तक
-- बलिया नाले के दोनों तरफ
-पड़री गांव के पश्चिम बांसपार रोड कुटिया टोला तक
-इंदिरा नगर में पोखरी
-मऊपाकड दुर्गा मंदिर से आगे श्मशान घाट तक
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ग्रीन बेल्ट एरिया का संरक्षित कर शहर को हर भरा बनाने की जरूरत है। सबसे पहले तो इसकी जानकारी आमजन को होनी चाहिए। जानकारी होने पर शहर को हरा भरा बनाने में मदद मिलेगी।
-श्वेता जायसवाल, गांधी नगर
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शहर को हरा भरा बनाने की मंशा फाइल में बंद हो चुकी है। ग्रीन बेल्ट को संरक्षित करने की दिशा में कारगर कदम उठाने की जरूरत है। इस क्षेत्र में बारे में लोगों को भी जानकारी देनी चाहिए।
-रितिका चंद्रा
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शहर को हरा भरा रखने की मंशा पर फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर को हरा-भरा रखने की मंशा पर पानी फिर गया है। ग्रीन बेल्ट एरिया में धड़ल्ले से मकान, दुकान, होटल बन कर तैयार हो चुके हैं। बस नाम की ग्रीन बेल्ट है। दस्तावेज में बेहतर ढंग से शहर हरा भरा दिखेगा, लेकिन असल तस्वीर देखकर हर कोई दंग रह जाएगा। हैरत की बात है कि शहर के ज्यादातर लोगों को ग्रीन बेल्ट के बारे में जानकारी भी नहीं है। टैक्स जमाकर नक्शा पास कराया, फिर मकान, दुकान बनवाकर दैनिक दिनचर्या में जुट गए। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के नक्शे को देखने पर पता चलता है कि जिस स्थान को पार्क दर्शाया गया है, वहां भी लोगों ने आराम से घर बनवा लिया है। संबंधित अधिकारियों ने कभी नोटिस देने की जहमत नहीं उठाई।
मंगलवार को शहर में ग्रीन बेल्ट की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले पहलू उजागर हुए। शहर के कालेज रोड से आगे बढ़ने पर मऊपाकड़ दुर्गा मंदिर मिला, यहां से थोड़ी दूरी तय करने पर एक इंटरलाकिंग सड़क मिली। यह सड़क सीधे श्मशान घाट की ओर जाती है। सड़क से लेकर बलिया नाले के किनारे श्मशान घाट तक कागज में ग्रीन बेल्ट दर्शाया गया है। यहां होटल, रेस्टारेंट, बड़ी दुकानें व तमाम घर बन चुके हैं। कंकरीट की इमारत से ग्रीन बेल्ट की खूबसूरती को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
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आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि भैया ग्रीन बेल्ट क्या होता है। अपना जिला पूरी ग्रीन बेल्ट यानी जंगल के किनारे बसा है। यह बातचीत हो रही थी सुरेश कुमार रास्ते से होकर गुजर रहे थे। वह दो मिनट रुककर पूछते हैं, भाई फोटो क्यों ले रहे हैं। उनको बताया गया कि यह ग्रीन बेल्ट एरिया है। यह सुनकर वह हंसकर आगे बढ़ते हुए बोले कि क्या होगा, जब शुरू में ध्यान नहीं दिया गया। हर तरफ घर बन गया है तो हरियाली कहां से होगी।
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बलिया नाले के दोनों किनारे हैं ग्रीन बेल्ट
शहर में बलिया नाले का दोनों किनारे ग्रीन बेल्ट है। किनारे-किनारे मकान बन चुके हैं। पुल से शुरू होकर आगे तक मकान बना है। किनारों पर कुछ पुराने पेड़ लगे हैं। कहीं झाड़ियां नाले की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ तो नाले के किनारे तक घर बन चुके हैं। इस क्षेत्र के रहने वाले लोगों को पता ही नहीं है कि ग्रीन बेल्ट के दायरे में यह क्षेत्र आता है।
रामदीन यादव ने बताया कि यह पहली बार सुन रहा हूं कि बलिया नाले के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट है। अगर इस तरह का है तो अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
पोखरी ग्रीन बेल्ट अतिक्रमण का शिकार
कोतवाली से बांसपार जाने वाले रोड पर आगे बढ़ने पर महज 200 मीटर की दूरी पर एक पोखरी है। इस को नक्शे में ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है, लेकिन मौके पर चारों तरफ से घर बन चुके हैं। वर्तमान तस्वीर देखकर पता ही नहीं चलता है कि यह ग्रीन बेल्ट है।
भाजपा कार्यालय के सामने से नहर के बीच में पार्क एरिया
नक्शे में नहर से लेकर भाजपा कार्यालय के बीच तक क्षेत्र को पार्क एरिया बनाया गया है। इन स्थानों पर ज्यादातर जगह पर मकान, दुकान आदि बन चुके हैं। इस क्षेत्र के लोगों को पता नहीं है कि यह क्षेत्र पार्क के लिए संरक्षित है।
शहर में कहां कहां हैं ग्रीन बेल्ट
-महुआ से बाइपास चौपरिया से होकर पुलिस लाइन तक
-नहर के पास सड़क
-महुअवा से तरकुलवा पिपरदेउरा के किनारे से होकर रमपुरवा तक
-पड़री गांव के पश्चिम बांसपार रोड कुटिया टोला तक
-इंदिरा नगर में पोखरी
-मऊपाकड दुर्गा मंदिर से आगे श्मशान घाट तक
ग्रीन बेल्ट एरिया का संरक्षित कर शहर को हर भरा बनाने की जरूरत है। सबसे पहले तो इसकी जानकारी आमजन को होनी चाहिए। जानकारी होने पर शहर को हरा भरा बनाने में मदद मिलेगी।
-श्वेता जायसवाल, गांधी नगर
शहर को हरा भरा बनाने की मंशा फाइल में बंद हो चुकी है। ग्रीन बेल्ट को संरक्षित करने की दिशा में कारगर कदम उठाने की जरूरत है। इस क्षेत्र में बारे में लोगों को भी जानकारी देनी चाहिए।
-रितिका चंद्रा