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रिकवरी के आदेश
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बिना एनओसी ग्राम पंचायत ने करा दी नहर की सफाई
घुघली (महराजगंज)। बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के क्षेत्र के ढेकही गांव के माइनर की सिल्ट सफाई कराने में अब ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मामले में ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने भी सिंचाई विभाग देवरिया के अवर अभियंता हिमांशु यादव के खिलाफ घुघली थाने में केस दर्ज कराया है ।
ग्रामीणों की शिकायत पर उजागर हुए मामले में पता चला कि एक ही वित्तीय वर्ष में ढेंकही स्थित माइनर में सिल्ट निकासी के नाम पर ग्राम पंचायत ने मनरेगा से तथा सिंचाई विभाग ने भी कार्य के एवज में धन की निकासी की। नहर में सिल्ट सफाई केे लिए ग्राम पंचायत ने सिंचाई खंड द्वितीय देवरिया को पत्र भेज अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा था, लेकिन सिंचाई विभाग ने एनओसी नहीं दी। ऐसे में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के काम कराना ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को भारी पड़ सकता है। उपायुक्त श्रम रोजगार अनिल चौधरी ने कहा कि बिना एनओसी मनरेगा से काम कराने वाले ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों से धन की वसूली कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी।
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भुगतान पर सिंचाई विभाग व ग्राम पंचायत आमने-सामने
ढेकही गांव से मेदनीपुर माइनर तक सिंचाई विभाग ने टेंडर निकालकर करीब सात लाख रुपये की लागत से सिल्ट सफाई कराने का दावा किया है। जबकि इसी माइनर पर ग्राम पंचायत की ओर से बिना एनओसी के लगभग ढाई किलोमीटर सिल्ट सफाई का कार्य कराते हुए 6.83 लाख रुपये का मनरेगा से भुगतान कराने की बात कही है। दोनों विभाग एक-दूसरे पर गलत तरीके से कार्य कराने का ठीकरा फोड़ रहे हैं।
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घुघली (महराजगंज)। बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के क्षेत्र के ढेकही गांव के माइनर की सिल्ट सफाई कराने में अब ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मामले में ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने भी सिंचाई विभाग देवरिया के अवर अभियंता हिमांशु यादव के खिलाफ घुघली थाने में केस दर्ज कराया है ।
ग्रामीणों की शिकायत पर उजागर हुए मामले में पता चला कि एक ही वित्तीय वर्ष में ढेंकही स्थित माइनर में सिल्ट निकासी के नाम पर ग्राम पंचायत ने मनरेगा से तथा सिंचाई विभाग ने भी कार्य के एवज में धन की निकासी की। नहर में सिल्ट सफाई केे लिए ग्राम पंचायत ने सिंचाई खंड द्वितीय देवरिया को पत्र भेज अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा था, लेकिन सिंचाई विभाग ने एनओसी नहीं दी। ऐसे में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के काम कराना ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को भारी पड़ सकता है। उपायुक्त श्रम रोजगार अनिल चौधरी ने कहा कि बिना एनओसी मनरेगा से काम कराने वाले ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों से धन की वसूली कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी।
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भुगतान पर सिंचाई विभाग व ग्राम पंचायत आमने-सामने
ढेकही गांव से मेदनीपुर माइनर तक सिंचाई विभाग ने टेंडर निकालकर करीब सात लाख रुपये की लागत से सिल्ट सफाई कराने का दावा किया है। जबकि इसी माइनर पर ग्राम पंचायत की ओर से बिना एनओसी के लगभग ढाई किलोमीटर सिल्ट सफाई का कार्य कराते हुए 6.83 लाख रुपये का मनरेगा से भुगतान कराने की बात कही है। दोनों विभाग एक-दूसरे पर गलत तरीके से कार्य कराने का ठीकरा फोड़ रहे हैं।
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