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Maharajganj News: गैंगस्टर एक्ट के दोषी को पच्चीस माह के कारावास की सजा
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जुर्माना अदा न करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा
महराजगंज। अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या एक ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोप सिद्ध होने पर अभियुक्त रहीम उर्फ छोटू उर्फ कोटिया, निवासी धनेवा धनेई, सुखकठिया नगर पालिका परिषद को पच्चीस माह के कठोर कारावास और 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हुए इस प्रकरण में अभियुक्त पर गैंग बनाकर भौतिक आर्थिक व दुनियावी लाभ के लिए गंभीर अपराध करने का आरोप था। ठूठीबारी थाने के उप निरीक्षक को मामले की विवेचना सौंपी गई थी। उन्होंने आवश्यक साक्ष्य जुटाते हुए जांच पूरी की और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में अपने साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से यह साबित किया कि अभियुक्त आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था और उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करना आवश्यक था। सुनवाई के दौरान अभियुक्त के खिलाफ प्रस्तुत किए गए तथ्यों और प्रमाणों को अदालत ने गंभीरता से परखा। न्यायालय ने माना कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं और उसे दोषी करार देने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
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महराजगंज। अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या एक ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोप सिद्ध होने पर अभियुक्त रहीम उर्फ छोटू उर्फ कोटिया, निवासी धनेवा धनेई, सुखकठिया नगर पालिका परिषद को पच्चीस माह के कठोर कारावास और 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हुए इस प्रकरण में अभियुक्त पर गैंग बनाकर भौतिक आर्थिक व दुनियावी लाभ के लिए गंभीर अपराध करने का आरोप था। ठूठीबारी थाने के उप निरीक्षक को मामले की विवेचना सौंपी गई थी। उन्होंने आवश्यक साक्ष्य जुटाते हुए जांच पूरी की और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में अपने साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से यह साबित किया कि अभियुक्त आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था और उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करना आवश्यक था। सुनवाई के दौरान अभियुक्त के खिलाफ प्रस्तुत किए गए तथ्यों और प्रमाणों को अदालत ने गंभीरता से परखा। न्यायालय ने माना कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं और उसे दोषी करार देने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
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