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Maharajganj News: दिव्यांग के साथ धोखाधड़ी, फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी घोटाला
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महराजगंज। बृजमनगंज थाना क्षेत्र में दिव्यांग और गरीब व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित बबलू, निवासी ग्राम करमहा टोला बड़की मैनहिया ने साइबर क्राइम थाना महराजगंज में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके आधार कार्ड और दिव्यांग प्रमाणपत्र का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई और जीएसटी घोटाला किया गया। इस मामले में रजनीश उर्फ राजन निवासी ग्राम उसका राजा, थाना उसका, जिला सिद्धार्थनगर को मुख्य आरोपी बताया गया है।
बबलू ने अपने प्रार्थनापत्र में बताया कि उन दोनों को आंखों से दिव्यांग हैं, और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वह अग्रहरि ट्रेडर्स, ढोढघाट के मालिक आदेश की दुकान पर अक्सर आते-जाते थे। इस दुकान पर रजनीश उर्फ राजन मुनीम थे। 10 मई 2015 को रजनीश ने बबलू को बहलाया कि वह दिव्यांग हैं, इसलिए उनकी पेंशन बनवाने में मदद करेंगे। इसके लिए रजनीश ने बबलू से उनका आधार कार्ड, दिव्यांग प्रमाणपत्र और मोबाइल से खींची गई फोटो ली। उसने दुकान के मालिक के आदेश के सामने ही यह प्रक्रिया की और आश्वासन दिया कि एक-दो महीने में पेंशन शुरू हो जाएगी।
हालांकि, बबलू को कोई पेंशन नहीं मिली। वर्षों बाद 29 जून 2025 को अमीन उनके घर पहुंचे और एक नोटिस थमाया, जिसमें अग्रहरि ट्रेडर्स, ढोढघाट के प्रोप्राइटर के रूप में बबलू का नाम दर्ज था। नोटिस में 2016-17 के लिए जीएसटी टैक्स बकाया होने की बात कही गई। बबलू ने बताया कि वह गरीब हैं और उनकी कोई फर्म नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रजनीश ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म बनाई और ऑनलाइन जीएसटी नंबर लेकर धोखाधड़ी की।
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बबलू ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कर रजनीश के खिलाफ एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थनापत्र में बबलू ने स्पष्ट किया कि रजनीश ने उनकी पहचान का गलत उपयोग कर जालसाजी की और आर्थिक नुकसान पहुंचाया। साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि 15 अगस्त को शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अभियोग पंजीकृत किया गया है।
आईटी विशेषज्ञ अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि यह मामला आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है, जो साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है। यह घटना समाज में कमजोर वर्गों के शोषण और डिजिटल धोखाधड़ी के खतरों को उजागर करती है।
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बचाव के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत
-अगर कोई अपरिचित व्यक्ति किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के लिए कहता है तो न करें।
- किसी व्यक्ति के साथ अपनी बैंक डिटेल, एटीएम कार्ड नंबर, कार्ड की एक्सपायरी एवं कार्ड पर पीछे लिखे तीन डिजिट के सीवीवी नंबर को किसी के साथ शेयर न करें।
- किसी अपरिचित नंबर से आपके पास फोन मैसेज या व्हाट्सएप मैसेज पर कोई लिंक या फोटो आए तो उस पर क्लिक न करें।
- नेटवर्क को 5 जी नेटवर्क में शिफ्ट करवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले से सुरक्षित रहें।
- अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की फोटो सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर डीपी के रूप में प्रयोग कर धोखाधड़ी कर रहे हैं, सावधान रहें।
- व्हाट्सएप पर किसी भी अज्ञात नंबर से आई किसी भी प्रकार की वीडियो या ऑडियो कॉल को रिसीव न करें
- ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
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बबलू ने अपने प्रार्थनापत्र में बताया कि उन दोनों को आंखों से दिव्यांग हैं, और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वह अग्रहरि ट्रेडर्स, ढोढघाट के मालिक आदेश की दुकान पर अक्सर आते-जाते थे। इस दुकान पर रजनीश उर्फ राजन मुनीम थे। 10 मई 2015 को रजनीश ने बबलू को बहलाया कि वह दिव्यांग हैं, इसलिए उनकी पेंशन बनवाने में मदद करेंगे। इसके लिए रजनीश ने बबलू से उनका आधार कार्ड, दिव्यांग प्रमाणपत्र और मोबाइल से खींची गई फोटो ली। उसने दुकान के मालिक के आदेश के सामने ही यह प्रक्रिया की और आश्वासन दिया कि एक-दो महीने में पेंशन शुरू हो जाएगी।
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हालांकि, बबलू को कोई पेंशन नहीं मिली। वर्षों बाद 29 जून 2025 को अमीन उनके घर पहुंचे और एक नोटिस थमाया, जिसमें अग्रहरि ट्रेडर्स, ढोढघाट के प्रोप्राइटर के रूप में बबलू का नाम दर्ज था। नोटिस में 2016-17 के लिए जीएसटी टैक्स बकाया होने की बात कही गई। बबलू ने बताया कि वह गरीब हैं और उनकी कोई फर्म नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रजनीश ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म बनाई और ऑनलाइन जीएसटी नंबर लेकर धोखाधड़ी की।
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बबलू ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कर रजनीश के खिलाफ एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थनापत्र में बबलू ने स्पष्ट किया कि रजनीश ने उनकी पहचान का गलत उपयोग कर जालसाजी की और आर्थिक नुकसान पहुंचाया। साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि 15 अगस्त को शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अभियोग पंजीकृत किया गया है।
आईटी विशेषज्ञ अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि यह मामला आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है, जो साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है। यह घटना समाज में कमजोर वर्गों के शोषण और डिजिटल धोखाधड़ी के खतरों को उजागर करती है।
बचाव के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत
-अगर कोई अपरिचित व्यक्ति किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के लिए कहता है तो न करें।
- किसी व्यक्ति के साथ अपनी बैंक डिटेल, एटीएम कार्ड नंबर, कार्ड की एक्सपायरी एवं कार्ड पर पीछे लिखे तीन डिजिट के सीवीवी नंबर को किसी के साथ शेयर न करें।
- किसी अपरिचित नंबर से आपके पास फोन मैसेज या व्हाट्सएप मैसेज पर कोई लिंक या फोटो आए तो उस पर क्लिक न करें।
- नेटवर्क को 5 जी नेटवर्क में शिफ्ट करवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले से सुरक्षित रहें।
- अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की फोटो सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर डीपी के रूप में प्रयोग कर धोखाधड़ी कर रहे हैं, सावधान रहें।
- व्हाट्सएप पर किसी भी अज्ञात नंबर से आई किसी भी प्रकार की वीडियो या ऑडियो कॉल को रिसीव न करें
- ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।