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Maharajganj News: चार डॉक्टरों पर दो लाख की आबादी को सेहतमंद बनाने की जिम्मेदारी
Mon, 16 Dec 2024 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:01 AM IST
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सिंदुरिया। ग्राम सभा जगदौर में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठौरा इन दिनों चिकित्सकों की कमी जूझ रहा है। सीएचसी पर संसाधन व चिकित्सकों के अभाव में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। यह रेफर केंद्र बनकर रह गया है।
मिठौरा सीएचसी अंतर्गत कोहड़वल, चौक स्थित न्यू पीएचसी में भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। ऐसे में दोनों पीएचसी केंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। ओपीडी में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि इन अस्पतालों के भरोसे 82 गांव के लगभग दो लाख की आबादी को सेहतमंद बनाने की जिम्मेदारी है। चिकित्सकों की कमी के कारण सीएचसी पर नियुक्त दो डॉक्टरों को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। डॉक्टर दिन में ओपीडी और रात में इमरजेंसी ड्यूटी करते हैं। लोग यहां इलाज के लिए आते तो हैं लेकिन, चिकित्सक व संसाधन के अभाव में अधिकांश मरीजों का प्राथमिक उपचार कर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है।
जनपद में जहां चिकित्सकों की तैनाती नहीं है, ऐसे सभी सीएचसी एवं पीएचसी की सूची विभाग की ओर से तैयार हुई है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती करा दी जाएगी। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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-डाॅ. श्रीकांत शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी
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मिठौरा सीएचसी अंतर्गत कोहड़वल, चौक स्थित न्यू पीएचसी में भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। ऐसे में दोनों पीएचसी केंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। ओपीडी में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि इन अस्पतालों के भरोसे 82 गांव के लगभग दो लाख की आबादी को सेहतमंद बनाने की जिम्मेदारी है। चिकित्सकों की कमी के कारण सीएचसी पर नियुक्त दो डॉक्टरों को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। डॉक्टर दिन में ओपीडी और रात में इमरजेंसी ड्यूटी करते हैं। लोग यहां इलाज के लिए आते तो हैं लेकिन, चिकित्सक व संसाधन के अभाव में अधिकांश मरीजों का प्राथमिक उपचार कर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है।
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जनपद में जहां चिकित्सकों की तैनाती नहीं है, ऐसे सभी सीएचसी एवं पीएचसी की सूची विभाग की ओर से तैयार हुई है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती करा दी जाएगी। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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-डाॅ. श्रीकांत शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी