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Maharajganj News: बलिया नाले के किनारे पड़े अवशेष से फैल रही दुर्गंध

Sun, 21 Apr 2024 03:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2024 03:43 AM IST
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Foul smell spreading from remains lying on the banks of Ballia drain
महराजगंज। नवरात्र में पूजा पाठ करने के बाद अवशेष को बलिया नाले के किनारे फेंक दिया गया है। इससे दुर्गंध से परेशानी हो रही है। वहीं शहर की पोखरियों में भी पूजन अवशेष फेंके गए हैं। चैत्र नवरात्र में स्थापित देवी प्रतिमाओं के विसर्जन में जिम्मेदार इस बार आस्था के साथ-साथ रीति-रिवाज भी भूल गए।
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शहर के बलिया नाला पुल के पास किनारे मैले पानी और मलबे में पड़ी प्रतिमाएं इस बात की गवाही दे रही हैं। विसर्जित प्रतिमाओं के अवशेष देखकर भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं।हैरत तो इस बात की है कि विसर्जन से पूर्व घाट पर किसी प्रकार की कोई तैयारी ही नहीं थी। शारदीय नवरात्र में प्रतिमा विसर्जन कुछ तालाबों में कर दिया गया। शारदीय नवरात्र की तरह चैत्र नवरात्र में भी देवी प्रतिमाएं स्थापित करने का चलन शुरू हुआ है। कई जगह प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों की नौ दिन पूजा के बाद बृहस्पतिवार रात में विसर्जन किया गया।
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शहर और गांवों में जो मूर्तियां स्थापित की गई थीं, उनका विसर्जन बलिया नाला समेत तालाबों पर हुआ। लोगों ने घरों में जिन छोटी मूर्तियों की स्थापना कर पूजा की है, वे मूर्तियां और चुनरी, नारियल सहित अन्य सामान भी राजघाट पर यत्र-तत्र बिखरे पड़े हैं।
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शहर के बलिया नाला तट पर शनिवार को दोपहर धूप में कुछ लोग मूर्तियों के अवशेष बीन रहे थे। कोई नारियल और शृंगार के सामान तलाश रहा था तो कोई कपड़े में कुछ पाने की कोशिश में जुटा था। छोटी मूर्तियों के साथ बच्चे खेलते दिखे। सड़क से होकर जा रहे लोग यह दृश्य देखकर दुःखी नजर आए।
प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों का विसर्जन मंत्रों के माध्यम से किया जाता है। भगवती से प्रार्थना की जाती है कि हमने आपका आह्वान किया और पूर्णाहुति कर दी। अब आप अपने स्थान को प्रस्थान करें। उसके बाद आस्था और श्रद्धा भाव से विसर्जन करना चाहिए। विसर्जित मूर्तियों या उनके अवशेष पर किसी का पैर नहीं पड़ना चाहिए। मूर्ति में उपयोग हुई किसी भी सामग्री का गलत उपयोग नहीं होना चाहिए। सही तरीके से विसर्जन होगा तो आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। स्वच्छता बनी रहेगी और जीव- जंतुओं को नुकसान भी नहीं होगा।


-पंडित दिवाकर मणि त्रिपाठी, आचार्य, मां पीतंबरा ज्योतिष संस्थान
एनजीटी का निर्देश है कि नदी में सीधे तौर पर मूर्तियों का विसर्जन नहीं करना चाहिए, इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। मूर्तियों को नदी की मुख्य धारा में प्रवाहित करने से उसमें लगे प्लास्टर ऑफ पेरिस और पेंट से नुकसान होता है। इन- मूर्तियों में लेड, क्रोमियम, आर्सेनिक व एंटीमनी जैसे हानिकारक तत्व होते हैं। बेहतर होगा कि मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाए और उसमें हर्बल रंगों को प्रयोग किया जाए।
-दिवाकर सिंह, अध्यक्ष, भूगोल विभाग, जवाहर लाल नेहरू पीजी कालेज, महराजगंज
लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है। शहर में बलिया नाला से लेकर अन्य स्थानों पर सफाई कर्मियों की टीम भेजकर सफाई कराई जाएगी।
-आलोक कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका महराजगंज
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