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Maharajganj News: बाढ़ आश्रय स्थल सीएचसी में भरा पानी, एक हजार लोगों को सुरक्षित निकाला

Tue, 29 Sep 2026 02:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:18 AM IST
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Floodwaters enter CHC-turned-shelter; 1,000 people safely evacuated.
बाढ़ आश्रय केंद्र बनाया गया सीएचसी सोहगीबरवा भी डूबा।
निचलौल क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों को ठहराया गया था सोहगीबरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में
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निचलौल। नारायणी नदी में आई बाढ़ के कारण सोमवार को बाढ़ आश्रय स्थल सोहगीबरवा सीएचसी भवन को खाली कराया गया। सीएचसी में बाढ़ पीड़ितों को ठहराया गया था। सोमवार की सुबह तक भवन के भूतल पर करीब पांच फीट तक पानी भरने के बाद सोहगीबरवा, शिकारपुर व बोथहा के करीब एक हजार लोगों को नेबुआ-नौरंगिया के ऊंचे स्थान पर पहुंचाया गया।
जानकारी के अनुसार, नेपाल में पहाड़ों और जनपद में स्थानीय स्तर पर हुई बारिश के कारण क्षेत्र की नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। रविवार को ही नारायणी नदी में आई बाढ़ के कारण सोहगीबरवा, शिकारपुर व बोथहा के करीब 20 हजार लोग घिर गए। लोगों को घरों से निकाल कर सोहगीबरवा सीएचसी में बनाए गए बाढ़ स्थल पर पहुंचाया गया था। सोमवार उसमें भी पानी भरने के बाद लोगों को निकाला गया।
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एनडीआरएफ की टीम ने सोहगीबरवा सीएचसी से एक हजार लोगों को 25 नाव के जरिये सीएचसी से करीब आठ किमी दूर बनाए गए नेबुआ-नौरंगिया के ऊंचे स्थानों पर शाम तक शिफ्ट कर दिया। सोमवार की शाम तक इन सबको वहां पर शिफ्ट करा दिया गया था। वहीं इन तीनों गांवों के 100 पक्के मकान के छत पर गांवों के दर्जनों परिवार को प्रशासन ने शिफ्ट कराया। साथ ही उन लोगों को छत पर लगाने के लिए तिरपाल भी दिया गया।
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घटने लगा पानी, खतरा टला नहीं


सोमवार दोपहर बाद नदी का जलस्तर घटने लगा। शाम छह बजे करीब 3.21 लाख क्यूसेक पानी का स्तर दर्ज किया गया। प्रशासन ने लाउडस्पीकर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की। अधिकांश घर अभी पानी में डूबे हैं, इसलिए ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। ऊंचे मकानों और टीलों पर शरण लिए लोगों तक नावों से भोजन, पानी और जरूरी सामान पहुंचाया गया। एसडीआरएफ ने नावों की संख्या बढ़ाई। मोबाइल टावर का जनरेटर पानी में डूबने से नेटवर्क भी ठप हो गया, बावजूद इसके राहत-बचाव अभियान जारी रहा।



गेड़हवा-कन्मीशवा में 350 घर प्रभावित, पशुओं को लेकर बढ़ी चिंता



निचलौल क्षेत्र के गेड़हवा और कन्मीशवा में 350 से अधिक घर बाढ़ से प्रभावित हुए। गांव में ही बाढ़ आश्रय केंद्र बनाकर भोजन-पानी की व्यवस्था की गई। मेडिकल टीम भी मौके पर पहुंची। विधायक प्रेम सागर पटेल, डीएम गौरव सिंह सोगरवाल और एसपी शक्ति मोहन अवस्थी ने आश्रय स्थल पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। बाढ़ के दौरान कई पशु पशुपालकों से अलग हो गए। प्रशासन के अनुसार अभी किसी पशु की मौत की सूचना नहीं है। ऊंचे स्थानों पर कुछ पशु दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों की प्राथमिकता इस समय अपने परिवारों को सुरक्षित निकालना बनी हुई है, जिसके कारण पशुओं की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे
सोहगीबरवा में एसडीएम अवनीश त्रिपाठी, एडीएम प्रशांत कुमार भारती और सीओ रविंद्र कुमार सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की। तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर में कमी आई है। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। पेयजल की समस्या को देखते हुए बोतलबंद पानी भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएचसी के ऊपरी तल पर लोग सुरक्षित हैं और वहां आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। ऊंचे मकानों में रह रहे परिवारों को भी त्रिपाल उपलब्ध कराकर भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। पानी घटने से स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।



बाढ़ के पानी से लक्ष्मीपुर खुर्द गांव घिरा, संपर्क मार्ग पर बह रहा है दो फीट पानी



ठूठीबारी। नेपाल के पहाड़ समेत भारतीय क्षेत्र में बीते दिनों हुए भारी बारिश से भारतीय क्षेत्र में बहने वाली नेपाली नदियां उफना गई है। जिससे गांव से लेकर सिवान तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है वहीं नदी किनारे बसे गांव के लोगों की दिक्कतें बढ़ गई है। ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मीपुर खुर्द गांव के पूरब गंडक नदी, दक्षिण भौरहियां नदी, पश्चिम चंदन नदी होकर बहती है। नेपाल के पहाड़ समेत भारतीय क्षेत्र में बीते दिनों से हुई भारी बारिश से पहाड़ी नदियां उफान पर हो गई है। जिससे लक्ष्मीपुर खुर्द गांव बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। वहीं लक्ष्मीपुर खुर्द गांव से गडौरा जाने वाले मुख्य मार्ग, प्राथमिक विद्यालय व पुलिस चौकी बाढ़ के पानी से भरा हुआ है।
भीम सहानी, विपिन, अनिल सहानी, देवेंद्र यादव, सोनू जायसवाल, अनिल यादव , मनौवर , इशा मोहम्मद, धीरेंद्र यादव, मुन्ना भारती, बृहस्पति यादव आदि ने बताया कि गांव के पश्चिम चंदन नदी के पूर्वी छोर पर बांध निर्माण कराया गया है भारत नेपाल बॉर्डर पर बांध नहीं बनाया गया है जिससे चंदन नदी जब ओवर फ्लो हुआ तो बॉर्डर रास्ते बाढ़ का पानी गांव के सीवान जलमग्न हो गया ग्रामीण परेशानियों से जूझ रहे हैं वहीं लक्ष्मीपुर खुर्द गांव से गडौरा बाजार जाने वाले सड़क पर दो फिट ऊंचा पानी बह रहा है।

स्पीकअप


रविवार की पूरी रात परिवार के साथ छत पर बैठकर जागते रहे। पानी लगातार बढ़ रहा था। आधी रात के बाद अधिकारियों और सगे-संबंधियों से फोन पर संपर्क कर अपना दर्द बताया, लेकिन राहत की कोई ठोस खबर नहीं मिल रही थी। सोमवार सुबह आसपास की छतों पर लोगों को देखकर हिम्मत बंधी। परिवार को धैर्य रखने के लिए कहते रहे लेकिन रात का वह भयावह मंजर अब भी आंखों के सामने है।

- लल्लन यादव, भोतहा गांव निवासी


परिवार और मवेशियों के साथ पूरी रात बाढ़ आश्रय स्थल में जागकर बिताई। गांव में लगातार पानी बढ़ने की सूचना से परिवार की चिंता बढ़ती रही। सोमवार सुबह से पानी घटने की खबर मिलने लगी तो कुछ राहत मिली। दोपहर बाद गांव में पानी कम होने लगा। अब पानी और स्थिति सामान्य होने का इंतजार है ताकि परिवार के साथ घर लौट सकें।
- रामप्यारे, बैरा टोला, गेड़हवा

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