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Maharajganj News: इस्राइल तकनीक से जिले में होगा मछली उत्पादन
Wed, 16 Jul 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:10 AM IST
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महराजगंज। आजीविका मिशन की महिलाओं को कमाई का नया जरिया देने की तैयारी है। सदर ब्लाॅक की समूह की महिलाओं को इस्राइल तकनीक से मछली उत्पादन से जोड़ा जाएगा।
इस तकनीक के तहत बायो फ्लास्क में कम जगह में मछलियां पालकर महिलाएं कमाई बढ़ाएंगी। इसके लिए 10 दिन का शिविर लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस्राइल तकनीक से बायो फ्लास्क टैंक में मछली आजीविका समूह की महिलाएं करेंगी। सदर बीबीएम अनिल ने बताया कि इस्राइल तकनीक से मछली पालन के लिए तालाब की जरूरत नहीं होती और मत्स्य पालन बायो फ्लास्क टैंक के जरिये किया जाता है। फ्लास्क को फिट कराने के लिए बहुत अधिक जगह की जरूरत नहीं होगी।
टैंक में एक सीजन में पानी सिर्फ एक बार ही भरना होगा। बायो फ्लास्क में चिपनुमा डिवाइस होगी जो टैंक के पानी की गुणवत्ता, तापमान और ऑक्सीजन उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। एक बायो फ्लास्क के लिए कुल 50 हजार रुपये निवेश करना होगा, जिसमें 60 फीसदी अनुदान मत्स्य संपदा योजना के जरिये उपलब्ध है।
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एक बायो फ्लास्क के जरिए चार से पांच क्विंटल उत्पादन महज तीन माह में होगा। मत्स्य पालन की संभावना को देखकर इसके बारे में आजीविका समूह की महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें आय का एक जरिया मिल सके।
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इस तकनीक के तहत बायो फ्लास्क में कम जगह में मछलियां पालकर महिलाएं कमाई बढ़ाएंगी। इसके लिए 10 दिन का शिविर लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस्राइल तकनीक से बायो फ्लास्क टैंक में मछली आजीविका समूह की महिलाएं करेंगी। सदर बीबीएम अनिल ने बताया कि इस्राइल तकनीक से मछली पालन के लिए तालाब की जरूरत नहीं होती और मत्स्य पालन बायो फ्लास्क टैंक के जरिये किया जाता है। फ्लास्क को फिट कराने के लिए बहुत अधिक जगह की जरूरत नहीं होगी।
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टैंक में एक सीजन में पानी सिर्फ एक बार ही भरना होगा। बायो फ्लास्क में चिपनुमा डिवाइस होगी जो टैंक के पानी की गुणवत्ता, तापमान और ऑक्सीजन उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। एक बायो फ्लास्क के लिए कुल 50 हजार रुपये निवेश करना होगा, जिसमें 60 फीसदी अनुदान मत्स्य संपदा योजना के जरिये उपलब्ध है।
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एक बायो फ्लास्क के जरिए चार से पांच क्विंटल उत्पादन महज तीन माह में होगा। मत्स्य पालन की संभावना को देखकर इसके बारे में आजीविका समूह की महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें आय का एक जरिया मिल सके।