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Maharajganj News: आज माघी पूर्णिमा से शुरू हो रहे व्रत-त्योहार
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आठ वर्ष बाद पड़ेंगे दो ज्येष्ठ माह, लग रहा अधिमास
पिछली बार के अधिमास में दो माह तक रहा सावन
महराजगंज। सनातन नवसंवत्सर लगने में अभी कुछ माह बाकी है लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर के 2026 के व्रत व त्योहार आज से शुरू हो रहे हैं। पहला पर्व स्नान-दान का पर्व माघी पूर्णिमा है। ठीक तीन दिन बाद गणेश चतुर्थी पड़ने से प्रथम पूज्य देव की उपासना का पर्व पड़ रहा है। इस बार मकर संक्रांति से पहले सिर्फ गणेश चतुर्थी ही नहीं लगभग 6 माह पहले तक सभी व्रत त्योहार 10 दिन पड़ रहे हैं। यह परिवर्तन नवसंवत्सर में पड़ रहे अधिमास के कारण बताया जा रहा है।
ज्योतिषविद् पं. दिवाकर मणि ने बताया कि सनातन परंपरा ग्रेगोरियन कैलेंडर की जगह विक्रम संवत से चलता है। इसके मुताबिक नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होती। इस बार यह 19 मार्च से शुरू हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह विक्रम संवत 2083 होगा। हिंदी पंचांग के अनुसार 2026 अधिकमास वाला साल होगा। अधिकमास में आठ साल बाद दो ज्येष्ठ माह होंगे। पिछली बार अधिमास में दो सावन पड़े थे। छह महीने में त्योहार पिछले साल से 10 दिन पहले पड़ेंगे और अगले छह महीने में त्योहार 16 से 19 दिन देर से पड़ेंगे। इसलिए इस बार होली 10 दिन पहले चार मार्च को और दीपावली पिछले साल से 17 दिन देरी से आठ नवंबर को मनाई जाएगी।
पुरुषोत्तम माह का चलता रहता चक्र
ज्योतिषाचार्य पं. शरदेंदु पांडेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना में पुरुषोत्तम मास चक्र चलते रहते। इसमें हर तीन साल पर एक मास पर अधिकमास का आता है, जो दो महीने का पड़ता है। अगले 11 साल यानी 2037 में दोबारा ज्येष्ठ मास आएगा। जबकि पिछले करीब 40 वर्षों में 1988, 1999, 2007, 2017 ज्येष्ठ मास दो माह का पड़ चुका है। अगला अधिकमास 2029 में चैत्र मास, 2031 तक भाद्र मास, 2034 में आषाढ़ पर होगा।
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पिछली बार के अधिमास में दो माह तक रहा सावन
महराजगंज। सनातन नवसंवत्सर लगने में अभी कुछ माह बाकी है लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर के 2026 के व्रत व त्योहार आज से शुरू हो रहे हैं। पहला पर्व स्नान-दान का पर्व माघी पूर्णिमा है। ठीक तीन दिन बाद गणेश चतुर्थी पड़ने से प्रथम पूज्य देव की उपासना का पर्व पड़ रहा है। इस बार मकर संक्रांति से पहले सिर्फ गणेश चतुर्थी ही नहीं लगभग 6 माह पहले तक सभी व्रत त्योहार 10 दिन पड़ रहे हैं। यह परिवर्तन नवसंवत्सर में पड़ रहे अधिमास के कारण बताया जा रहा है।
ज्योतिषविद् पं. दिवाकर मणि ने बताया कि सनातन परंपरा ग्रेगोरियन कैलेंडर की जगह विक्रम संवत से चलता है। इसके मुताबिक नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होती। इस बार यह 19 मार्च से शुरू हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह विक्रम संवत 2083 होगा। हिंदी पंचांग के अनुसार 2026 अधिकमास वाला साल होगा। अधिकमास में आठ साल बाद दो ज्येष्ठ माह होंगे। पिछली बार अधिमास में दो सावन पड़े थे। छह महीने में त्योहार पिछले साल से 10 दिन पहले पड़ेंगे और अगले छह महीने में त्योहार 16 से 19 दिन देर से पड़ेंगे। इसलिए इस बार होली 10 दिन पहले चार मार्च को और दीपावली पिछले साल से 17 दिन देरी से आठ नवंबर को मनाई जाएगी।
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पुरुषोत्तम माह का चलता रहता चक्र
ज्योतिषाचार्य पं. शरदेंदु पांडेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना में पुरुषोत्तम मास चक्र चलते रहते। इसमें हर तीन साल पर एक मास पर अधिकमास का आता है, जो दो महीने का पड़ता है। अगले 11 साल यानी 2037 में दोबारा ज्येष्ठ मास आएगा। जबकि पिछले करीब 40 वर्षों में 1988, 1999, 2007, 2017 ज्येष्ठ मास दो माह का पड़ चुका है। अगला अधिकमास 2029 में चैत्र मास, 2031 तक भाद्र मास, 2034 में आषाढ़ पर होगा।
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