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श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर प्रांगण में मकर संक्रांति मेले की तैयारी जोरों पर
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श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर प्रांगण में मकर संक्रांति मेले की तैयारी जोरों पर
कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मेले का आयोजन होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
चौक बाजार। स्थानीय नगर पंचायत स्थित श्री गुरु गोरखनाथ मंदिर प्रांगण में मकर संक्रांति मेले की तैयारी जोरों पर है। दुकानों के आवंटन के बाद दुकानें सजाई जा रही है। बच्चों को लुभाने वाले झूले, ब्रेक डांस, नाव आदि लगाए जा रहे हैं। 15 जनवरी को मकर संक्रांति यानी खिचड़ी का पर्व है जिसे क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मेले का आयोजन होगा।
श्री गुरु गोरक्षनाथ के जन्म के विषय में अनेक कथाएं हैं। नाथ संप्रदाय के लोग गोरखनाथ को शिव का अवतार मानते हैं। इन्होंने ही भूटान, तिब्बत, नेपाल, चीन समेत अन्य देशों में बिखरे नाथ संप्रदाय के लोगों को एक धागे में बांधा था। उनके अनुयायी यह मानते हैं कि कांगड़ा स्थित माता ज्वाला देवी को वचन देकर आने के बाद गुरु गोरक्षनाथ गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे अपनी समाधि लगाई थी और पहली बार थोड़े से चावल की खिचड़ी बनाकर हजारों लोगों को भोजन कराया था तभी से खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
मंदिर के पुजारी फलाहारी बाबा ने बताया कि चौक क्षेत्र श्री गुरु गोरक्षनाथ की तपस्थली है। पहले मंदिर प्रांगण में गोरक्षनाथ के चरणपादुका की पूजा होती थी। लगभग सौ साल पहले महंत दिग्विजय नाथ ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और गोरखनाथ की मूर्ति स्थापित की। सुरक्षा और कोविड को देखते हुए प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए दुकानें सजने लगी हैं। बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई जा रही हैं। मौत का कुंआ भी लगाया जा रहा है। यहां मेला 15 दिनों तक चलता है।
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कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मेले का आयोजन होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
चौक बाजार। स्थानीय नगर पंचायत स्थित श्री गुरु गोरखनाथ मंदिर प्रांगण में मकर संक्रांति मेले की तैयारी जोरों पर है। दुकानों के आवंटन के बाद दुकानें सजाई जा रही है। बच्चों को लुभाने वाले झूले, ब्रेक डांस, नाव आदि लगाए जा रहे हैं। 15 जनवरी को मकर संक्रांति यानी खिचड़ी का पर्व है जिसे क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए मेले का आयोजन होगा।
श्री गुरु गोरक्षनाथ के जन्म के विषय में अनेक कथाएं हैं। नाथ संप्रदाय के लोग गोरखनाथ को शिव का अवतार मानते हैं। इन्होंने ही भूटान, तिब्बत, नेपाल, चीन समेत अन्य देशों में बिखरे नाथ संप्रदाय के लोगों को एक धागे में बांधा था। उनके अनुयायी यह मानते हैं कि कांगड़ा स्थित माता ज्वाला देवी को वचन देकर आने के बाद गुरु गोरक्षनाथ गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे अपनी समाधि लगाई थी और पहली बार थोड़े से चावल की खिचड़ी बनाकर हजारों लोगों को भोजन कराया था तभी से खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
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मंदिर के पुजारी फलाहारी बाबा ने बताया कि चौक क्षेत्र श्री गुरु गोरक्षनाथ की तपस्थली है। पहले मंदिर प्रांगण में गोरक्षनाथ के चरणपादुका की पूजा होती थी। लगभग सौ साल पहले महंत दिग्विजय नाथ ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और गोरखनाथ की मूर्ति स्थापित की। सुरक्षा और कोविड को देखते हुए प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए दुकानें सजने लगी हैं। बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई जा रही हैं। मौत का कुंआ भी लगाया जा रहा है। यहां मेला 15 दिनों तक चलता है।
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