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पराली जलाने वाले किसानों के धान की नहीं होगी तौल
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पराली जलाई है कि नहीं, देना होगा शपथपत्र
क्रय केंद्रों धान की बिक्री के लिए किसानों के लिए रखी गई शर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। खेतों में पराली जलाना अब किसानों को महंगा पड़ सकता है। पराली जलाने वाले किसानों का सरकारी क्रय केन्द्रों पर तौल नहीं होगा। तौल कराने से पूर्व किसानों को शपथ पत्र देना होगा कि उन्होंने खेतों में पराली नहीं जलाई है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि इन दिनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर पराली जलाने का मामला सामने आ रहा है। कई किसानों पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद पराली जलाने वाले किसानों में जागरूकता का अभाव दिख रहा है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं लगा तो भविष्य में किसानों को इसके दुष्परिणाम झेलने होंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि कोई भी किसान अपने खेत में पराली न जलाएं। खेत में पराली जलाने से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि खेत में रहने वाले कीट भी जल जाते हैं। खेत की उर्वरा शक्ति का भी क्षरण होता है। खेत में पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए शासन प्रशासन बेहद गंभीर है। ऐसे में किसान अपने खेत में पराली कत्तई न जलाएं। पराली जलाने से बेहतर है कि किसान डंठल को खेत में पलट दें। किसान समर्थन मूल्य योजना के तहत धान की तौल कराने के लिए शपथ पत्र लेकर जाएं। शपथ पत्र उसी क्रय केन्द्र पर देना होगा जहां धान की तौल करानी है। शपथ पत्र में वे इस बात का उल्लेख करेंगे कि उसने अपने खेत में पराली नहीं जलाया है। इसके बाद किसान के उपज की तौल हो सकेगी।
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क्रय केंद्रों धान की बिक्री के लिए किसानों के लिए रखी गई शर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। खेतों में पराली जलाना अब किसानों को महंगा पड़ सकता है। पराली जलाने वाले किसानों का सरकारी क्रय केन्द्रों पर तौल नहीं होगा। तौल कराने से पूर्व किसानों को शपथ पत्र देना होगा कि उन्होंने खेतों में पराली नहीं जलाई है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि इन दिनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर पराली जलाने का मामला सामने आ रहा है। कई किसानों पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद पराली जलाने वाले किसानों में जागरूकता का अभाव दिख रहा है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं लगा तो भविष्य में किसानों को इसके दुष्परिणाम झेलने होंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि कोई भी किसान अपने खेत में पराली न जलाएं। खेत में पराली जलाने से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि खेत में रहने वाले कीट भी जल जाते हैं। खेत की उर्वरा शक्ति का भी क्षरण होता है। खेत में पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए शासन प्रशासन बेहद गंभीर है। ऐसे में किसान अपने खेत में पराली कत्तई न जलाएं। पराली जलाने से बेहतर है कि किसान डंठल को खेत में पलट दें। किसान समर्थन मूल्य योजना के तहत धान की तौल कराने के लिए शपथ पत्र लेकर जाएं। शपथ पत्र उसी क्रय केन्द्र पर देना होगा जहां धान की तौल करानी है। शपथ पत्र में वे इस बात का उल्लेख करेंगे कि उसने अपने खेत में पराली नहीं जलाया है। इसके बाद किसान के उपज की तौल हो सकेगी।
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