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Maharajganj News: मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चों के चिड़चिड़ा होने का खतरा

Thu, 28 May 2026 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 02:33 AM IST
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Excessive use of mobile phones can lead to irritability in children.
महराजगंज। मोबाइल बच्चों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार अधिक समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। इनदिनों में गर्मी की छुट्टियों में ज्यादातर बच्चे मोबाइल देखने में अधिक समय बीता रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि मोबाइल में बच्चे गेम्स वगैरह ज्यादा देखते हैं। मोबाइल देखने से बच्चों के आंख की रेटिना, ब्रेन पर प्रभाव पड़ता है। मोबाइल में मारपीट और तमाम तरह की उत्तेजित करने वाली चीजें दिखाई जाती हैं। ऐसी एग्रेसिव चीजें देखने से बच्चों का व्यवहार आक्रामक होता है। उन्हें किसी को मारना या जानवरों को चोट पहुंचाना अच्छा लगने लगता है।
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हालांकि कई बार माता-पिता मामूली समझकर ऐसी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हें लगता है बच्चा शैतान है लेकिन बाद में ऐसे बच्चों की मानसिकता आक्रामक हो जाती है। बचपन में ऐसे व्यवहार करते देख बच्चों को न रोकने पर बाद में दिक्कत होती है। जानकारों की माने तो बच्चों के मोबाइल के इस्तेमाल का समय और वे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं, माता-पिता को इस पर नजर रखनी चाहिए।
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नींद न आने की शिकायत भी
डॉ. अमित विक्रम सिंह ने बताया कि मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से भी बीमार हो सकते हैं। ज्यादा मोबाइल देखने से बच्चों में दृश्यता, सिरदर्द, एकाग्रता कम होना, चिड़चिड़ापन और नींद न आने की शिकायत हो सकती है। बच्चों की रूटीन टाइमिंग बिगड़ जाती है। इससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। बच्चे चिड़चिड़ेपन और नींद न आने समेत अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो सकते हैं। मोबाइल ज्यादा देखने से बच्चों को इसकी आदत लग जाती है। इससे बच्चों की एकाग्रता कम होती है और पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता। वह एक जगह बैठकर ध्यान लगाकर काम करने में अक्षम होते हैं।

ऐसे छुड़ाएं मोबाइल के इस्तेमाल की आदत

बच्चों की मोबाइल की आदत छुड़ाना बहुत मुश्किल काम नहीं है। बस माता-पिता को भी अनुशासित रहना चाहिए। उन्हें भी बच्चों के सामने मोबाइल नहीं चलाना चाहिए। जिन बच्चों को मोबाइल की आदत है, धीरे-धीरे उनकी टाइमिंग कम करनी चाहिए।
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