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Maharajganj News: आठ साल पहले उजड़ा सुहाग, अब बुढ़ापे की लाठी भी छीन गई
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करीब आठ साल पहले विशाल के पिता की हो गई थी मौत
महराजगंज। करीब आठ साल पहले विशाल गुप्ता की मां का सुहाग उजड़ गया था। बृहस्पतिवार को एक हादसे ने अब उनके बुढ़ापे की लाठी भी छिन ली। विशाल की मौत के बाद से उसकी मां पुष्पा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही हैं।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम कम्हरिया बुजुर्ग में गुप्ता परिवार हर साल गांव में ही स्थित मंदिर में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन करता है। शतचंडी महायज्ञ में गांव के लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। शतचंडी महायज्ञ को लेकर बृहस्पतिवार को भी गांव से ही कलश यात्रा निकाली गई थी। भक्ति गीत गाते हुए महिलाएं और कन्याएं कलश लेकर चल रही थीं। कलश यात्रा डांडा नदी के घाट पर पहुंची थी कि तभी विशाल स्नान करने लगा। इस दौरान वह गहरे पानी में डूब गया। हादसे की जानकारी मिलने पर परिवार में चीख-पुकार मच गई। विशाल के पिता केशव की मौत आठ साल पहले ही हो चुकी है।
उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह रोते-रोते बेहोश हो जा रही है। वह रोते हुए यही बोल रही थी अगर पता होता कि यह हादसा हो जाएगा तो बच्चे को साथ नहीं भेजती। पहले तो सुहाग उजड़ा था अब इस हादसे ने मेरी बुढ़ापे की लाठी भी छीन ली। बुढ़ापे में मुझे अब कौन सहारा देगा। बताया जा रहा है कि दो भाई थे। उसका बड़ा भाई विकास गुप्ता मुंबई में रहकर काम करता है। अभी दो दिन पहले ही वह मुंबई गया है। हादसे की जानकारी मिलने पर वह भी वहां से चल दिया है। विशाल की दो बहने भी हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है। अभी दूसरी की नहीं हुई है। बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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महराजगंज। करीब आठ साल पहले विशाल गुप्ता की मां का सुहाग उजड़ गया था। बृहस्पतिवार को एक हादसे ने अब उनके बुढ़ापे की लाठी भी छिन ली। विशाल की मौत के बाद से उसकी मां पुष्पा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही हैं।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम कम्हरिया बुजुर्ग में गुप्ता परिवार हर साल गांव में ही स्थित मंदिर में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन करता है। शतचंडी महायज्ञ में गांव के लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। शतचंडी महायज्ञ को लेकर बृहस्पतिवार को भी गांव से ही कलश यात्रा निकाली गई थी। भक्ति गीत गाते हुए महिलाएं और कन्याएं कलश लेकर चल रही थीं। कलश यात्रा डांडा नदी के घाट पर पहुंची थी कि तभी विशाल स्नान करने लगा। इस दौरान वह गहरे पानी में डूब गया। हादसे की जानकारी मिलने पर परिवार में चीख-पुकार मच गई। विशाल के पिता केशव की मौत आठ साल पहले ही हो चुकी है।
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उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह रोते-रोते बेहोश हो जा रही है। वह रोते हुए यही बोल रही थी अगर पता होता कि यह हादसा हो जाएगा तो बच्चे को साथ नहीं भेजती। पहले तो सुहाग उजड़ा था अब इस हादसे ने मेरी बुढ़ापे की लाठी भी छीन ली। बुढ़ापे में मुझे अब कौन सहारा देगा। बताया जा रहा है कि दो भाई थे। उसका बड़ा भाई विकास गुप्ता मुंबई में रहकर काम करता है। अभी दो दिन पहले ही वह मुंबई गया है। हादसे की जानकारी मिलने पर वह भी वहां से चल दिया है। विशाल की दो बहने भी हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है। अभी दूसरी की नहीं हुई है। बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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