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Maharajganj News: अपने कमाई का कुछ हिस्सा करें जकात
Tue, 04 Mar 2025 09:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 04 Mar 2025 09:16 PM IST
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मिठौरा। रमजान के महीने का आज चौथा रोजा पहले अशरे (हिस्से) रहमत (दया) का चल रहा है। रमजान के महीने में रोजेदारों के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं।
मिठौरा बाजार स्थित मदरसे के मौलाना जियाउद्दीन के अनुसार, रमजान के महीने में नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, तभी आपकी इबादत कुबूल होती है। इस्लाम में इस महीने को काफी पवित्र (पाक) माना गया है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले लोग खुदा की इबादत करते हैं। यह महीना आत्म संयम, अनुशासन, इबादत और आपसी भाईचारा कायम करने का महीना है।
कहा जाता है कि इस महीने में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है। इसलिए इस महीने में अधिक से अधिक नेक (अच्छे) काम किए जाते हैं। रमजान के महीने में रोजेदारों को कई नियमों का पालन करना होता है, तभी खुदा उनकी इबादत को कुबूल करते हैं। जकात में अपने सालभर की कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को दान करना होता है। आपके घर में जो भी कमाता है, उसे परिवार की तरफ से जकात (दान) करना चाहिए। अगर पांच लोगों में से चार कमाते हैं, तो चारों को जकात (दान) करना चाहिए। जकात का हिस्सा गरीबों, यतिमों, विधवा महिलाओं, जरूरतमंदों में दान करना चाहिए। माना जाता है कि जकात के बगैर अल्लाह इबादत कुबूल नहीं करते और जीवन में एक बार हज करना। संवाद
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मिठौरा बाजार स्थित मदरसे के मौलाना जियाउद्दीन के अनुसार, रमजान के महीने में नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, तभी आपकी इबादत कुबूल होती है। इस्लाम में इस महीने को काफी पवित्र (पाक) माना गया है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले लोग खुदा की इबादत करते हैं। यह महीना आत्म संयम, अनुशासन, इबादत और आपसी भाईचारा कायम करने का महीना है।
कहा जाता है कि इस महीने में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है। इसलिए इस महीने में अधिक से अधिक नेक (अच्छे) काम किए जाते हैं। रमजान के महीने में रोजेदारों को कई नियमों का पालन करना होता है, तभी खुदा उनकी इबादत को कुबूल करते हैं। जकात में अपने सालभर की कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को दान करना होता है। आपके घर में जो भी कमाता है, उसे परिवार की तरफ से जकात (दान) करना चाहिए। अगर पांच लोगों में से चार कमाते हैं, तो चारों को जकात (दान) करना चाहिए। जकात का हिस्सा गरीबों, यतिमों, विधवा महिलाओं, जरूरतमंदों में दान करना चाहिए। माना जाता है कि जकात के बगैर अल्लाह इबादत कुबूल नहीं करते और जीवन में एक बार हज करना। संवाद
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