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Maharajganj News: नेपाल में बाढ़ के बाद बढ़ी मांग, सोनौली में अटका माल
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सोनौली सीमा पर लगा 10 किमी वाहनों का जाम
सोनौली। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने से भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ गई है। खाद्य सामग्री, कपड़े, फल-सब्जी समेत अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में तेजी के बीच सोनौली बॉर्डर पर मालवाहक वाहनों का दबाव बढ़ गया है। करीब 1200 ट्रक आठ से 10 किलोमीटर लंबी कतार में फंसे हैं। पहले जहां वाहन एक दिन में नेपाल पहुंच जाते थे, अब चार से पांच दिन लग रहे हैं।
नेपाल के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत से खाद्यान्न, पेट्रोलियम पदार्थ, एलपीजी, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स, निर्माण सामग्री समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामान की मांग बढ़ी है। त्योहारों के चलते आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की संभावना है।
बढ़ती मांग के बीच बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों के सोनौली सीमा पर पहुंचने से जाम की स्थिति गंभीर हो गई है। वाहनों की निकासी के लिए स्थानीय प्रशासन मध्यरात्रि तक सीमा खोलकर गाड़ियों को नेपाल भेज रहा है। बुधवार रात एक बजे तक करीब 490 मालवाहक वाहन नेपाल भेजे गए। चालक और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। माल की आपूर्ति में देरी के कारण दोनों देशों के बीच कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
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बॉर्डर पर फंसे ट्रकों में सूखे मेवे, चावल, मार्बल, टाइल्स, सेनेटरी सामान, केमिकल, मशीनरी, विटामिन, मसाले, खाद्य सामग्री, खेलकूद का सामान और औद्योगिक कच्चा माल समेत विभिन्न प्रकार की सामग्री लदी है। कई ट्रक कई दिनों से कतार में खड़े हैं। इससे कारोबारियों को तय समय पर माल नहीं मिल पा रहा है और ट्रांसपोर्टरों का परिचालन खर्च भी बढ़ रहा है।
सोनौली कोतवाल महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि बुधवार को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसके बाद रात एक बजे तक गाड़ियों को नेपाल भेजा गया। करीब 500 ट्रक नेपाल रवाना हुए हैं। नेपाल भंसार के अधिकारियों को सीमा पर जाम की स्थिति से अवगत करा दिया गया है।
छह हजार रुपये तक बढ़ रहा खर्च
स्थानीय ट्रांसपोर्टर अमन सिंह और सुरेंद्र कुमार के अनुसार, जाम के कारण एक मालवाहक वाहन पर करीब छह हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। वाहन कई दिनों तक फंसे रहने से अगली बुकिंग भी प्रभावित हो रही है। लंबे इंतजार के कारण वाहन मालिकों ने नेपाल की लोडिंग भी महंगी कर दी है।
चालकों को भोजन-पानी की दिक्कत
उन्नाव निवासी ट्रक चालक बाउ सिंह ने बताया कि वह चार दिनों से कतार में खड़े हैं। कई दिनों से जाम में फंसे होने के कारण परेशानी हो रही है। चालकों के लिए भोजन, पानी, शौचालय और रात गुजारने जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी समस्या बनी हुई है। राजस्थान के अलवर निवासी ट्रक चालक राम दन ने बताया कि वह पाउडर लेकर नेपाल पहुंचे हैं और तीन दिनों से बॉर्डर पर फंसे हैं। वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे माल की डिलीवरी में देरी हो रही है।
त्योहारों से पहले सप्लाई पर दबाव
सोनौली बॉर्डर से रोजाना बड़ी मात्रा में माल नेपाल जाता है। ऐसे में वाहनों के चार से पांच दिन तक फंसे रहने का सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन से पहले ही नेपाल में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। अब तीज और दशहरा से पहले भारतीय सामान की मांग बढ़ने से सीमा पर वाहनों का दबाव और बढ़ने की आशंका है। यदि आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो त्योहारों से पहले नेपाल के बाजारों तक माल पहुंचाने में और देरी हो सकती है।
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नेपाल के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत से खाद्यान्न, पेट्रोलियम पदार्थ, एलपीजी, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स, निर्माण सामग्री समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामान की मांग बढ़ी है। त्योहारों के चलते आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की संभावना है।
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बढ़ती मांग के बीच बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों के सोनौली सीमा पर पहुंचने से जाम की स्थिति गंभीर हो गई है। वाहनों की निकासी के लिए स्थानीय प्रशासन मध्यरात्रि तक सीमा खोलकर गाड़ियों को नेपाल भेज रहा है। बुधवार रात एक बजे तक करीब 490 मालवाहक वाहन नेपाल भेजे गए। चालक और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। माल की आपूर्ति में देरी के कारण दोनों देशों के बीच कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
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बॉर्डर पर फंसे ट्रकों में सूखे मेवे, चावल, मार्बल, टाइल्स, सेनेटरी सामान, केमिकल, मशीनरी, विटामिन, मसाले, खाद्य सामग्री, खेलकूद का सामान और औद्योगिक कच्चा माल समेत विभिन्न प्रकार की सामग्री लदी है। कई ट्रक कई दिनों से कतार में खड़े हैं। इससे कारोबारियों को तय समय पर माल नहीं मिल पा रहा है और ट्रांसपोर्टरों का परिचालन खर्च भी बढ़ रहा है।
सोनौली कोतवाल महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि बुधवार को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसके बाद रात एक बजे तक गाड़ियों को नेपाल भेजा गया। करीब 500 ट्रक नेपाल रवाना हुए हैं। नेपाल भंसार के अधिकारियों को सीमा पर जाम की स्थिति से अवगत करा दिया गया है।
छह हजार रुपये तक बढ़ रहा खर्च
स्थानीय ट्रांसपोर्टर अमन सिंह और सुरेंद्र कुमार के अनुसार, जाम के कारण एक मालवाहक वाहन पर करीब छह हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। वाहन कई दिनों तक फंसे रहने से अगली बुकिंग भी प्रभावित हो रही है। लंबे इंतजार के कारण वाहन मालिकों ने नेपाल की लोडिंग भी महंगी कर दी है।
चालकों को भोजन-पानी की दिक्कत
उन्नाव निवासी ट्रक चालक बाउ सिंह ने बताया कि वह चार दिनों से कतार में खड़े हैं। कई दिनों से जाम में फंसे होने के कारण परेशानी हो रही है। चालकों के लिए भोजन, पानी, शौचालय और रात गुजारने जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी समस्या बनी हुई है। राजस्थान के अलवर निवासी ट्रक चालक राम दन ने बताया कि वह पाउडर लेकर नेपाल पहुंचे हैं और तीन दिनों से बॉर्डर पर फंसे हैं। वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे माल की डिलीवरी में देरी हो रही है।
त्योहारों से पहले सप्लाई पर दबाव
सोनौली बॉर्डर से रोजाना बड़ी मात्रा में माल नेपाल जाता है। ऐसे में वाहनों के चार से पांच दिन तक फंसे रहने का सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन से पहले ही नेपाल में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। अब तीज और दशहरा से पहले भारतीय सामान की मांग बढ़ने से सीमा पर वाहनों का दबाव और बढ़ने की आशंका है। यदि आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो त्योहारों से पहले नेपाल के बाजारों तक माल पहुंचाने में और देरी हो सकती है।