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Maharajganj News: रेलवे प्रोजेक्ट और सड़क निर्माण में ली गई जमीन के मुआवजे की मांग
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दो ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार
मुआवजा भुगतान करने की मांग की
महराजगंज। जिले में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर दो अलग-अलग मामलों में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
किसानों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, पहला मामला सदर तहसील क्षेत्र के रम्हौली निवासी वीरेंद्र का है। उनका कहना है कि गाटा संख्या 05 और 179 की भूमि रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। भूमि अधिग्रहण के तीन माह बीत चुके हैं लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने फाइल में कमी दिखाकर भुगतान रोक दिया है।
दूसरा मामला भी रम्हौली क्षेत्र का है। यहां के जयराम ने पनियरा–पक्की सड़क चौड़ीकरण और निर्माण में गई अपनी भूमि का उचित मुआवजा न मिलने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आराजी संख्या 75, 40 और 180 की कुल लगभग 22 डिसमिल भूमि सड़क निर्माण में चली गई है। लेकिन मुआवजा निर्धारण के समय उसे सामान्य कृषि भूमि मानकर बहुत कम राशि तय की गई है। पक्की सड़क किनारे की भूमि का मुआवजा अधिक श्रेणी में देने का स्पष्ट प्रावधान भी है लेकिन इस तथ्य को उनकी फाइल में नजरअंदाज कर दिया गया है।
वर्जन
जिन किसानों ने आवश्यक कागजात जमा कर दिए हैं, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। यदि किसी किसान को भुगतान या मूल्यांकन को लेकर आपत्ति है, तो वे आर्बिट्रेशन में अपील कर सकते हैं। आर्बिट्रेशन से प्राप्त आदेश के आधार पर संबंधित किसानों को संशोधित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
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- नंद प्रकाश मौर्य, प्रभारी उप भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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मुआवजा भुगतान करने की मांग की
महराजगंज। जिले में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर दो अलग-अलग मामलों में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
किसानों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, पहला मामला सदर तहसील क्षेत्र के रम्हौली निवासी वीरेंद्र का है। उनका कहना है कि गाटा संख्या 05 और 179 की भूमि रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। भूमि अधिग्रहण के तीन माह बीत चुके हैं लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने फाइल में कमी दिखाकर भुगतान रोक दिया है।
दूसरा मामला भी रम्हौली क्षेत्र का है। यहां के जयराम ने पनियरा–पक्की सड़क चौड़ीकरण और निर्माण में गई अपनी भूमि का उचित मुआवजा न मिलने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आराजी संख्या 75, 40 और 180 की कुल लगभग 22 डिसमिल भूमि सड़क निर्माण में चली गई है। लेकिन मुआवजा निर्धारण के समय उसे सामान्य कृषि भूमि मानकर बहुत कम राशि तय की गई है। पक्की सड़क किनारे की भूमि का मुआवजा अधिक श्रेणी में देने का स्पष्ट प्रावधान भी है लेकिन इस तथ्य को उनकी फाइल में नजरअंदाज कर दिया गया है।
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जिन किसानों ने आवश्यक कागजात जमा कर दिए हैं, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। यदि किसी किसान को भुगतान या मूल्यांकन को लेकर आपत्ति है, तो वे आर्बिट्रेशन में अपील कर सकते हैं। आर्बिट्रेशन से प्राप्त आदेश के आधार पर संबंधित किसानों को संशोधित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
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- नंद प्रकाश मौर्य, प्रभारी उप भूमि अध्याप्ति अधिकारी