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Maharajganj News: एकमा में ट्राॅम वे म्यूजियम बनाने की मांग हुई तेज...सैकड़ों लोगों ने किया प्रदर्शन
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लक्ष्मीपुर में प्रदर्शन के बाद गोरखपुर में मंडलायुक्त को मांग पत्र सौंपा, अधिवक्ताओं ने भी तेज की मांग
लक्ष्मीपुर/नौतनवा। एकमा डिपो स्थित ब्रिटिश कालीन देश की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना को संरक्षित कर स्थानीय स्तर पर संग्रहालय (म्यूजियम) बनाने की मांग तेज होती जा रही है। देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को सैकड़ों लोगों ने लक्ष्मीपुर में प्रदर्शन किया फिर गोरखपुर में मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा। वहीं भारतीय अधिवक्ता मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. मनीष कुमार चौबे के नेतृत्व में भी स्थानीय अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र नायब तहसीलदार सौरभ श्रीवास्तव को सौंपा। लोगों का कहना है कि यह धरोहर क्षेत्र की पहचान है। यदि इसे संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए और पुनः संचालित कर चौक बाजार स्थित रामग्राम तथा बनरसिहा कला के देवदह बौद्ध स्थलों से जोड़ा जाए तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
मालूम हो कि 17 फरवरी को रेल विभाग की एक टीम ट्राम वे रेल परियोजना के पुराने इंजन को लखनऊ ले जाने के उद्देश्य से एकमा डिपो पहुंची थी। इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और विरोध के कारण रेल अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। इसके बाद समिति ने औपचारिक रूप से ज्ञापन भेजकर परियोजना को यथास्थान सुरक्षित रखने की मांग की।
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भारतीय अधिवक्ता मंच ने ‘हमारी विरासत हमारी पहचान पहल’ अभियान के तहत ज्ञापन सौंपकर इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की मांग की। अधिवक्ता डॉ. मनीष चौबे, रवींद्र नाथ त्रिपाठी, नागेंद्र प्रसाद शुक्ला, संतोष पांडेय, महेश खेतान आदि ने कहा कि जनपद का लक्ष्मीपुर क्षेत्र अपने विशिष्ट प्राकृतिक सौंदर्य एवं भगवान बुद्ध की वैचारिकी से आच्छादित धरोहर है। क्षेत्र के एकमा में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1924 में देश की पहली ट्रॉम-वे रेल परियोजना स्थापित हुई। भगवान बुद्ध से जुड़ा बनरसिंहा कला व वनग्राम आस्था और पर्यटन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे में इस धरोहर पर ट्रॉम वे रेल का पुनः संचालन विश्वस्तरीय पहचान और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देगा। साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। नायब तहसीलदार सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि पत्र प्राप्त हुआ है। विधिक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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लखनऊ की शोभा बढ़ा रहा ट्रॉम वे रेल इंजन
फोटो..
- लखनऊ चिड़ियाघर में दर्शकों के लिए रखा देश की पहली ट्रॉम वे रेल का इंजन, शैलून, बोगी
- लक्ष्मीपुर में जंग खा रहे ट्रॉम वे रेल परियोजना के इंजन
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर। जनपद के लक्ष्मीपुर एकमा डिपो में बंद पड़ी भारत की पहली ट्राॅम वे रेल परियोजना का एक इंजन, बोगी, शैलून प्रदेश की राजधानी लखनऊ चिड़ियाघर की शोभा बढ़ा रहा है। दो दिन पहले अधिकारियों की टीम एकमा डिपो में मौजूद तीन ट्रॉम वे इंजन लेने आई थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। लोग स्थानीय स्तर पर म्यूजियम बनाकर ट्रॉम वे इंजन को संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।
एकमा डिपो में ट्रॉम वे कुल चार इंजन थे 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार के निर्देश पर एक इंजन, एक शैलून एवं एक बोगी को लखनऊ के चिड़ियाघर में रखवा दिया गया। तब से यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शेष इंजन, बोगी, शैलून, ट्राॅली एकमा डिपो में ही उपेक्षित पड़े हैं। लक्ष्मीपुर में ही इन्हें संरक्षित करने योजना फाइल में कैद पड़ी हुई है।
गौरतलब है कि सात वर्ष पहले ट्रॉम-वे रेल परियोजना के भौतिक निरीक्षण करने दिल्ली से पर्यटन व रेल विभाग की चार सदस्यीय टीम सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर रेंज में पहुंची थी। निरीक्षण के बाद उन्होंने कार्ययोजना बनाया था कि एकमा डिपो में 1982 से बंद पड़ी भारत की ट्रॉम वे रेल परियोजना के इंजन, बोगी, सैलून को सैलानियों के लिए जंगल में 15 किमी तक पुनः चलाई जाएगी लेकिन यह कार्ययोजना चार साल से फाइलों में बंद पड़ी है। इस पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है।
फाइलों में ही रह गई 15 किमी तक ट्रॉम वे चलाने की योजना
लक्ष्मीपुर रेंज में स्थित ट्रॉम वे रेल को जीवित करने की नीयत से 17 सितंबर 2017 को भौतिक निरीक्षण करने दिल्ली से पर्यटन व रेल विभाग की टीम जंगल में पहुंची थी। टीम में रेलवे के रिटायर्ड अधिकारी वीबी सूद के साथ तत्कालीन डीएफओ मनीष सिंह भी मौजूद थे। सबसे पहले उन्होंने एकमा डिपो में संरक्षित भारत की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना के अवशेषों का निरीक्षण किया। इसके बाद जंगल में बिछी रेल लाइन का जायजा लिया।
सूद ने बताया था कि भारत सरकार के दिशा निर्देश पर देश की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना के इंजन को चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसे जंगल में करीब 15 किमी तक चलाया जाएगा। इसके लिए रेलवे ट्रैक, स्लीपर व 8 पुलिया के मरम्मत की कार्ययोजना बना ली गई है। तत्कालीन डीएफओ मनीष सिंह ने बताया था कि ट्रॉम वे रेल में लकड़ी के स्लीपर लगे थे लेकिन अब उसकी जगह पर सीमेंटेड स्लीपर लगाए जाने की योजना बन रही है। पुलों के निर्माण में लकड़ी के पिलर लगे थे लेकिन अब सीमेंटेड आरसीसी पिलर लगाने का प्रस्ताव बनाया गया है। इसे लकड़ी के रंग का लुक दिए जाने की मंशा योजना में शामिल किया गया था। समय बीतने के साथ आला अफसर भी बदल गए और कार्ययोजना फाइलों में दब कर रह गई।
छः हेक्टेयर वनभूमि पर ट्रॉम वे रेल म्यूजियम बनाने की थी योजना
जानकारी के मुताबिक, एसडीओ कार्यालय के बगल एकमा डिपो में कुल 6 हेक्टेयर भूमि पर संग्रहालय स्थापित होना था। जिसमें इंजन सेड, वर्कशाप, बेंच, चबूतरा, कर्मचारी आवास, टिकट बुकिंग सेंटर, शौचालय, पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था की योजना बनाई गई थी लेकिन वर्तमान में सारी योजना फाइलों में कैद हो कर रह गई है।
लखनऊ चिड़ियाघर को सुशोभित कर रहा एक इंजन, एक सैलून और एक बोगी
वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार के निर्देश पर एक इंजन, एक सैलून एवं एक बोगी को लखनऊ चिड़ियाघर में रखवा दिया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने काफी विरोध भी किया था। स्थानीय लोगों की मांग पर शेष इंजन, बोगी, सैलून आदि को 2016 में बॉर्डर डवलपमेंट योजना के तहत एकमा डिपो में संरक्षित कर गोदाम में रख दिए गए।
ट्रॉम-वे रेल परियोजना की संक्षिप्त इतिहास
महराजगंज के सोहगीबरवा जंगल की बहुमूल्य वनसंपदा को दुर्गम वनक्षेत्र से मुख्य रेल लाइन तक लाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1924 में लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के निकट भारत की पहली ट्रॉम-वे रेल परियोजना स्थापित की गई थी। इसके निर्माण में 3,51,243 रुपये खर्च किए गए थे। लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज के जंगल में 22.4 किमी दूरी तक रेल लाइन बिछाई गई थी। निरंतर 55 वर्षों की सेवा करके 8 लाख घाटे के बाद 1982 में भारत की पहली ट्रॉम-वे रेल परियोजना को बंद करना पड़ा। इसमें शामिल प्रत्येक 40 अश्व शक्ति के 4 इंजन, 26 बोगियां व सैलून, 2 निरीक्षण ट्राॅली सहित तमाम उपकरण एकमा डिपो में सुरक्षित रख दिए गए थे। विगत 15 अक्टूबर 2008 को तत्कालीन वनमंत्री फतेहबहादुर सिंह ने इसे ऐतिहासिक धरोहर में शामिल करते हुए संरक्षित करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में वन विभाग ने ट्रॉम वे रेल परियोजना को म्यूजियम बनाने के लिए एक प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन प्रस्ताव पर कोई पहल सरकार की ओर से नहीं हो पाई।
वर्जन
ट्रॉम-वे रेल के इंजन आदि को तत्कालीन अधिकारियों की निगरानी में संरक्षित कर दिया गया है। जंगल में 15 किमी तक ट्रॉम वे रेल इंजन दौड़ाने की योजना तत्कालीन विभागीय अधिकारियों की ओर बनाई गई थी। फिलहाल योजना शासन स्तर पर विचाराधीन है। ट्रॉम वे को एकमा डिपो से अभी नहीं ले जाया जाएगा। शासन स्तर से इस पर लोक लगा दी गई है।
-वेदप्रकाश शर्मा, रेंजर लक्ष्मीपुर