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Maharajganj News: रक्त संबंध बता अनुसूचित जाति की जमीन करा लिया बैनामा
Sat, 15 Jun 2024 04:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 15 Jun 2024 04:32 AM IST
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रजिस्ट्री विभाग कार्यालय में बैनामा की दस्तावेज का जांच करते बाबू।
महराजगंज। निचलौल तहसील में इन दिनों जमीन बेचने में दलालों का सिंडिकेट काफी लंबा है। तहसीलों में इनकी इतनी गहरी पैठ है कि यह कुछ भी करा सकते हैं। निचलौल तहसील से जुड़ा हुआ एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें अनुसूचित जाति की जमीन को पिछड़ी जाति के व्यक्ति ने रक्त संबंध दिखाकर कम शुल्क देकर बैनामा करा लिया है। न्यायालय में आपत्ति पड़ी तो जिम्मेदारों के काले कारनामों की पोल खुल गई। इससे तहसील में हड़कंप मच गया है।
तहसीलदार न्यायालय में 22 अप्रैल 2024 को आपत्ति दाखिल करने वाले मिठौरा निवासी दुधई भारतीय ने बताया की वह रेलवे में नौकरी करते थे। इस दौरान वह रेलवे कालोनी वाराणसी में रहते थे। अप्रैल 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह घर चले आए। वहीं जया यादव निवासी जिगिना कौड़िया बाजार जिला, गोरखपुर की रहने वाली हैं। जया यादव मिठौरा बाजार स्थित एक इंटर काॅलेज में अध्यापिका के पद पर तैनात हैं और परिवार के साथ मिठौरा में ही रहती हैं। जया यादव और उनके परिजनों का उनके घर आना जाना लगा रहता था।
तहसील में तैनात कुछ जिम्मेदारों से मिलीभगत कर भूखंड संख्या 419 रकबा 0.113 हेक्टेयर भूमि को उनके साथ रक्त संबंध दिखाकर अपने नाम से जया ने बैनामा करा लिया। रक्त संबंध दिखाकर भूमि को बैनामा कराने वाली जया यादव पिछड़ी जाति की हैं। उन्होंने बैनामा निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है की रक्त संबंध दिखाकर उनकी भूमि को बैनामा कराने वाली जया उनकी बेटी नहीं हैं। रक्त संबंध में लगने वाली परिवार रजिस्टर की नकल सहित अन्य कई दस्तावेज भी नहीं लगे हैं।
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तहसीलदार राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा की मामले की उन्हें जानकारी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। साक्ष्यों के आधार पर बहस कर सही निर्णय लिया जाएगा।
दस्तावेज लेखक की भूमिका अहम
न्यायालय में दाखिल आपत्ति में लगे बैनामा दस्तावेज के मुताबिक इस करतूत में दस्तावेज लेखक की भूमिका भी अहम है, क्योंकि दस्तावेज लेखक ने जहां बैनामा दस्तावेज के लगभग अंतिम पन्ने पर लिखा है कि रक्त संबंधी में बैनामा करने वाले विक्रेता दुधई और क्रेता जया दोनों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के नहीं हैं। जमीन बेचने वाले दुधई की जमीन खरीदने वाली जया सगी बेटी हैं, जिसके वजह से स्टांप में छूट है। जबकि आपत्तिकर्ता दुधई ने न्यायालय में आपत्ति के साथ ही तहसील की ओर से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। निचलौल उप निबंधक संदीप कुमार चौहान ने मामले में कुछ कहने से इंकार कर दिया।
रक्त संबंध के लिए जरूरी दस्तावेज
तहसील के अधिवक्ता सुनील कुमार चौधरी ने बताया की जून 2022 में इस योजना को केवल छह महीने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब यह लोकप्रिय योजना बन गई है। क्योंकि इस योजना के तहत यदि संपत्ति का हस्तांतरण बेटे, बेटी, पिता, मां, पति, पत्नी को किया जा रहा है तो पंजीकरण के लिए महज पांच हजार रुपये और एक हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगता है। रक्त संबंध के लिए बैनामा के वक्त परिवार रजिस्टर की नकल, गुगल मैप कैमरे से बेचने वाली जमीन की फोटो, क्रेता और विक्रेता का शपथ पत्र, प्रमाणक पत्र की सख्त जरूरत होती है, लेकिन संबंधित विभाग के कुछ जिम्मेदारों की मनमानी के चलते दलाल अपने काले कारनामे में सफल हो जाते हैं।
निचलौल तहसील में नहीं रुक रहा भूमि का फर्जीवाड़ा
पिछले कुछ दिनों से देखा जाए तो तहसील में भूमि से संबंधित फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। क्योंकि यहां पर तैनात कुछ जिम्मेदार कर्मी दलालों के सिंडीकेट में फंस चुके हैं। यही कारण है की दलाल जिम्मेदारों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से जमीन का बैनामा, वसीयत, अनुसूचित जाति की जमीनों को बेचना, पट्टे की भूमि को भी बैनामा कराना, धारा 80 के तहत कोर्ट फीस और स्टांप शुल्क में चोरी करने के साथ ही रक्त संबंध में भी फर्जी बैनामा कराने में सफल हो चुके हैं। दलाल समय के मुताबिक अपना पैंतरा बदलते रहते हैं। अब वह स्टंप शुल्क में चोरी कर मोटी रकम कमाने के लिए किसी भी जाति के जमीन को किसी भी जाति के व्यक्ति को रक्त संबंध दिखाकर बैनामा करा दे रहे हैं।
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तहसीलदार न्यायालय में 22 अप्रैल 2024 को आपत्ति दाखिल करने वाले मिठौरा निवासी दुधई भारतीय ने बताया की वह रेलवे में नौकरी करते थे। इस दौरान वह रेलवे कालोनी वाराणसी में रहते थे। अप्रैल 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह घर चले आए। वहीं जया यादव निवासी जिगिना कौड़िया बाजार जिला, गोरखपुर की रहने वाली हैं। जया यादव मिठौरा बाजार स्थित एक इंटर काॅलेज में अध्यापिका के पद पर तैनात हैं और परिवार के साथ मिठौरा में ही रहती हैं। जया यादव और उनके परिजनों का उनके घर आना जाना लगा रहता था।
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तहसील में तैनात कुछ जिम्मेदारों से मिलीभगत कर भूखंड संख्या 419 रकबा 0.113 हेक्टेयर भूमि को उनके साथ रक्त संबंध दिखाकर अपने नाम से जया ने बैनामा करा लिया। रक्त संबंध दिखाकर भूमि को बैनामा कराने वाली जया यादव पिछड़ी जाति की हैं। उन्होंने बैनामा निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है की रक्त संबंध दिखाकर उनकी भूमि को बैनामा कराने वाली जया उनकी बेटी नहीं हैं। रक्त संबंध में लगने वाली परिवार रजिस्टर की नकल सहित अन्य कई दस्तावेज भी नहीं लगे हैं।
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तहसीलदार राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा की मामले की उन्हें जानकारी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। साक्ष्यों के आधार पर बहस कर सही निर्णय लिया जाएगा।
दस्तावेज लेखक की भूमिका अहम
न्यायालय में दाखिल आपत्ति में लगे बैनामा दस्तावेज के मुताबिक इस करतूत में दस्तावेज लेखक की भूमिका भी अहम है, क्योंकि दस्तावेज लेखक ने जहां बैनामा दस्तावेज के लगभग अंतिम पन्ने पर लिखा है कि रक्त संबंधी में बैनामा करने वाले विक्रेता दुधई और क्रेता जया दोनों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के नहीं हैं। जमीन बेचने वाले दुधई की जमीन खरीदने वाली जया सगी बेटी हैं, जिसके वजह से स्टांप में छूट है। जबकि आपत्तिकर्ता दुधई ने न्यायालय में आपत्ति के साथ ही तहसील की ओर से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। निचलौल उप निबंधक संदीप कुमार चौहान ने मामले में कुछ कहने से इंकार कर दिया।
रक्त संबंध के लिए जरूरी दस्तावेज
तहसील के अधिवक्ता सुनील कुमार चौधरी ने बताया की जून 2022 में इस योजना को केवल छह महीने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब यह लोकप्रिय योजना बन गई है। क्योंकि इस योजना के तहत यदि संपत्ति का हस्तांतरण बेटे, बेटी, पिता, मां, पति, पत्नी को किया जा रहा है तो पंजीकरण के लिए महज पांच हजार रुपये और एक हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगता है। रक्त संबंध के लिए बैनामा के वक्त परिवार रजिस्टर की नकल, गुगल मैप कैमरे से बेचने वाली जमीन की फोटो, क्रेता और विक्रेता का शपथ पत्र, प्रमाणक पत्र की सख्त जरूरत होती है, लेकिन संबंधित विभाग के कुछ जिम्मेदारों की मनमानी के चलते दलाल अपने काले कारनामे में सफल हो जाते हैं।
निचलौल तहसील में नहीं रुक रहा भूमि का फर्जीवाड़ा
पिछले कुछ दिनों से देखा जाए तो तहसील में भूमि से संबंधित फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। क्योंकि यहां पर तैनात कुछ जिम्मेदार कर्मी दलालों के सिंडीकेट में फंस चुके हैं। यही कारण है की दलाल जिम्मेदारों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से जमीन का बैनामा, वसीयत, अनुसूचित जाति की जमीनों को बेचना, पट्टे की भूमि को भी बैनामा कराना, धारा 80 के तहत कोर्ट फीस और स्टांप शुल्क में चोरी करने के साथ ही रक्त संबंध में भी फर्जी बैनामा कराने में सफल हो चुके हैं। दलाल समय के मुताबिक अपना पैंतरा बदलते रहते हैं। अब वह स्टंप शुल्क में चोरी कर मोटी रकम कमाने के लिए किसी भी जाति के जमीन को किसी भी जाति के व्यक्ति को रक्त संबंध दिखाकर बैनामा करा दे रहे हैं।