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दस साल बीते, नहीं हुई वाहनों की नीलामी
महराजगंज/ ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2016 12:51 AM IST
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नीलामी न होने के कारण जंग खा रहे वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
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थाने में लावारिस व मुकदमों के बोझ से करोड़ों के वाहन खराब रख रखाव के कारण धूल फांक रहे हैं। जबकि सीज वाहनों को मात्र छह माह के भीतर ही नीलामी करने का आदेश है। लेकिन विगत एक दशक से फरेंदा थाने के वाहनों की नीलामी नहीं हुई। जिसका नतीजा है कि करोड़ों के वाहन थाना परिसर में सड़ रहे हैं। वह अब कबाड़ के भाव पर बिकेंगे। उसी के इंतजार में विभाग नीलामी कराने की जरूरत नहीं समझ जा रहा।
फरेंदा थाना में सड़ रहे वाहन करीब दस वर्ष से ज्यादा के समय के वाहन वहीं के वही पड़े हुए है। पुलिस विभाग अगर इन वाहनों की नीलामी समय से करा देती तो राजस्व का भी फायदा विभाग को मिल जाता। लेकिन विभाग के तरफ से कुछ दिन पूर्व मात्र सात लावारिस वाहनों को नीलाम के लिए एसडीएम को आदेश पारित करने के लिए भेजा गया है। जबकि आरटीओ के द्वारा सबसे ज्यादा वाहन पकड़ कर थाने में रखा है।
जिसका नतीजा है कि खराब रखरखाव के कारण कुछ ही दिनों में वह वाहन कबाड़ के भाव बिकने की मजबूरी हो जाएगी। पुलिस द्वारा पकड़े गये संदिग्ध वाहन, चोरी तथा अपराध में प्रयुक्त वाहनो की संख्या लगभग दो सौ होगी। प्रतिवर्ष करीब दो दर्जन वाहन दुर्घटना, लावारिस, व अपराध में प्रयोग किए गए वाहन थाने में आते हैं। जो मुकदमे के पेंच व न्यायालय के आदेश के इंतजार में बेकार पड़े हुए है।
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अधिकतर वाहन के तो वारिसों की मौत हो जाने के कारण वह भी वाहन कबाड़ हो रही है। टूटे वाहन के वारिस की खोज में पुलिस भी अपनी फाइल बंद कर दी। थाने में वाहनों की रखरखाव के लिए टीन सेड का होना भी जरूरी होता है लेकिन सर्किल के किसी भी थाने पर वाहनों के रखने के लिए छत नहीं है। उसी का नतीजा है कि गर्मी, बरसात व जाडें के मौसम में वाहन सड़ रहे हैं। अगर विभाग इन वाहनों की नीलामी करा देता तो इसका फायदा आम लोगों को भी मिल जाता।
एसओ दिलीप कुमार शुक्ला ने बताया कि लावारिस सात वाहनो की नीलामी के आदेश के लिए एसडीएम को पत्र भेजा गया है। निर्देश के बाद नीलाम कर दिया जाएगा।
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फरेंदा थाना में सड़ रहे वाहन करीब दस वर्ष से ज्यादा के समय के वाहन वहीं के वही पड़े हुए है। पुलिस विभाग अगर इन वाहनों की नीलामी समय से करा देती तो राजस्व का भी फायदा विभाग को मिल जाता। लेकिन विभाग के तरफ से कुछ दिन पूर्व मात्र सात लावारिस वाहनों को नीलाम के लिए एसडीएम को आदेश पारित करने के लिए भेजा गया है। जबकि आरटीओ के द्वारा सबसे ज्यादा वाहन पकड़ कर थाने में रखा है।
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जिसका नतीजा है कि खराब रखरखाव के कारण कुछ ही दिनों में वह वाहन कबाड़ के भाव बिकने की मजबूरी हो जाएगी। पुलिस द्वारा पकड़े गये संदिग्ध वाहन, चोरी तथा अपराध में प्रयुक्त वाहनो की संख्या लगभग दो सौ होगी। प्रतिवर्ष करीब दो दर्जन वाहन दुर्घटना, लावारिस, व अपराध में प्रयोग किए गए वाहन थाने में आते हैं। जो मुकदमे के पेंच व न्यायालय के आदेश के इंतजार में बेकार पड़े हुए है।
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अधिकतर वाहन के तो वारिसों की मौत हो जाने के कारण वह भी वाहन कबाड़ हो रही है। टूटे वाहन के वारिस की खोज में पुलिस भी अपनी फाइल बंद कर दी। थाने में वाहनों की रखरखाव के लिए टीन सेड का होना भी जरूरी होता है लेकिन सर्किल के किसी भी थाने पर वाहनों के रखने के लिए छत नहीं है। उसी का नतीजा है कि गर्मी, बरसात व जाडें के मौसम में वाहन सड़ रहे हैं। अगर विभाग इन वाहनों की नीलामी करा देता तो इसका फायदा आम लोगों को भी मिल जाता।
एसओ दिलीप कुमार शुक्ला ने बताया कि लावारिस सात वाहनो की नीलामी के आदेश के लिए एसडीएम को पत्र भेजा गया है। निर्देश के बाद नीलाम कर दिया जाएगा।