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वर्चस्व के लिए सिपाही को मारी थी गोली

Tue, 15 Nov 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 15 Nov 2016 12:43 AM IST
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shoot was in supremacy
दो अभियुक्त की गिरफ्तारी कर एसपी प्रमोद कुमार ने खुलासा किया। - फोटो : अमर उजाला
महराजगंज। जिला जेल के सिपाही राणा यादव गोलीकांड का एसपी प्रमोद कुमार ने पर्दाफाश का दावा किया है। जिला जेल में वर्चस्व के लिए हुए सिपाही पर हमले के दो अभियुक्तों को सदर कोतवाली क्षेत्र के त्रिमुहानी नदी के पास से गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया है। उनके कब्जे से तमंचा 315 बोर और 9 एमएम पिस्टल व कारतूस आदि मिले हैं। एसपी प्रमोद कुमार ने पुलिस टीम के लिए पांच हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा भी की है। 
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एसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि 13 नवंबर की रात में सदर कोतवाली की टीम आईटीएम पुलिस चौकी के पास मौजूद थी तभी मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक बाइक से वारदात की नीयत से फरेंदा से महराजगंज आ रहे हैं। सदर कोतवाली के अतुल कुमार सिंह व सर्विलांस निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा व स्वाट टीम के लोग त्रिमुहानी नदी के पहले सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर उनका इंतजार करने लगे।
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कुछ ही देर में दो युवक बाइक से आते हुए दिखे। पुलिस टीम ने उनको रोका तो वे बाइक घूमा कर भागने लगे। पुलिस ने उन्हें घेर कर पकड़ लिया। पूछताछ में एक ने अपने को समीर आलम पुत्र जैनुद्दीन निवासी रामपुर बुजुर्ग, सदर कोतवाली व दूसरे ने अमरनाथ साहनी पुत्र भीखा साहनी छितही बुजुर्ग टोला थाना फरेंदा बताया। तलाशी में समीर आलम के पास से तमंचा 315 बोर, एक अदद कारतूस व तीन हजार रुपये और अमरनाथ के पास से 9 एमएम पिस्टल, दो कारतूस व दो हजार रुपये और बाइक पाई गई। डिकी से यूपी 56एम 9732 व यूपी 56के 4049 नंबर प्लेट भी पाए गए। 
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कड़ाई से पूछताछ में दोनों युवकों ने जिला जेल के सिपाही राणा यादव को गोली मारने की बात कबूल कर ली। यह भी बताया कि उनका साथी फरेंदा निवासी काजू उर्फ राजमन चौधरी अलग-अलग समय में जिला जेल में बंद थे। जेल में रहने के दौरान जेल आरक्षी बंदी राणा रणविजय यादव से उन लोगों की दोस्ती हो गई। काजू जब जेल में था तब राणा यादव जेल के मैन गेट पर तैनात था। एक दिन काजू कोर्ट पेशी से लौटा था तो उसके पास नशीला पदार्थ था। तलाशी के दौरान राणा यादव ने नशीला पदार्थ अंदर ले जाने से मना किया था। उसको लेकर राणा यादव व काजू से विवाद हुआ था।
 
देवरिया जिले के एकौना थाने का रणविजय यादव हत्या, लूट, अपहरण जैसे मामलों में वाराणसी से गिरफ्तार हो कर जिला कारागार में बंद था। वह काजू उर्फ राजमन चौधरी के  साथ मिलकर जेल में अपना वर्चस्व बनाना चाहता था। जेल कर्मचारियों को सबक सिखाने के लिए काजू चौधरी, अमर नाथ साहनी व समीर आलम ने आरक्षी राणा यादव को जान से मारने की नीयत से चार नवंबर की रात में गोली मार दी।


अभियुक्त अमरनाथ व समीर ने बताया कि घटना के दिन काजू के साथ शाम सात बजे जिले में आ गए थे और जेल के आसपास रेकी कर रहे थे। पहचान से बचने के लिए काजू कुछ दूरी पर खड़ा रहा और अमरनाथ व समीर ने जिला जेल और नवोदय विद्यालय के पास आरक्षी राणा यादव को गोली मार कर फरार हो गए। 

 
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