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धोखाधड़ी के मामले में डेढ़ साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jul 2016 12:47 AM IST
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फर्जीवाड़ा
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महराजगंज। फर्जी सीबीआई इंस्पेक्टर बनकर लोगों को नौकरी का झांसा देने के मामले में कोर्ट ने एक अभियुक्त को डेढ़ साल की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
नौतनवा थाना के तत्कालीन एसओ उमाशंकर तिवारी सात जुलाई 2005 को क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। मुखबिर से सूचना मिली कि अजय स्टूडियो पर मौजूद एक व्यक्ति अपने को सीबीआई का इंस्पेक्टर बताकर लोगों को नौकरी का झांसा दे रहा है।
इस सूचना पर वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही एक शख्स भागने लगा। टीम के सदस्यों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम व्यासमुनि सिंह निवासी बिहारी बुजुर्ग थाना खजनी गोरखपुर बताया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक फाइल मिली। उसमें एक कार्ड सीबीआई ब्यूरो लखनऊ का मिला। जांच के दौरान वह फर्जी निकला। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभियुक्त को जेल भेज दिया।
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विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। अभियोजन अधिकारी नीलिमा पांडेय ने गवाही कराकर कोर्ट से सजा की मांग की। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर द्विवेदी ने अभियुक्त को डेढ़ साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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नौतनवा थाना के तत्कालीन एसओ उमाशंकर तिवारी सात जुलाई 2005 को क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। मुखबिर से सूचना मिली कि अजय स्टूडियो पर मौजूद एक व्यक्ति अपने को सीबीआई का इंस्पेक्टर बताकर लोगों को नौकरी का झांसा दे रहा है।
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इस सूचना पर वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही एक शख्स भागने लगा। टीम के सदस्यों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम व्यासमुनि सिंह निवासी बिहारी बुजुर्ग थाना खजनी गोरखपुर बताया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक फाइल मिली। उसमें एक कार्ड सीबीआई ब्यूरो लखनऊ का मिला। जांच के दौरान वह फर्जी निकला। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभियुक्त को जेल भेज दिया।
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विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। अभियोजन अधिकारी नीलिमा पांडेय ने गवाही कराकर कोर्ट से सजा की मांग की। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर द्विवेदी ने अभियुक्त को डेढ़ साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।