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हत्या की चौथी बार विवेचना का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:36 AM IST
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झुलनीपुर। निचलौल थाने में 9 वर्ष पूर्व दर्ज हत्या के एक मामले में सीजेएम ने चौथीबार पुनर्विवेचना का आदेश दिया है। मजिस्ट्रेट ने एसपी को आदेश दिया है कि वह सक्षम विवेचक की नियुक्ति कर सभी बिंदुओं पर विवेचना कर आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करें।
नेपाल के नवलपरासी जिले के रामग्राम उज्जैनी निवासी मोहर गुप्ता ने न्यायालय में वाद दाखिल कर कहा था कि अपनी बेटी विद्या देवी की शादी निचलौल थाना क्षेत्र के खोन्हौली निवासी राजकुमार के साथ की थी। राज कुमार सेना में नौकरी करता है। आरोप है कि वर्ष 1994 में विदाई के बाद उससे कभी मुलाकात नहीं करने दिया। एक वर्ष बाद ही उसने दूसरी शादी कर ली। उसके बाद से ही मोहर बेटी की तलाश में भटकते रहे।
काफी खोजबीन के बाद भी जब पता नहीं चला तो जुलाई 2007 में न्यायालय के आदेश पर दामाद राजकुमार सहित सास और ससुर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश परित हुआ। पहले विवेचक मुन्नीराम ने मात्र 15 दिनों में ही अंतिम रिपोर्ट लगा दी। तत्कालीन मजिस्ट्रेट ने पांच विन्दु निर्धारित कर विवेचना के लिए पत्रावली वापस कर दी।
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आदेश में कहा है कि समुचित विवेचक ने सतही तौर पर विवेचना कर आरोपियों से साक्ष्य इकट्ठा करने का प्रयास नहीं किया गया है। बता दें कि हाईकोर्ट ने विवेचना में सहयोग की शर्त पर आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। परंतु अंतिम रिपोर्ट न्यायालय प्रस्तुत होने के बाद वह आदेश स्वत: ही समाप्त हो गया।
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नेपाल के नवलपरासी जिले के रामग्राम उज्जैनी निवासी मोहर गुप्ता ने न्यायालय में वाद दाखिल कर कहा था कि अपनी बेटी विद्या देवी की शादी निचलौल थाना क्षेत्र के खोन्हौली निवासी राजकुमार के साथ की थी। राज कुमार सेना में नौकरी करता है। आरोप है कि वर्ष 1994 में विदाई के बाद उससे कभी मुलाकात नहीं करने दिया। एक वर्ष बाद ही उसने दूसरी शादी कर ली। उसके बाद से ही मोहर बेटी की तलाश में भटकते रहे।
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काफी खोजबीन के बाद भी जब पता नहीं चला तो जुलाई 2007 में न्यायालय के आदेश पर दामाद राजकुमार सहित सास और ससुर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश परित हुआ। पहले विवेचक मुन्नीराम ने मात्र 15 दिनों में ही अंतिम रिपोर्ट लगा दी। तत्कालीन मजिस्ट्रेट ने पांच विन्दु निर्धारित कर विवेचना के लिए पत्रावली वापस कर दी।
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आदेश में कहा है कि समुचित विवेचक ने सतही तौर पर विवेचना कर आरोपियों से साक्ष्य इकट्ठा करने का प्रयास नहीं किया गया है। बता दें कि हाईकोर्ट ने विवेचना में सहयोग की शर्त पर आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। परंतु अंतिम रिपोर्ट न्यायालय प्रस्तुत होने के बाद वह आदेश स्वत: ही समाप्त हो गया।