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सेवा में कमी पर बिजली विभाग देगा 3.96 लाख की क्षतिपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो/महराजगंज
Updated Fri, 16 Oct 2015 11:31 PM IST
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आनन्दनगर की मथुरा नगर निवासी पूर्णिमा पांडेय विशंभर कोल्ड स्टोरेज की संयुक्त संचालक हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दायर करते हुए उन्होंने बिजली विभाग पर सेवा में कमी का आरोप लगाया था।
उनके मुताबिक कोल्ड स्टोरेज में वर्ष 2003 से 100 केवीए का कनेक्शन है। वह नियमित रूप से बिल का भुगतान भी करती आ रही हैं।
दो मार्च 2014 की रात लाइन में फाल्ट होने से बिजली गुल हो गई। अगले दिन अन्य उपभोक्ताओं की बिजली चालू कर दी गई, लेकिन उनके प्रतिष्ठान की आपूर्ति शुरू नहीं हुई।
इस बारे में लिखित रूप से बिजली विभाग को सूचना दी गई, बावजूद नौ अप्रैल तक लाइन चालू नहीं हुआ।
ऐसे में कोल्ड स्टोरेज में रखे किसानों के करीब 15 हजार बोरा आलू को सड़ने से बचाने के लिए मथुरा कोल्ड स्टोरेज आनन्दनगर में शिफ्ट कराना पड़ा। इसमें काफी खर्च हुआ।
शिफ्टिंग का कार्य पूरा होने के बाद विभाग ने बिना सूचना के लाइन जोड़ दिया, जबकि उपभोक्ता की ओर से लिखित रूप से बताया गया कि इस सीजन में अब कोल्ड स्टोरेज बंद रहेगा, लिहाजा बिजली की आवश्यकता नहीं है।
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उपभोक्ता ने व्यापारिक साख गिरने, आलू शिफ्टिंग के दौरान आए खर्च व अन्य मदों को मिलाकर 3.96 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की थी।
विभिन्न तिथियों पर सुनवाई के बाद फोरम ने बिजली विभाग को सेवा में कमी का दोषी माना।
परिवाद स्वीकार करते हुए विभाग के मुख्य अभियंता गोरखपुर और अधिशासी अभियंता आनन्दनगर द्वितीय को 3.96 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दायर करते हुए उन्होंने बिजली विभाग पर सेवा में कमी का आरोप लगाया था।
उनके मुताबिक कोल्ड स्टोरेज में वर्ष 2003 से 100 केवीए का कनेक्शन है। वह नियमित रूप से बिल का भुगतान भी करती आ रही हैं।
दो मार्च 2014 की रात लाइन में फाल्ट होने से बिजली गुल हो गई। अगले दिन अन्य उपभोक्ताओं की बिजली चालू कर दी गई, लेकिन उनके प्रतिष्ठान की आपूर्ति शुरू नहीं हुई।
इस बारे में लिखित रूप से बिजली विभाग को सूचना दी गई, बावजूद नौ अप्रैल तक लाइन चालू नहीं हुआ।
ऐसे में कोल्ड स्टोरेज में रखे किसानों के करीब 15 हजार बोरा आलू को सड़ने से बचाने के लिए मथुरा कोल्ड स्टोरेज आनन्दनगर में शिफ्ट कराना पड़ा। इसमें काफी खर्च हुआ।
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शिफ्टिंग का कार्य पूरा होने के बाद विभाग ने बिना सूचना के लाइन जोड़ दिया, जबकि उपभोक्ता की ओर से लिखित रूप से बताया गया कि इस सीजन में अब कोल्ड स्टोरेज बंद रहेगा, लिहाजा बिजली की आवश्यकता नहीं है।
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उपभोक्ता ने व्यापारिक साख गिरने, आलू शिफ्टिंग के दौरान आए खर्च व अन्य मदों को मिलाकर 3.96 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की थी।
विभिन्न तिथियों पर सुनवाई के बाद फोरम ने बिजली विभाग को सेवा में कमी का दोषी माना।
परिवाद स्वीकार करते हुए विभाग के मुख्य अभियंता गोरखपुर और अधिशासी अभियंता आनन्दनगर द्वितीय को 3.96 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया।