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Maharajganj News: निगम का 1.93 करोड़ दबाए बैठे हैं 1500 ऋणी, विभाग बेफिक्र
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उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड से लिए है ऋण
- सदर ब्लॉक क्षेत्र में चिह्नित हैं सर्वाधिक 239 ऋणी, वसूली व आरसी में दिखाई जा रही शिथिलता
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। समाज कल्याण विभाग (विकास) की ओर से संचालित होने वाले उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड से ऋण प्राप्त करने वाले 1500 से अधिक ऋणी अभी भी धन दबाए बैठे हैं। ऋणी न तो उसे देने में रुचि ले रहे हैं और न ही विभाग की ओर से ऋण को जमा कराने में कोई विशेष तेजी दिखाई जा रही है। ऐसे में योजना के साथ नए लाभार्थियों के प्रोत्साहन पर भी ग्रहण लग गया है।
अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों को स्वरोजगार को बढ़ावा देने, दुकान खोलने, लांड्री खोलने को प्रोत्साहन के लिए वर्ष 1996 से 2022 के बीच में कुल 1400 से अधिक लोगों को व दो वर्ष मेंं सिलाई योजना के तहत लगभग 300 लाभार्थियों को कुल लगभग दो करोड़ 15 लाख रुपये का ऋण वितरण किया गया। इनमें से अब तक 200 से अधिक ऋणियों की ओर से लगभग 22 लाख रुपये जमा कराए गए हैं, जबकि अभी भी 1500 से अधिक ऋणियों पर एक करोड़ 93 लाख रुपये का बकाया चल रहा है। लंबे बकाये की वजह से सिलाई को छोड़कर शेष सभी योजनाएं 2022 में बंद कर दी गई हैं। बावजूद इसके ऋण को जमा कराने में विभाग बेफिक्र दिख रहा है।
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ब्लॉकवार चिह्नित ऋणियों की संख्या
वर्तमान मेें सदर ब्लॉक के 239 ऋणियों पर 36,52,211 रुपये, मिठौरा के 140 ऋणियों पर 15,36,533 रुपये, घुघली में 124 ऋणियों पर 16,97,818 रुपये व परतावल में 75 ऋणियों पर 97,89,75 रुपये बाकी है। निचलौल में 184 ऋणियों पर 27,19,376 रुपये, सिसवा में 75 ऋणियों पर 13,09,817, फरेंदा में 117 ऋणियों पर 14,18,985 रुपये व बृजमनगंज मेें 96 ऋणियों पर 11,12,569 रुपये बकाया है। पनियरा ब्लॉक में 140 ऋणियों पर 12,94,043 रुपये, नौतनवां में 198 ऋणियों पर 21,45,516 रुपये व लक्ष्मीपुर में 133 ऋणियों पर 14,67,296 रुपये का बकाया है।
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किश्तों में जमा करनी होती है धनराशि
स्वरोजगार व सिलाई व्यवसाय के लिए प्राप्त ऋण को 36 किश्तों में, दुकान खोलने के लिए लिए गए ऋण को 120 किश्त में व लांड्री के लिए लिए गए ऋण को 60 किश्तों में देने की व्यवस्था है। 10 किश्त न जमा करने पर ऋणी को पहले नोटिस दिया जाता है, जबकि लगातार तीन वर्ष तक किश्त जमा न करने पर आरसी की कार्रवाई शुरू होती है।
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2014 के बाद से नहीं जारी हुई आरसी
विभागीय कर्मियों की माने तो वर्ष 2014 में 943 लोगों को वसूली प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इनकी वसूली अमीन के माध्यम से की जानी थी, मगर उसमें भी कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद वसूली के प्रति विभाग की रफ्तार भी दिन प्रतिदिन कुंद पड़ गई।
कोट
1500 से अधिक ऋणियों पर अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम लिमिटेड का 1.93 करोड़ रुपये बाकी हैं। वसूली की दिशा में समय-समय पर प्रयास किया जाता है।
- शंकरलाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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- सदर ब्लॉक क्षेत्र में चिह्नित हैं सर्वाधिक 239 ऋणी, वसूली व आरसी में दिखाई जा रही शिथिलता
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। समाज कल्याण विभाग (विकास) की ओर से संचालित होने वाले उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड से ऋण प्राप्त करने वाले 1500 से अधिक ऋणी अभी भी धन दबाए बैठे हैं। ऋणी न तो उसे देने में रुचि ले रहे हैं और न ही विभाग की ओर से ऋण को जमा कराने में कोई विशेष तेजी दिखाई जा रही है। ऐसे में योजना के साथ नए लाभार्थियों के प्रोत्साहन पर भी ग्रहण लग गया है।
अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों को स्वरोजगार को बढ़ावा देने, दुकान खोलने, लांड्री खोलने को प्रोत्साहन के लिए वर्ष 1996 से 2022 के बीच में कुल 1400 से अधिक लोगों को व दो वर्ष मेंं सिलाई योजना के तहत लगभग 300 लाभार्थियों को कुल लगभग दो करोड़ 15 लाख रुपये का ऋण वितरण किया गया। इनमें से अब तक 200 से अधिक ऋणियों की ओर से लगभग 22 लाख रुपये जमा कराए गए हैं, जबकि अभी भी 1500 से अधिक ऋणियों पर एक करोड़ 93 लाख रुपये का बकाया चल रहा है। लंबे बकाये की वजह से सिलाई को छोड़कर शेष सभी योजनाएं 2022 में बंद कर दी गई हैं। बावजूद इसके ऋण को जमा कराने में विभाग बेफिक्र दिख रहा है।
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ब्लॉकवार चिह्नित ऋणियों की संख्या
वर्तमान मेें सदर ब्लॉक के 239 ऋणियों पर 36,52,211 रुपये, मिठौरा के 140 ऋणियों पर 15,36,533 रुपये, घुघली में 124 ऋणियों पर 16,97,818 रुपये व परतावल में 75 ऋणियों पर 97,89,75 रुपये बाकी है। निचलौल में 184 ऋणियों पर 27,19,376 रुपये, सिसवा में 75 ऋणियों पर 13,09,817, फरेंदा में 117 ऋणियों पर 14,18,985 रुपये व बृजमनगंज मेें 96 ऋणियों पर 11,12,569 रुपये बकाया है। पनियरा ब्लॉक में 140 ऋणियों पर 12,94,043 रुपये, नौतनवां में 198 ऋणियों पर 21,45,516 रुपये व लक्ष्मीपुर में 133 ऋणियों पर 14,67,296 रुपये का बकाया है।
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किश्तों में जमा करनी होती है धनराशि
स्वरोजगार व सिलाई व्यवसाय के लिए प्राप्त ऋण को 36 किश्तों में, दुकान खोलने के लिए लिए गए ऋण को 120 किश्त में व लांड्री के लिए लिए गए ऋण को 60 किश्तों में देने की व्यवस्था है। 10 किश्त न जमा करने पर ऋणी को पहले नोटिस दिया जाता है, जबकि लगातार तीन वर्ष तक किश्त जमा न करने पर आरसी की कार्रवाई शुरू होती है।
2014 के बाद से नहीं जारी हुई आरसी
विभागीय कर्मियों की माने तो वर्ष 2014 में 943 लोगों को वसूली प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इनकी वसूली अमीन के माध्यम से की जानी थी, मगर उसमें भी कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद वसूली के प्रति विभाग की रफ्तार भी दिन प्रतिदिन कुंद पड़ गई।
कोट
1500 से अधिक ऋणियों पर अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम लिमिटेड का 1.93 करोड़ रुपये बाकी हैं। वसूली की दिशा में समय-समय पर प्रयास किया जाता है।
- शंकरलाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी