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58 साल में पहली बार रामलीला पर कोरोना का ब्रेक
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58 साल में पहली बार रामलीला पर कोरोना का ब्रेक
महराजगंज। कोरोना की वजह से इस बार रामलीला मंचन होने पर संशय है। अभी आयोजक मंचन कराने का मन नहीं बनाए हैं। ऐसा 58 साल में पहली बार हुआ है कि मंचन नहीं होगा। वर्ष 1962 में रामलीला का मंचन नौतनवां कस्बे में हुआ था। उस वक्त पेट्रोमैक्स के उजाले में मंचन होता था। वक्त के साथ ही रामलीला के आयोजन का स्वरूप भी बदल गया।
वर्तमान में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालमन प्रसाद जायसवाल ने बताया कि नौतनवां कस्बे के पड़ाव सब्जी मंडी में प्रतिवर्ष रामलीला का आयोजन होता है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण से बचाव को देखते हुए रामलीला का आयोजन नहीं होगा। रामलीला की शुरुआत जमींदार रामचंदर चौधरी ने कराई थी। उस समय स्थानीय कलाकारों की ओर से मंचन किया जाता रहा। लोग चंदा एकत्रित कर पेट्रोमैक्स की उजाले में मंचन करते थे। लोगों के आपसी सहयोग से रामलीला के कलाकारों की ड्रेस तैयार होती थी। सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाने के लिए समाज के हर वर्ग के लोग इसमें सहयोग करते थे।
वर्ष 1962 से 1968 तक हजारी लाल जायसवाल की देखरेख में रामलीला का आयोजन होता रहा। 1969 से 1990 तक विश्वनाथ प्रसाद जायसवाल की देखरेख में रामलीला मंचन हुआ। रामलीला कलाकारों को अयोध्या, दरभंगा तथा अन्य जगहों से बुलाया जाता है। मेले के दिन राम-रावण युद्ध कलाकारों की ओर से किया जाता था। उसके बाद 36 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाता था।
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रावण का पुतला मेले में आकर्षण का केंद्र होता था। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण रामलीला का आयोजन नहीं होगा। कोरोना का प्रभाव कम होने पर रामलीला का आयोजन कराया जाएगा। क्षेत्र में नौतनवां की रामलीला काफी लोकप्रिय है। दूरदराज से लोग रामलीला मंचन देखते आते थे।
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महराजगंज। कोरोना की वजह से इस बार रामलीला मंचन होने पर संशय है। अभी आयोजक मंचन कराने का मन नहीं बनाए हैं। ऐसा 58 साल में पहली बार हुआ है कि मंचन नहीं होगा। वर्ष 1962 में रामलीला का मंचन नौतनवां कस्बे में हुआ था। उस वक्त पेट्रोमैक्स के उजाले में मंचन होता था। वक्त के साथ ही रामलीला के आयोजन का स्वरूप भी बदल गया।
वर्तमान में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालमन प्रसाद जायसवाल ने बताया कि नौतनवां कस्बे के पड़ाव सब्जी मंडी में प्रतिवर्ष रामलीला का आयोजन होता है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण से बचाव को देखते हुए रामलीला का आयोजन नहीं होगा। रामलीला की शुरुआत जमींदार रामचंदर चौधरी ने कराई थी। उस समय स्थानीय कलाकारों की ओर से मंचन किया जाता रहा। लोग चंदा एकत्रित कर पेट्रोमैक्स की उजाले में मंचन करते थे। लोगों के आपसी सहयोग से रामलीला के कलाकारों की ड्रेस तैयार होती थी। सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाने के लिए समाज के हर वर्ग के लोग इसमें सहयोग करते थे।
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वर्ष 1962 से 1968 तक हजारी लाल जायसवाल की देखरेख में रामलीला का आयोजन होता रहा। 1969 से 1990 तक विश्वनाथ प्रसाद जायसवाल की देखरेख में रामलीला मंचन हुआ। रामलीला कलाकारों को अयोध्या, दरभंगा तथा अन्य जगहों से बुलाया जाता है। मेले के दिन राम-रावण युद्ध कलाकारों की ओर से किया जाता था। उसके बाद 36 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाता था।
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रावण का पुतला मेले में आकर्षण का केंद्र होता था। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण रामलीला का आयोजन नहीं होगा। कोरोना का प्रभाव कम होने पर रामलीला का आयोजन कराया जाएगा। क्षेत्र में नौतनवां की रामलीला काफी लोकप्रिय है। दूरदराज से लोग रामलीला मंचन देखते आते थे।