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यूपी चुनाव रिजल्ट: 20 साल बाद कांग्रेस की झोली में गई फरेंदा विधानसभा सीट
Fri, 11 Mar 2022 12:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:19 PM IST
सार
कांंग्रेस के प्रत्याशी वीरेंद्र चौधरी ने भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह को 1,087 मतों के अंतर से हराया।
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कलेक्ट्रेट परिसर में फरेंदा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी वीरेन्द्र चौधरी जीत के बाद खुशी जाह?
- फोटो : MAHARAJGANJ
विस्तार
फरेंदा विधानसभा सीट पर कांग्रेस को करीब 20 साल बाद जीत मिली है। पार्टी प्रत्याशी वीरेंद्र चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह को 1,087 मतों के अंतर से पराजित किया। फरेंदा विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ यहां पार्टी का प्रभाव कम होता गया। आजादी के बाद 1952 से 1967 तक कांग्रेस के गौरीराम गुप्ता फरेंदा से विधायक रहे।
1969 में पियारी देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। 1974 में सीपीआई के लक्ष्मीनारायन पांडेय विधायक चुने गए। 1977 में सीपीआई से श्यामनरायन तिवारी ने जीत हासिल की। 1980 में भी श्यामनारायन को जीत मिली। 1985 में जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में हर्षवर्धन सिंह ने जीत दर्ज की। 1989 व 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फिर श्यामनारायन तिवारी चुनाव जीते। 1993 में भाजपा के चौधरी शिवेंद्र ने सीपीआई-एम के विनोद तिवारी को मात्र 50 मतों के अंतर से हराया। 1996 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई-एम व सपा गठबंधन के उम्मीदवार विनोद तिवारी को जीत मिली।
वर्ष 2002 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में श्यामनारायन ने जीत हासिल की। वर्ष 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर बजरंग बहादुर सिंह विधायक बने। 2017 में बजरंग बहादुर सिंह तीसरी बार 76,312 मत पाकर निर्वाचित हुए। तब कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 73,958 मत मिले थे। बसपा के बेचन को 35,765 मत मिले थे। इस बार वीरेंद्र चौधरी को 84,755 मत मिले, जबकि भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह को 83,668 मत मिले। सपा के शंखलाल मांझी ने 16130 मत हासिल किए। बसपा की ईशू चौरसिया को 21,545 मत मिले।
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1969 में पियारी देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। 1974 में सीपीआई के लक्ष्मीनारायन पांडेय विधायक चुने गए। 1977 में सीपीआई से श्यामनरायन तिवारी ने जीत हासिल की। 1980 में भी श्यामनारायन को जीत मिली। 1985 में जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में हर्षवर्धन सिंह ने जीत दर्ज की। 1989 व 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फिर श्यामनारायन तिवारी चुनाव जीते। 1993 में भाजपा के चौधरी शिवेंद्र ने सीपीआई-एम के विनोद तिवारी को मात्र 50 मतों के अंतर से हराया। 1996 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई-एम व सपा गठबंधन के उम्मीदवार विनोद तिवारी को जीत मिली।
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वर्ष 2002 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में श्यामनारायन ने जीत हासिल की। वर्ष 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर बजरंग बहादुर सिंह विधायक बने। 2017 में बजरंग बहादुर सिंह तीसरी बार 76,312 मत पाकर निर्वाचित हुए। तब कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 73,958 मत मिले थे। बसपा के बेचन को 35,765 मत मिले थे। इस बार वीरेंद्र चौधरी को 84,755 मत मिले, जबकि भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह को 83,668 मत मिले। सपा के शंखलाल मांझी ने 16130 मत हासिल किए। बसपा की ईशू चौरसिया को 21,545 मत मिले।
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