{"_id":"69b0886123e00ebba10192f9","slug":"conclusion-of-two-day-national-seminar-organized-by-the-commerce-department-of-ddu-maharajganj-news-c-7-gkp1006-1253799-2026-03-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: समाज के लिए उपयोग ही ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: समाज के लिए उपयोग ही ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य
विज्ञापन
डीडीयू में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति
गोरखपुर। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता ने कहा कि केवल विषयों को पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करना भी आवश्यक है। ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य उसे समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में व्यावहारिक रूप से उपयोग करना है।
वह मंगलवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से ''भारत में जीएसटी : उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे की राह'' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि कानपुर सीएसजेएम विश्वविद्यालय, कानपुर के पूर्व कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने कहा कि राज्य के संचालन में कराधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जीएसटी को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताया।
इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीवर्धन पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. अभिषेक कुमार ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अंशिका मिश्रा व आभार ज्ञापन प्रो. राजवी प्रभाकर ने किया। दूसरे दिन भी दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का मार्गदर्शन प्रो. अजेय गुप्ता व डॉ. अंशु गुप्ता ने किया। संगोष्ठी में कुल 182 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
वह मंगलवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से ''भारत में जीएसटी : उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे की राह'' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि कानपुर सीएसजेएम विश्वविद्यालय, कानपुर के पूर्व कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने कहा कि राज्य के संचालन में कराधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जीएसटी को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताया।
विज्ञापन
इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीवर्धन पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. अभिषेक कुमार ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अंशिका मिश्रा व आभार ज्ञापन प्रो. राजवी प्रभाकर ने किया। दूसरे दिन भी दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का मार्गदर्शन प्रो. अजेय गुप्ता व डॉ. अंशु गुप्ता ने किया। संगोष्ठी में कुल 182 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
विज्ञापन