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Maharajganj News: अंश निर्धारण के पेच में अटका मुआवजा वितरण...रेल लाइन का काम भी
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घुघुली से महराजगंज तक रेल लाइन निर्माण के रुट लाइन का सर्वे करते कर्मी।
महराजगंज। प्रस्तावित रेलमार्ग के दायरे में आने वाली जमीनों का मुआवजा वितरण तेजी से नहीं हो रहा है। प्रभावित किसानों को समय से मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इसमें झोल यह है कि किस गाटा संख्या में किसका, कितना हिस्सा है। इस वजह से मुआवजा देने में परेशानी हो रही है। लेखपाल सहित राजस्व निरीक्षकों को स्थिति स्पष्ट करने के लिए निर्देशित किया गया।
जानकारी के मुताबिक इस रेल परियोजना के लिए भूमि अध्याप्ति विभाग की ओर से कुल 6,66,66,86,998 रुपये का एवार्ड बनाया गया है। अब तक लगभग 4,52,04,95,811 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 2,14,61,91,187 रुपये का मुआवजा अब भी बकाया है। भूमि अध्याप्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई गाटों में अंश स्पष्ट न होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है।
रेलवे विभाग का कहना है कि जिले में प्रस्तावित नई रेल लाइन घुघुली से महराजगंज वाया आनंदनगर तक 52.70 किमी लंबी रेल लाइन निर्माण के लिए ट्रैक बिछाया जाएगा। यह रेल लाइन 52 गांवों से होकर गुजरेगी। पहले चरण में घुघुली से महराजगंज तक 24.8 किमी रेल लाइन निर्माण का शुरू किया गया है। कार्यदायी संस्था की ओर से रूट लाइन का डिजाइन तैयार किया जा चुका है और सर्वे का काम तेजी से चल रहा है।
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जंगल दुधई उर्फ चेहरी निवासी कुमारी देवी बताती हैं कि उनकी 15 डिसमिल जमीन रेल लाइन के दायरे में आ रही है। सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद मुआवजा नहीं मिला। भुवनी निवासी राम अधार ने बताया कि घघरुआ खड़ेसर गांव में उनकी जमीन परियोजना में आ गई है। दस्तावेज की कमी सुधारने के बाद उन्होंने सारे जरूरी दस्तावेज भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय में दे दिए हैं, फिर भी भुगतान नहीं हुआ।
जोगिया गांव के मयंक सिंह का कहना है कि उनकी जमीन और मकान दोनों रेल लाइन के दायरे में हैं। जमीन का मुआवजा तो मिल गया, लेकिन मकान का नहीं। इसके बावजूद एजेंसी हमारे मकान खाली करा रही है। इसी तरह, घघरुआ खड़ेसर निवासी जामिल अंसारी ने बताया कि खेत का मुआवजा मिल गया है, लेकिन मकान का नहीं मिला। भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
सामग्रियों के रखरखाव के लिए विशेष प्लांट तैयार हो रहा :
शिकारपुर क्षेत्र में रेल निर्माण से जुड़ी सामग्रियों के रखरखाव के लिए विशेष प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट के लिए सभी जरूरी मशीनें और सामग्री साइट पर पहुंच चुकी हैं। यहां पर ट्रैक बिछाने में उपयोग होने वाले पत्थर, स्लीपर और अन्य उपकरणों को रखा जाएगा।
फसल कटते ही निर्माण कार्य तेज गति से होगा : रेलवे विभाग के सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार का कहना है कि रेलवे मुख्यालय से बार-बार मुआवजा वितरण की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी जा रही है। भूमि अध्याप्ति अधिकारी से कई बार संवाद किया, लेकिन वितरण प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही। उधर, रेल निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित गुप्ता ने कहा कि अभी धान की फसल कटने की प्रतीक्षा की जा रही है। फसल कटते ही निर्माण कार्य तेज गति से शुरू कर दिया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक इस रेल परियोजना के लिए भूमि अध्याप्ति विभाग की ओर से कुल 6,66,66,86,998 रुपये का एवार्ड बनाया गया है। अब तक लगभग 4,52,04,95,811 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 2,14,61,91,187 रुपये का मुआवजा अब भी बकाया है। भूमि अध्याप्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई गाटों में अंश स्पष्ट न होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है।
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रेलवे विभाग का कहना है कि जिले में प्रस्तावित नई रेल लाइन घुघुली से महराजगंज वाया आनंदनगर तक 52.70 किमी लंबी रेल लाइन निर्माण के लिए ट्रैक बिछाया जाएगा। यह रेल लाइन 52 गांवों से होकर गुजरेगी। पहले चरण में घुघुली से महराजगंज तक 24.8 किमी रेल लाइन निर्माण का शुरू किया गया है। कार्यदायी संस्था की ओर से रूट लाइन का डिजाइन तैयार किया जा चुका है और सर्वे का काम तेजी से चल रहा है।
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जंगल दुधई उर्फ चेहरी निवासी कुमारी देवी बताती हैं कि उनकी 15 डिसमिल जमीन रेल लाइन के दायरे में आ रही है। सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद मुआवजा नहीं मिला। भुवनी निवासी राम अधार ने बताया कि घघरुआ खड़ेसर गांव में उनकी जमीन परियोजना में आ गई है। दस्तावेज की कमी सुधारने के बाद उन्होंने सारे जरूरी दस्तावेज भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय में दे दिए हैं, फिर भी भुगतान नहीं हुआ।
जोगिया गांव के मयंक सिंह का कहना है कि उनकी जमीन और मकान दोनों रेल लाइन के दायरे में हैं। जमीन का मुआवजा तो मिल गया, लेकिन मकान का नहीं। इसके बावजूद एजेंसी हमारे मकान खाली करा रही है। इसी तरह, घघरुआ खड़ेसर निवासी जामिल अंसारी ने बताया कि खेत का मुआवजा मिल गया है, लेकिन मकान का नहीं मिला। भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
सामग्रियों के रखरखाव के लिए विशेष प्लांट तैयार हो रहा :
शिकारपुर क्षेत्र में रेल निर्माण से जुड़ी सामग्रियों के रखरखाव के लिए विशेष प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट के लिए सभी जरूरी मशीनें और सामग्री साइट पर पहुंच चुकी हैं। यहां पर ट्रैक बिछाने में उपयोग होने वाले पत्थर, स्लीपर और अन्य उपकरणों को रखा जाएगा।
फसल कटते ही निर्माण कार्य तेज गति से होगा : रेलवे विभाग के सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार का कहना है कि रेलवे मुख्यालय से बार-बार मुआवजा वितरण की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी जा रही है। भूमि अध्याप्ति अधिकारी से कई बार संवाद किया, लेकिन वितरण प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही। उधर, रेल निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित गुप्ता ने कहा कि अभी धान की फसल कटने की प्रतीक्षा की जा रही है। फसल कटते ही निर्माण कार्य तेज गति से शुरू कर दिया जाएगा।