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Maharajganj News: बाढ़ के बाद स्कूलों में पसरा मलबा, सफाई में जुटे कर्मचारी
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निचलौल। सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब भी तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। रविवार को सफाई कर्मचारियों ने प्राथमिकता के आधार पर विद्यालयों की सफाई शुरू की। कई स्कूलों के कमरों में करीब एक फुट तक कीचड़ जमा था, जिसे हटाने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी।
करीब 20 हजार की आबादी वाले इन तीनों ग्राम पंचायतों में सरकारी भवन, प्राथमिक विद्यालय और पंचायत भवन बाढ़ की चपेट में आने से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ की आशंका के बाद से ही प्रशासन और विभिन्न विभागों की टीमें क्षेत्र पर नजर रख रही थीं। इसके बाद 25 सितंबर को लगातार बारिश, नेपाल की पहाड़ियों से आए पानी और गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र दोबारा बाढ़ की चपेट में आ गया। बाढ़ से फसलों और पशुधन को नुकसान पहुंचा।
रविवार को शिकारपुर के टोला धरमपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय समेत प्रभावित गांवों के अन्य विद्यालयों में सफाई अभियान चलाया गया। सफाई कर्मचारियों ने कमरों में जमा कीचड़ और मलबा हटाया। ग्राम सचिव मौके पर मौजूद रहकर सफाई कार्य की निगरानी करते रहे। प्रशासन का प्रयास है कि विद्यालयों की सफाई पूरी होने के बाद सोमवार से पठन-पाठन सुचारु कराया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित गांवों में लगातार काम कर रही हैं।
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तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर सोहगीबरवा क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विभिन्न विभागों की विशेष टीमें गठित की जा रही हैं। टीमें घरों में हुई क्षति, घरेलू सामान, फसलों, पशुधन और जरूरी दस्तावेजों के नुकसान का सर्वे करेंगी। कम समय में आकलन पूरा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत और अन्य सुविधाओं का लाभ दिलाया जा सके। सोहगीबरवा गांव बड़ा होने के कारण रविवार को भी बाढ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण करने की प्रकिया जारी रहा।
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करीब 20 हजार की आबादी वाले इन तीनों ग्राम पंचायतों में सरकारी भवन, प्राथमिक विद्यालय और पंचायत भवन बाढ़ की चपेट में आने से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ की आशंका के बाद से ही प्रशासन और विभिन्न विभागों की टीमें क्षेत्र पर नजर रख रही थीं। इसके बाद 25 सितंबर को लगातार बारिश, नेपाल की पहाड़ियों से आए पानी और गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र दोबारा बाढ़ की चपेट में आ गया। बाढ़ से फसलों और पशुधन को नुकसान पहुंचा।
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रविवार को शिकारपुर के टोला धरमपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय समेत प्रभावित गांवों के अन्य विद्यालयों में सफाई अभियान चलाया गया। सफाई कर्मचारियों ने कमरों में जमा कीचड़ और मलबा हटाया। ग्राम सचिव मौके पर मौजूद रहकर सफाई कार्य की निगरानी करते रहे। प्रशासन का प्रयास है कि विद्यालयों की सफाई पूरी होने के बाद सोमवार से पठन-पाठन सुचारु कराया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित गांवों में लगातार काम कर रही हैं।
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तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर सोहगीबरवा क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विभिन्न विभागों की विशेष टीमें गठित की जा रही हैं। टीमें घरों में हुई क्षति, घरेलू सामान, फसलों, पशुधन और जरूरी दस्तावेजों के नुकसान का सर्वे करेंगी। कम समय में आकलन पूरा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत और अन्य सुविधाओं का लाभ दिलाया जा सके। सोहगीबरवा गांव बड़ा होने के कारण रविवार को भी बाढ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण करने की प्रकिया जारी रहा।