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Maharajganj News: लोकगीत कार्यशाला में बच्चों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा
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लक्ष्मीपुर। पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बेलवा खुर्द क्षेत्र लक्ष्मीपुर में पारंपरिक लोकगीत कार्यशाला के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को बच्चों में लोक संस्कृति के प्रति उत्सुकता देखने को मिली। कार्यशाला में बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता की और पूरे उत्साह के साथ गीत-संगीत का आनंद लिया। विद्यालय परिसर पूरे दिन पारंपरिक लोकधुनों और बच्चों की मधुर प्रस्तुतियों से गूंजता रहा।
दूसरे दिन बच्चों को विशेष रूप से खिलौना गीत सिखाया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को गीत के शब्द, लय, ताल और भाव के साथ प्रस्तुति देने की विधि भी बताई। बच्चों ने पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ गीतों का अभ्यास किया। छोटे-छोटे बच्चों की उत्सुकता और सीखने की लगन देखकर उपस्थित अभिभावक भी भावुक नजर आए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. प्रभुनाथ गुप्ता ने बच्चों को लोकगीतों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति और परंपराओं की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में पारंपरिक लोकगीतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही गीत हमारी सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक इतिहास को जीवित रखते हैं। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से लोककला और लोकसंगीत सीखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में शामिल बच्चों में रंजना विश्वकर्मा, किरण, अनुष्का गुप्ता, सिंधु प्रजापति, शिवकुमार, अवधेश, श्याम गुप्ता, अर्जुन, अंजलि, रेनू, दीपशिखा, राधिका यादव और रागिनी सहित कई अन्य बच्चों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं अभिभावकों में अमित, दिनेश यादव सहित अन्य लोगों की भी सराहनीय उपस्थिति रही।
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अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।
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दूसरे दिन बच्चों को विशेष रूप से खिलौना गीत सिखाया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को गीत के शब्द, लय, ताल और भाव के साथ प्रस्तुति देने की विधि भी बताई। बच्चों ने पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ गीतों का अभ्यास किया। छोटे-छोटे बच्चों की उत्सुकता और सीखने की लगन देखकर उपस्थित अभिभावक भी भावुक नजर आए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. प्रभुनाथ गुप्ता ने बच्चों को लोकगीतों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति और परंपराओं की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में पारंपरिक लोकगीतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही गीत हमारी सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक इतिहास को जीवित रखते हैं। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से लोककला और लोकसंगीत सीखने के लिए प्रेरित किया।
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कार्यशाला में शामिल बच्चों में रंजना विश्वकर्मा, किरण, अनुष्का गुप्ता, सिंधु प्रजापति, शिवकुमार, अवधेश, श्याम गुप्ता, अर्जुन, अंजलि, रेनू, दीपशिखा, राधिका यादव और रागिनी सहित कई अन्य बच्चों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं अभिभावकों में अमित, दिनेश यादव सहित अन्य लोगों की भी सराहनीय उपस्थिति रही।
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अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।