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मुफलिसी के बीच जीवन गुजार रहा शिक्षा मित्र का परिवार

Fri, 28 May 2021 11:16 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 11:16 PM IST
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Children had to be sent as soon as they were cared for
बच्चों का पलान-पोषण हो जाए इसलिए भेजना पड़ा ननिहाल
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महराजगंज। कोरोना काल में मिले दर्द को शिक्षा मित्र रहे अंबिका प्रसाद का परिवार कभी नहीं भूल पाएगा। परिवार के एक मात्र कमाने वाले सदस्य के असमय चले जाने से इनकी जिंदगी में अंधेरा छा गया है। बच्चों की शिक्षा की तो छोड़िए उनके लिए भोजन तक की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। बच्चों का पलान-पोषण हो जाए इसलिए तीन में से दो को उनके ननिहाल भेजना पड़ा। पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगने के बाद अंबिका प्रसाद कोरोना से संक्रमित हुए और उनकी मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, पनियरा ब्लॉक के गांगी बाजार के रहने वाले शिक्षा मित्र अंबिका प्रसाद (45) अपने गांव के विद्यालय में ही तैनात थे। पंचायत चुनाव के दौरान 12 अप्रैल को उन्होंने प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। घर के लोग पहले गांगी बाजार में इलाज कराया, लेकिन ठीक नहीं हुए। 15 अप्रैल को अंबिका की मौत हो गई। अंबिका प्रसाद के पिता रामवृक्ष (72) ने बताया कि बेटा बीमार हुआ तो घर में इलाज के लिए पैसे नहीं थे। किसी तरह व्यवस्था करके उसका इलाज कराया, लेकिन जान नहीं बची। मेरे सामने बेटे की अर्थी उठी, इससे बड़ी पीड़ा क्या हो सकती है। घर की माली हालत ठीक नहीं है। बच्चों का लालन-पालन कैसे होगा? अंबिका की बड़ी बेटी स्वेता 15 साल की है। दूसरी बेटी हर्शिता 13 साल और बेटा गौरव 10 साल का है। पूरे परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी अंबिका पर थी। उसकी मौत के बाद परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा, यही सोचकर चक्कर आने लगता है। संवाद
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बच्चों को अधिकारी बनाना चाहते थे अंबिका
अंबिका प्रसाद की पत्नी गंगोत्री देवी ने बताया कि पति ने बच्चों को अधिकारी बनाने का सपना देखा था, लेकिन उनकी मौत से सब कुछ बिखर गया है। हमारे पास खेती के लिए भी जमीन नहीं है कि उसी से गुजर बसर हो जाता है। हालत यह है कि तीन में से दो बच्चों को उनकी ननिहाल भेज रही हूं, ताकि उनका भरण पोषण हो सके। बेटी हर्षिता पढ़ाई में होशियार थी। सोचा था पढ़ लिखकर कुछ बन जाएगी, लेकिन अब क्या होगा कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
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पंचायत चुनाव में कोरोना से संक्रमित होकर कई शिक्षक साथी काल के गाल में समा गए। शासन से मांग है की जिन लोगों की मौत पंचायत चुनाव में कोरोना के संक्रमण से हुई है, उनको 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। शिक्षामित्र के परिवार की मदद करने के लिए संगठन तैयार है। शासन प्रशासन तक आवाज उठाई जा रही है।
- ऋषिकेश गुप्त, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
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