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अफगानिस्तान से सुरक्षित वतन लौटे चंद्रभान ने बयां किए हालात

Wed, 25 Aug 2021 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 12:21 AM IST
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Chandrabhan returned to his homeland safely from Afghanistan
अफगानिस्तान से लौटे चंद्रभान चौधरी - फोटो : MAHARAJGANJ
अफगानिस्तान से सुरक्षित वतन लौटे चंद्रभान ने बयां किए हालात
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महराजगंज। अफगानिस्तान में लगातार खराब हो रहे हालात से वहां काम करने वाले भारतीयों की वतन वापसी शुरू हो गई है। इसी में शामिल हैं परतावल क्षेत्र के सोनकटिया गांव के रहने वाले चंद्रभान चौधरी। सोमवार रात करीब 10 बजे घर चंद्रभान ‘अपनों’ के बीच पहुंचकर उनके गले लग गए। उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए तो परिजन भी खुशी से चहक उठे।
मंगलवार को चंद्रभान चौधरी ने बताया कि अफगानिस्तान में हालात खराब होने के बाद भी वह सुरक्षित था। सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में कोई परेशानी नहीं हुई। 13-14 अगस्त को अचानक पता चला कि तालिबानियों का काबुल पर कब्जा हो गया है। वहां तमाम नागरिक और नेता देश छोड़कर जा रहे हैं। वहां की स्थानीय सेना कुछ नहीं कर रही थी। मन में डर था, लेकिन अमेरिकी सैनिकों के सुरक्षा वाले क्षेत्र में कंपनी की ओर से मिली जिम्मेदारी को पूरा कर रहा था। मैं वहां एक कंपनी में सुपरवाइजर था। उनके साथ पांच कर्मचारी काम करते थे।
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उन्होंने बताया कि उपद्रव के बाद भी वे लोग आराम से काम रहे थे। अफगानिस्तान से लोगों को सुरक्षित लाने में भारत सरकार की पहल के साथ ही भारतीय वायुसेना का योगदान अहम है। सरकार की ओर से समुचित प्रबंध किया गया। इससे वहां से आने में परेशानी नहीं हुई। परिजनों से भी बातचीत होती रही। चूंकि वहां का माहौल लगातार खराब हो रहा था, इसलिए वतन लौटना ही मुनासिब समझा। सबसे अच्छा अपना ही देश है। उन्होंने बताया कि पांच साल से वहीं की एक कंपनी में काम कर रहा था। काबुल से दुबई भेजा गया। वहां से घर लौटा।
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घर सुरक्षित पहुंच गया यही काफी है : जंगबहादुर
श्यामदेउरवां के जंगबहादुर भी मंगलवार को घर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से घर सुरक्षित पहुंच गया, यही काफी है। यह तो सौभाग्य रहा की कुछ नहीं हुआ। वहां दुश्वारियों को झेलते हुए किसी तरह से वक्त गुजरा। अमेरिकी सेना की मेहरबानी से भोजन, पानी और नाश्ता मिला। जंगबहादुर 23 मार्च 2016 को पहली बार अफगानिस्तान गए थे। इस बार ढाई वर्ष के बाद घर वापस आए हैं। उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को काबुल से निकला, 17 को दोहा कतर पहुंचा, जहां से 23 अगस्त को भारत के लिए फ्लाइट पकड़ना था। इस बीच खाने-पीने की बहुत समस्या हुई। जंगबहादुर की पत्नी धर्मावती, पुत्री रंजीता, मनीषा, निशा, आशा, मांशी, रानी सभी खुशी से गदगद हैं।
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