{"_id":"660a06f8e166da8f0a057307","slug":"burden-of-school-bags-on-children-burden-of-budget-on-parents-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-119002-2024-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: बच्चों पर बस्ते का, अभिभावकों पर बजट का बोझ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: बच्चों पर बस्ते का, अभिभावकों पर बजट का बोझ
Mon, 01 Apr 2024 06:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 01 Apr 2024 06:29 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। नए शिक्षण सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों की जेब पर दबाव बढ़ने लगा है। केजी से लेकर पांचवीं तक के विद्यार्थियों को निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एनसीईआरीटी की एक किताब जहां 100 से 150 रुपये तक की आ जाती है तो वहीं निजी प्रकाशकों की एक किताब 300 से पांच सौ रुपये तक आती है। इस तरह से स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर अभिभावकों का बजट बिगाड़ रहे हैं।
जिले में हर साल बच्चों के कोर्स के बढ़ते दाम से अभिभावक परेशान हैं। किताबों के दामों में पिछले साल के सापेक्ष 10 प्रतिशत वृद्धि हो गई है। कक्षा एक की किताबों का सेट साढ़े तीन से चार हजार रुपये तक में मिल रहा है। विद्यालयों और दुकानों के बीच मजबूत साठगांठ से अभिभावक की जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
महराजगंज स्कूल एसोसिएशन के सचिव महेंद्रानंद जायसवाल ने बताया कि पुरानी किताबों में मार्किंग भी की जाती है। ऐसे में दोबारा इनके इस्तेमाल से विद्यार्थियों को भी दिक्कत होती है। छपाई की कीमत अधिक होने से किताबें महंगी हो जाती हैं। विद्यालयों की बैठक में कहा गया है कि अगर किताबों में बदलाव नहीं हुआ है तो पुरानी भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।
विज्ञापन
अभिभावक नीतू ने बताया कि विद्यालयों की ओर से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कई ऐसी किताबें भी दिलाई जा रही हैं, जिन्हें पूरे साल नहीं पढ़ाया जाता है। साथ ही स्कूल जिन किताबों को लेने के लिए कहते हैं। वे निर्धारित दुकानों पर ही मिलती हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
निर्धारित दुकान से ही किताबें उपलब्ध कराने वाले स्कूलों की व्यवस्था ठीक नहीं है। अभिभावकों पर दबाव बनाना भी सरासर गलत है। शिकायत मिलने पर ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-अमरनाथ राय, डीआईओएस
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
कक्षा-किताबों का शुल्क
एनसी व केजी 2,000 से 2,500
एलकेजी और यूकेजी-2,800 से 3200
एक 3,500 से 4000
दो व तीन 3,800 से 4000
चार व पांच 4,000 से 5000
नौ व दस 8,000
छह, सात और आठ 6,000 से 7,000
ग्यारह व बारह 8,000 से 10,000
नोट : आंकड़े रुपये में, किताबों की कीमत में बदलाव भी हो सकता है।
विज्ञापन
जिले में हर साल बच्चों के कोर्स के बढ़ते दाम से अभिभावक परेशान हैं। किताबों के दामों में पिछले साल के सापेक्ष 10 प्रतिशत वृद्धि हो गई है। कक्षा एक की किताबों का सेट साढ़े तीन से चार हजार रुपये तक में मिल रहा है। विद्यालयों और दुकानों के बीच मजबूत साठगांठ से अभिभावक की जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
विज्ञापन
महराजगंज स्कूल एसोसिएशन के सचिव महेंद्रानंद जायसवाल ने बताया कि पुरानी किताबों में मार्किंग भी की जाती है। ऐसे में दोबारा इनके इस्तेमाल से विद्यार्थियों को भी दिक्कत होती है। छपाई की कीमत अधिक होने से किताबें महंगी हो जाती हैं। विद्यालयों की बैठक में कहा गया है कि अगर किताबों में बदलाव नहीं हुआ है तो पुरानी भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।
विज्ञापन
अभिभावक नीतू ने बताया कि विद्यालयों की ओर से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कई ऐसी किताबें भी दिलाई जा रही हैं, जिन्हें पूरे साल नहीं पढ़ाया जाता है। साथ ही स्कूल जिन किताबों को लेने के लिए कहते हैं। वे निर्धारित दुकानों पर ही मिलती हैं।
निर्धारित दुकान से ही किताबें उपलब्ध कराने वाले स्कूलों की व्यवस्था ठीक नहीं है। अभिभावकों पर दबाव बनाना भी सरासर गलत है। शिकायत मिलने पर ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-अमरनाथ राय, डीआईओएस
कक्षा-किताबों का शुल्क
एनसी व केजी 2,000 से 2,500
एलकेजी और यूकेजी-2,800 से 3200
एक 3,500 से 4000
दो व तीन 3,800 से 4000
चार व पांच 4,000 से 5000
नौ व दस 8,000
छह, सात और आठ 6,000 से 7,000
ग्यारह व बारह 8,000 से 10,000
नोट : आंकड़े रुपये में, किताबों की कीमत में बदलाव भी हो सकता है।