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Maharajganj News: बजट हो जा रहा साफ, नहरों में पड़ी रह गई सिल्ट
Mon, 11 Dec 2023 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 11 Dec 2023 12:49 AM IST
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सफाई होने के बाद भी ऊगी झाड़।
महराजगंज। सिंचाई नहरों की सफाई के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। अधूरी सफाई कर सरकारी रकम का बंदरबांट किया जा रहा है। नहरों में पानी आते ही सफाई की तस्वीर पर पर्दा पड़ जाएगा। इसलिए तेजी से काम निपटाया जा रहा है। ठीक से सफाई न होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर हेड से टेल तक ठीक से पानी नहीं पहुंचेगा तो खेतों की सिंचाई पंपिंग सेट से करनी पड़ेगी।
जिले में छोटी-बड़ी 152 नहरें हैं जो करीब 999 किमी लंबी हैं। इनकी प्रति किलोमीटर की सफाई में 16 से 17 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस समय नहरों की सफाई तेजी से चल रही है। ठीक से सफाई नहीं होने के कारण नहर में भी सिल्ट पड़ी हुई है। रविवार को शहर से होकर जाने वाली नहरों की सफाई की पड़ताल की गई तो कई खामियां देखने को मिलीं। नहर के अंदर मिट्टी खोदकर छोड़ दी गई। नहर को गहरा नहीं किया गया है। सिल्ट किनारे रख की गई। इससे सिल्ट नहर में ही गिर रही है।
पंडित दीनदयाल इंटर काॅलेज के पास से गुजरे रहे नरेंद्र यादव ने बताया कि नहर की सफाई हमेशा इसी तरह से होती है। पानी टेल एरिया तक नहीं पहुंच पाता है। नहर की सफाई बेहतर ढंग से कराई जाती तो बहाव ठीक से होता। देवरिया शाखा से निकली माइनर की सफाई भी बदहाल दिखी। आसपास के किसानों ने बताया कि इस माइनर से ईटहीया, डिगही, बेलवा, निपनिया, जमुई, झरवलिया सहित अन्य गांवों के करीब पांच हजार किसानों के फसलों की सिंचाई होती है।
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सिंचाई विभाग की ओर से इस माइनर की हर वर्ष सिल्ट की सफाई भी की जाती है, लेकिन नहर की बेहतर तरीके से साफ-सफाई न होने के चलते अधिकांश खेतों की सिंचाई बोरिंग से करनी पड़ती है। इसके चलते किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ती है। इसी तरह से कपरौली माइनर करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी है, जो निचलौल कस्बे के नवीन मंडी के पीछे से होकर विशुनपुरा गांव तक जाती है। इस माइनर की सफाई पिछले वर्ष भी हुई थी। माइनर से बरगदवा, कपरौली, बरवा, विशुनपुरा के हजारों किसानों की खेतों की सिंचाई होती है, लेकिन नहरों की बेहतर सफाई नहीं होने से नहर से सटे खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है।
देवरिया शाखा नहर स्थित हरदी फाटक के पास से निकली सेमरहना माइनर दशा भी ठीक नहीं दिखी। नहर से होकर जा रहे सेमरहना के जितई ने बताया कि हर वर्ष विभाग की ओर से सफाई कराई जाती है, लेकिन इस माइनर से खेतों की सिंचाई ठीक से नहीं हो पाती है। क्योंकि, पानी आने के दौरान पानी नहर तली से ऊपर उठता ही नहीं है। इस माइनर से हरदी, सेमरहना और बरगही गांव के किसानों सिंचाई के लिए निर्भर रहते हैं, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
देवरिया शाखा नहर स्थित चमनगंज पुल के पास से निकली माइनर से बुढ़ाडीह, पिपराकाजी, कोहडवल, रौतार सहित अन्य गांवों के खेतों की सिंचाई होती है। हर बाद नहर की सफाई में लापरवाही के चलते पानी अधिकांश खेतों तक नहीं पहुंच पाता है।
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15 तक सफाई का वक्त, 22 दिसंबर को आएगा पानी
सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में माइनर और राजवाहो की करीब 300 किलोमीटर की सफाई कराई जानी है। इस पर 80 से 90 लाख रुपये खर्च होंगे। 15 दिसंबर तक नहरों की साफ-सफाई पूरी कराने की समय सीमा तय की गई है। नहरों में 22 दिसंबर तक पानी छोड़ दिया जाएगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार बेहतर ढंग से सफाई हो रही है।
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नहरों की सफाई बेहतर ढंग से कराई जा रही है। सफाई में गड़बड़ी की शिकायत कहीं से नहीं मिली है। अगर ऐसी बात है तो जांच की जाएगी। नहरों में हेड से लेकर टेल एरिया तक पानी पहुंचाने की कोशिश है।
-वीके वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम
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पानी खेत तक ठीक से नहीं पहुंचेगा तो नहर से कोई फायदा नहीं है। हर साल सिंचाई में परेशानी होती है। कभी कभार पानी पहुंचता भी है तो सिंचाई का समय नहीं रहता है।
-उदित यादव, जमुई
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सरकार रकम खर्च कर रही है तो उसका सदुपयोग ठीक से होना चाहिए। खानापूरी करने से कोई फायदा नहीं है। सिंचाई में तो हर साल समस्या होती है।
-रामप्यारे यादव, बरगदवा
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किसानों के हित की बात तो गोष्ठी रैली तक सिमट कर रह गई है। चाहे खेत की सिंचाई की बात हो या बुआई, सभी में किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। समस्या से जूझने की अब तो आदत सी बन बन गई है।
-मिथिलेश, हरदी
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हर साल खेत की सिंचाई के लिए पंपिंगसेट का सहारा लेना पड़ता है। नहरों की सफाई कभी भी ठीक ढंग से नहीं होती है। इस वजह से समस्या दूर नहीं हो रही है।
-बिंदेश कुशवाहा, मदनपुरा
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जिले में छोटी-बड़ी 152 नहरें हैं जो करीब 999 किमी लंबी हैं। इनकी प्रति किलोमीटर की सफाई में 16 से 17 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस समय नहरों की सफाई तेजी से चल रही है। ठीक से सफाई नहीं होने के कारण नहर में भी सिल्ट पड़ी हुई है। रविवार को शहर से होकर जाने वाली नहरों की सफाई की पड़ताल की गई तो कई खामियां देखने को मिलीं। नहर के अंदर मिट्टी खोदकर छोड़ दी गई। नहर को गहरा नहीं किया गया है। सिल्ट किनारे रख की गई। इससे सिल्ट नहर में ही गिर रही है।
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पंडित दीनदयाल इंटर काॅलेज के पास से गुजरे रहे नरेंद्र यादव ने बताया कि नहर की सफाई हमेशा इसी तरह से होती है। पानी टेल एरिया तक नहीं पहुंच पाता है। नहर की सफाई बेहतर ढंग से कराई जाती तो बहाव ठीक से होता। देवरिया शाखा से निकली माइनर की सफाई भी बदहाल दिखी। आसपास के किसानों ने बताया कि इस माइनर से ईटहीया, डिगही, बेलवा, निपनिया, जमुई, झरवलिया सहित अन्य गांवों के करीब पांच हजार किसानों के फसलों की सिंचाई होती है।
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सिंचाई विभाग की ओर से इस माइनर की हर वर्ष सिल्ट की सफाई भी की जाती है, लेकिन नहर की बेहतर तरीके से साफ-सफाई न होने के चलते अधिकांश खेतों की सिंचाई बोरिंग से करनी पड़ती है। इसके चलते किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ती है। इसी तरह से कपरौली माइनर करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी है, जो निचलौल कस्बे के नवीन मंडी के पीछे से होकर विशुनपुरा गांव तक जाती है। इस माइनर की सफाई पिछले वर्ष भी हुई थी। माइनर से बरगदवा, कपरौली, बरवा, विशुनपुरा के हजारों किसानों की खेतों की सिंचाई होती है, लेकिन नहरों की बेहतर सफाई नहीं होने से नहर से सटे खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है।
देवरिया शाखा नहर स्थित हरदी फाटक के पास से निकली सेमरहना माइनर दशा भी ठीक नहीं दिखी। नहर से होकर जा रहे सेमरहना के जितई ने बताया कि हर वर्ष विभाग की ओर से सफाई कराई जाती है, लेकिन इस माइनर से खेतों की सिंचाई ठीक से नहीं हो पाती है। क्योंकि, पानी आने के दौरान पानी नहर तली से ऊपर उठता ही नहीं है। इस माइनर से हरदी, सेमरहना और बरगही गांव के किसानों सिंचाई के लिए निर्भर रहते हैं, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
देवरिया शाखा नहर स्थित चमनगंज पुल के पास से निकली माइनर से बुढ़ाडीह, पिपराकाजी, कोहडवल, रौतार सहित अन्य गांवों के खेतों की सिंचाई होती है। हर बाद नहर की सफाई में लापरवाही के चलते पानी अधिकांश खेतों तक नहीं पहुंच पाता है।
15 तक सफाई का वक्त, 22 दिसंबर को आएगा पानी
सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में माइनर और राजवाहो की करीब 300 किलोमीटर की सफाई कराई जानी है। इस पर 80 से 90 लाख रुपये खर्च होंगे। 15 दिसंबर तक नहरों की साफ-सफाई पूरी कराने की समय सीमा तय की गई है। नहरों में 22 दिसंबर तक पानी छोड़ दिया जाएगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार बेहतर ढंग से सफाई हो रही है।
नहरों की सफाई बेहतर ढंग से कराई जा रही है। सफाई में गड़बड़ी की शिकायत कहीं से नहीं मिली है। अगर ऐसी बात है तो जांच की जाएगी। नहरों में हेड से लेकर टेल एरिया तक पानी पहुंचाने की कोशिश है।
-वीके वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम
पानी खेत तक ठीक से नहीं पहुंचेगा तो नहर से कोई फायदा नहीं है। हर साल सिंचाई में परेशानी होती है। कभी कभार पानी पहुंचता भी है तो सिंचाई का समय नहीं रहता है।
-उदित यादव, जमुई
सरकार रकम खर्च कर रही है तो उसका सदुपयोग ठीक से होना चाहिए। खानापूरी करने से कोई फायदा नहीं है। सिंचाई में तो हर साल समस्या होती है।
-रामप्यारे यादव, बरगदवा
किसानों के हित की बात तो गोष्ठी रैली तक सिमट कर रह गई है। चाहे खेत की सिंचाई की बात हो या बुआई, सभी में किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। समस्या से जूझने की अब तो आदत सी बन बन गई है।
-मिथिलेश, हरदी
हर साल खेत की सिंचाई के लिए पंपिंगसेट का सहारा लेना पड़ता है। नहरों की सफाई कभी भी ठीक ढंग से नहीं होती है। इस वजह से समस्या दूर नहीं हो रही है।
-बिंदेश कुशवाहा, मदनपुरा