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Maharajganj News: बढ़ती ठंड में फूल रही सांस, बलगम जमने से दर्द कर रहा सीना
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जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे 36 बीमार, 10 खांसी से जूझते हुए बने सांस रोगी
537 रोगियों का जिला अस्पताल में शुक्रवार को हुआ उपचार
महराजगंज। ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। साथ ही सांस फूलने और सीने में बलगम जमने वाले मरीज भी चिह्नित किए जा रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में सांस से जुड़ी समस्या के 36 रोगी पहुंचे। इनमें 10 रोगी ऐसे थे जो लगभग एक पखवाड़े से खांसी से परेशान थे। अब इन्हें सांस से जुड़ी समस्या ने घेर लिया है। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा एवं एहतियात बरतने का परामर्श दिया।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 537 रोगियों का उपचार हुआ। सर्वाधिक रोगी सर्दी, जुकाम, फ्लू, बुखार के बाद सांस के रहे। ऐसे रोगी भी पहुंचे जो लंबी खांसी झेलकर सांस के रोगी बन चुके हैं। डाॅ. एवी त्रिपाठी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा व सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस समय तेज खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलने के मामले बढ़ रहे हैं। सर्दी में थोड़ी सी अनदेखी का असर सेहत पर पड़ रहा है। सर्द हवा नाक से होकर शरीर के भीतर पहुंचती है तो सबसे पहले अस्थमा के पुराने मरीजों की दिक्कत बढ़ती है। अस्थमा रोगियों को सांस लेने में घरघराहट होती है। साथ ही सर्द व शुष्क हवा शरीर के श्वसन नली को सिकोड़ देती है। इससे श्वसन नली में सूजन व जलन के साथ बलगम बढ़ जाता है तो वह सांस लेने में असुविधा उत्पन्न करते हैं। रोगियों को दवा देने के साथ ही यह जरूर बताया जा रहा है कि सर्द व शुष्क हवाओं से बचाव करें।
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अस्पताल में समुचित इंतजाम
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में सांस के रोगियों के लिए लगभग सभी प्रकार के इंतजाम हैं। छोटे बच्चों के लिए नेबुलाइजर की व्यवस्था भी उपलब्ध है। चिकित्सा संसाधन की उपलब्धता से पहले यह जानना जरूरी होता कि समस्या कैसी और क्यों बढ़ी। सांस रोग ब्रोंकोस्पाज्म, धूल, फंगस जैसे कारकों से भी होते हैं। बीपी भी श्वसन रोग बढ़ाने में सहायक है। इसलिए सांस के रोगियों को उपचार के पहले जांच की सलाह दी जाती है जिसके कारण लक्षणों के आधार पर उपचार प्रभावी हो सके।
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ऐसे रखें बचाव
- ऊनी कपड़े पहने और शरीर को ढककर रखें, ऊनी टोपी पहने।
- सुबह टहलने के दौरान मास्क का प्रयोग करें। सुबह और शाम व्यायाम जरूर करें।
- सीने में बायीं ओर होने वाले दर्द को नजर अंदाज न करें। बिना चिकित्सक सलाह के दवा का उपयोग न करें।
- चिकनाई युक्त भोजन का सेवन न करें। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
- सर्दियों में पर्याप्त धूप लें।
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537 रोगियों का जिला अस्पताल में शुक्रवार को हुआ उपचार
महराजगंज। ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। साथ ही सांस फूलने और सीने में बलगम जमने वाले मरीज भी चिह्नित किए जा रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में सांस से जुड़ी समस्या के 36 रोगी पहुंचे। इनमें 10 रोगी ऐसे थे जो लगभग एक पखवाड़े से खांसी से परेशान थे। अब इन्हें सांस से जुड़ी समस्या ने घेर लिया है। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा एवं एहतियात बरतने का परामर्श दिया।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 537 रोगियों का उपचार हुआ। सर्वाधिक रोगी सर्दी, जुकाम, फ्लू, बुखार के बाद सांस के रहे। ऐसे रोगी भी पहुंचे जो लंबी खांसी झेलकर सांस के रोगी बन चुके हैं। डाॅ. एवी त्रिपाठी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा व सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस समय तेज खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलने के मामले बढ़ रहे हैं। सर्दी में थोड़ी सी अनदेखी का असर सेहत पर पड़ रहा है। सर्द हवा नाक से होकर शरीर के भीतर पहुंचती है तो सबसे पहले अस्थमा के पुराने मरीजों की दिक्कत बढ़ती है। अस्थमा रोगियों को सांस लेने में घरघराहट होती है। साथ ही सर्द व शुष्क हवा शरीर के श्वसन नली को सिकोड़ देती है। इससे श्वसन नली में सूजन व जलन के साथ बलगम बढ़ जाता है तो वह सांस लेने में असुविधा उत्पन्न करते हैं। रोगियों को दवा देने के साथ ही यह जरूर बताया जा रहा है कि सर्द व शुष्क हवाओं से बचाव करें।
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अस्पताल में समुचित इंतजाम
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में सांस के रोगियों के लिए लगभग सभी प्रकार के इंतजाम हैं। छोटे बच्चों के लिए नेबुलाइजर की व्यवस्था भी उपलब्ध है। चिकित्सा संसाधन की उपलब्धता से पहले यह जानना जरूरी होता कि समस्या कैसी और क्यों बढ़ी। सांस रोग ब्रोंकोस्पाज्म, धूल, फंगस जैसे कारकों से भी होते हैं। बीपी भी श्वसन रोग बढ़ाने में सहायक है। इसलिए सांस के रोगियों को उपचार के पहले जांच की सलाह दी जाती है जिसके कारण लक्षणों के आधार पर उपचार प्रभावी हो सके।
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ऐसे रखें बचाव
- ऊनी कपड़े पहने और शरीर को ढककर रखें, ऊनी टोपी पहने।
- सुबह टहलने के दौरान मास्क का प्रयोग करें। सुबह और शाम व्यायाम जरूर करें।
- सीने में बायीं ओर होने वाले दर्द को नजर अंदाज न करें। बिना चिकित्सक सलाह के दवा का उपयोग न करें।
- चिकनाई युक्त भोजन का सेवन न करें। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
- सर्दियों में पर्याप्त धूप लें।