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Maharajganj News: भारतीय बिल से नेपाल में हो रही ब्रान की तस्करी
Mon, 09 Dec 2024 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 09 Dec 2024 12:08 AM IST
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महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में बने अवैध गोदामों से तस्कर करोड़ों का धंधा कर रहे हैं। जिम्मेदारों को इन गोदामों के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है। ऐसे स्थानों पर ये गोदाम बनाए जाते हैं, जहां किसी की नजर न पड़े। सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दिनों ब्रान की तस्करी तेज है। इसमें ज्यादा खतरा भी नहीं होता है। आसानी से तस्कर अपना काम कर लेते हैं। अगर कोई पूछता है तो एक नंबर का बिल दिखाकर किनारा कस लेते हैं। मौका मिलने पर दोगुना लाभ लेने के लिए नेपाल भेज देते हैं। इसमें कैरियरों का बड़ा नेटवर्क है।
सूत्रों की मानें तो लक्ष्मीपुर क्षेत्र में 20 मिनट में 18 से अधिक पिकअप नेपाल में ब्रान लेकर चला गया। ब्रान की तस्करी में रास्तों की निगरानी से लिए अगल से कुछ लोग काम करते हैं। वे दिन भर सीमावर्ती क्षेत्र में इधर उधर घूमते रहते हैं। बताया जाता है कि इसके एवज में उनको 500 से लेकर एक रुपये मिलते हैं। उन्हीं के इशारे पर ब्रान की गाड़ियां आगे बढ़ती हैं। जिन क्षेत्रों में गश्त कम होती है, उधर से ही गाड़ियां आगे भेजी जाती है। इस पूरे खेल को एक नंबर बनाकर किया जा रहा है। भारतीय क्षेत्र में अगर कोई ब्रान लदी गाड़ियों को रोकता है तो चालक एक नंबर वाला जीएसटी बिल दिखा देता है। इससे कोई उनको परेशान नहीं करता है। ऐसे में वे अवैध गोदामों तक आसानी से पहुंच जाते हैं। यहां से मौका देखकर सरहद पार करा दिया जाता है। भारतीय क्षेत्र के राइस मिलों से प्रति क्विंटल एक हजार से 12 सौ रुपये की दर से ब्रान की खरीदारी होती है। इसकी कीमत सरहद पार होते ही 2000 से 2400 प्रति क्विंटल तक हो जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत नेपाल के लक्ष्मीपुर सरहद पर दोनों ओर तस्करों का नेटवर्क काफी बड़ा है। यही कारण है की इस सरहद पर भारत एवं नेपाल सरकार की ओर से प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। ब्रान का इस्तेमाल पशुओं के चारे के साथ ही ब्रान ऑयल बनाने में किया जाता है। ऐसे में ज्यादा मुनाफा होता है।
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करीब 16 माह से प्रतिबंध लगा रखा
जानकारी के मुताबिक, ब्रान के निर्यात पर भारत सरकार ने करीब 16 माह से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बाद भी तस्कर चोरी-छिपे ब्रान को नेपाल पहुंचा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि, पिकअप और पगडंडी से साइकिल के जरिए सरहद पार कर दिया जा रहा है। प्रतिदिन केवल लक्ष्मीपुर बार्डर से करीब 100 पिकअप ब्रान नेपाल भेजा जा रहा है। नेपाल में बीते वर्ष जुलाई माह से ब्रान निर्यात पर भारत सरकार की ओर से रोक लगाए जाने के बाद इसकी तस्करी बढ़ गई है। नेपाल में पशु आहार के लिए उपयोग की जाने वाली ब्रान कि काफी डिमांड है।
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कोट
सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध सामानों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस कर्मियों को सख्त नसीहत दी गई है। अगर सरहद पार ब्रान भेजा जा रहा है। तो मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आतिश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
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सूत्रों की मानें तो लक्ष्मीपुर क्षेत्र में 20 मिनट में 18 से अधिक पिकअप नेपाल में ब्रान लेकर चला गया। ब्रान की तस्करी में रास्तों की निगरानी से लिए अगल से कुछ लोग काम करते हैं। वे दिन भर सीमावर्ती क्षेत्र में इधर उधर घूमते रहते हैं। बताया जाता है कि इसके एवज में उनको 500 से लेकर एक रुपये मिलते हैं। उन्हीं के इशारे पर ब्रान की गाड़ियां आगे बढ़ती हैं। जिन क्षेत्रों में गश्त कम होती है, उधर से ही गाड़ियां आगे भेजी जाती है। इस पूरे खेल को एक नंबर बनाकर किया जा रहा है। भारतीय क्षेत्र में अगर कोई ब्रान लदी गाड़ियों को रोकता है तो चालक एक नंबर वाला जीएसटी बिल दिखा देता है। इससे कोई उनको परेशान नहीं करता है। ऐसे में वे अवैध गोदामों तक आसानी से पहुंच जाते हैं। यहां से मौका देखकर सरहद पार करा दिया जाता है। भारतीय क्षेत्र के राइस मिलों से प्रति क्विंटल एक हजार से 12 सौ रुपये की दर से ब्रान की खरीदारी होती है। इसकी कीमत सरहद पार होते ही 2000 से 2400 प्रति क्विंटल तक हो जाती है।
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सूत्रों के मुताबिक, भारत नेपाल के लक्ष्मीपुर सरहद पर दोनों ओर तस्करों का नेटवर्क काफी बड़ा है। यही कारण है की इस सरहद पर भारत एवं नेपाल सरकार की ओर से प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। ब्रान का इस्तेमाल पशुओं के चारे के साथ ही ब्रान ऑयल बनाने में किया जाता है। ऐसे में ज्यादा मुनाफा होता है।
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करीब 16 माह से प्रतिबंध लगा रखा
जानकारी के मुताबिक, ब्रान के निर्यात पर भारत सरकार ने करीब 16 माह से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बाद भी तस्कर चोरी-छिपे ब्रान को नेपाल पहुंचा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि, पिकअप और पगडंडी से साइकिल के जरिए सरहद पार कर दिया जा रहा है। प्रतिदिन केवल लक्ष्मीपुर बार्डर से करीब 100 पिकअप ब्रान नेपाल भेजा जा रहा है। नेपाल में बीते वर्ष जुलाई माह से ब्रान निर्यात पर भारत सरकार की ओर से रोक लगाए जाने के बाद इसकी तस्करी बढ़ गई है। नेपाल में पशु आहार के लिए उपयोग की जाने वाली ब्रान कि काफी डिमांड है।
कोट
सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध सामानों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस कर्मियों को सख्त नसीहत दी गई है। अगर सरहद पार ब्रान भेजा जा रहा है। तो मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आतिश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक