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जागरूकता बढ़ी तो जिले में घटी बालिका बधू

Thu, 02 Dec 2021 10:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 10:54 PM IST
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Blika wadhoo ratiao down to awarenss
जागरुकता बढ़ी तो जनपद में घटी बालिका वधू
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महराजगंज। जनपद में अब बालिका वधू की संख्या में कमी हो रही है। इसकी जानकारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 से हुई है। कम उम्र में बेटियों की शादी खतरनाक है। इसके बारे में लोगों ने गंभीरता दिखाई। वहीं, जागरूकता अभियान से लोगों को समझने का अवसर मिला। लिहाजा सही उम्र में बेटियों की शादी करने की प्रेरणा मिली। यही कारण है कि पिछले बार वर्ष 2015-16 में हुए सर्वे के मुकाबले इस बार की रिपोर्ट में दोगुना अंतर है। यह सबसे अधिक राहत की बात है।
विवाह की सही एवं वैधानिक उम्र प्रति समाज के लोगों ने गंभीरता दिखाई तो इसका सार्थक परिणाम भी आया। यह समस्या नारी समाज की सेहत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कम उम्र में मां बनने से जहां एक ओर महिला की सेहत पर असर पड़ता है, वहीं जन्म लेने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है। इन सभी विंदुओं के बारे में जागरूकता संदेश का इतना व्यापक असर हुआ कि सही उम्र में बेटियों की शादी के लिए लोग प्रेरित हुए। वर्ष 2020-21 में 20 से 24 साल की महिलाओं पर एनएफएचएस-5 की सर्वे रिपोर्ट आई।
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जारी रिपोर्ट में पता चला है कि 24.1 प्रतिशत की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी गई थी। जबकि 2015-16 की हुए सर्वे में यह आंकड़ा 48.2 प्रतिशत था। यही वर्तमान में यह दोगुना हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार लोगों में बढ़ती जागरुकता का असर है कि यह अंतर हुआ है। आधी आबादी को लेकर चलाए जा रहे, अभियानों और कानून की सख्ती का असर दिखने लगा है। यह कमी आने से संबंधित विभाग के अधिकारी काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
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जिले में बेटियों की संख्या बढ़ी
बेटियों के हित के चलाई जारी कल्याणकारी योजनाओं का भी असर दिखने लगा है। पहले के मुकाबले में बेटियों की संख्या में इन दिनों बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार प्रति 1000 हजार पुरुष पर 1093 महिलाएं थीं। लेकिन, अब यह संख्या बढ़ी है। वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट में प्रति एक हजार पुरुष पर 1116 महिलाएं हो गई हैं।
फोटो
बेटे एवं बेटी में कोई अंतर नहीं
खोन्हौली गांव के रहने वाले गुड्डू कुमार ने बताया कि बेटे एवं बेटी में कोई अंतर नहीं है। मेरी दो बेटियां गुड़िया (7) और छोटी (5) है। दोनों को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाना है। दोनों को स्कूल भेजता हूं। गुड़िया कक्षा तीन में पढ़ती है। जबकि छोटी कक्षा में एक पढ़ती है। समाज में लोगों को अपना नजरिया बदलना होगा। सरकार बेटियों के हित के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। निचलौल कस्बे की नंदिनी ने बताया कि दो बेटियां हैं। इनको बेहतर ढंग से शिक्षा देकर आगे बढ़ाना है। पहली बेटी अनन्या दो साल की है। दूसरी तान्या छह माह की है। बस इन दोनों का पालन -पोषण बेहतर ढंग से कर रही है। पहले के मुकाबले अब लोगों के विचार बदल रहे हैं। बेटियां भी आगे बढ़कर परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।
जागरुकता का परिणाम है कि लोग सचेत हुए
निचलौल कस्बे के मिया मोहल्ले के रहने वाले अंबरीश वर्मा ने कहा कि सही उम्र में विवाह करने से समस्या नहीं होती है। जागरुकता का परिणाम है कि लोग सचेत हुए। बेटियों की सही उम्र शादी करना उनकी सेहत एवं भविष्य के लिए फायदा होता है। जमुई पंडित गांव के शिक्षक विशंभर पांडेय कहते हैं कि पुराने समय की अपेक्षा अब काफी बदलाव आया है। सरकार भी लोगों को जागरूक कर रही है। समय के पहले शादी करना ठीक नहीं रहता है। जैसे जैसे जागरूकता बढ़ रही है, उसी तरह से रैंकिंग में सुधार भी हो रहा है।

सर्वे की रिपोर्ट काफी संतोषजनक है। विभाग की ओर से जागरूकता संदेश, योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ देने का परिणाम काफी अच्छा है। सभी कर्मियों ने पूरे मनोयोग से दायित्व निर्वहन किया जिससे रिपोर्ट अच्छी आई है।
-डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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