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Maharajganj News: आधे घंटे का ब्लैक आउट...खतरे का सायरन बजते ही अंधेरे में डूबा शहर

Sat, 24 Jan 2026 02:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:14 AM IST
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Blackout...city plunged into darkness as soon as danger siren sounds
पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल के दौरान लगे आग को बुझाते अग्निशमन कर्मी। 
मॉकड्रिल कर युद्ध जैसे हालात में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किया गया पूर्वाभ्यास, अधिकारियों के साथ कर्मियों ने संभाला मोर्चा
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महराजगंज। शुक्रवार शाम छह बजे पुलिस लाइन परिसर में मॉकड्रिल आयोजित किया गया। इस बीच युद्ध के दौरान लोगों को कैसे सुरक्षित किया जाए, हवाई हमलों से कैसे शहर को बचाया जाए, अगर कोई घायल हो गया तो उसके उपचार की त्वरित व्यवस्था कैसे जाए आदि बिंदुओं पर विशेष फोकस किया गया। आधे घंटे तक पुलिस लाइन परिसर में हर कोई अलर्ट मोड पर रहा। मॉकड्रिल देखकर एक पल के लिए लगा मानों सचमुच में हवाई हमला हुआ है।
पुलिस लाइन परिसर में पुलिस के साथ अन्य कर्मी फायर बिग्रेड की गाड़ी समेत एंबुलेंस आदि लेकर पहुंचे। शाम के छह बजे रहे थे। अचानक ब्लैक आउट हो गया। पूरा शहर अंधरे में डूब गया। शहर में गाड़ियों का आवामन हो रहा था लेकिन पूर्वाभ्यास स्थल पर हालात युद्ध जैसे बने रहे। पुलिस लाइन की कालोनी में सभी घरों की बत्ती गुल थी। पूरा अंधेरा था। हर तरफ सायरन की आवाज गूंज रही थी। एक दृश्य ऐसा बनाया गया था कि जैसे हवाई हमले में कहीं आग लग गई हो, इसे फायर ब्रिग्रेड की टीम बुझाने में जुट गई। घायलों को स्ट्रेचर से एंबुलेंस में ले जाया गया। सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने मोर्चा संभाला। जैसे आपात स्थिति में कर्मियों को ब्रीफ किया जाता है, ठीक उसी तरह से उनको जरूरी जानकारी देने के साथ ही हौसलाआफजाई की गई। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक, वार्डनों एवं आपदा मित्रों ने दायित्वस्थलों पर त्वरित मोर्चा संभाला। कुल मिलाकर करीब आधे घंटे तक ब्लॉक आउट में बचाव के लिए सभी जरूरी बिंदुओं पर पूर्वाभ्यास कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।
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वर्जन
सायरन प्रणाली, संचार व्यवस्था, स्वयंसेवकों की प्रतिक्रिया समय की समीक्षा की गई। नागरिक सुरक्षा का मूल मंत्र सतत सतर्कता एवं निष्काम सेवा है। आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि शहरों एवं नागरिक ठिकानों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ब्लैक आउट का उद्देश्य केवल लाइट बंद करना नहीं बल्कि शत्रु के विमानों अथवा मिसाइलों के लिए लक्ष्य पहचान को असंभव बनाना है।
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-संतोष कुमार शर्मा, जिलाधिकारी
मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार करना है। इसमें पुलिस, आपदा निरोधक बलों और नागरिकों के बीच विशेष समन्वय देखने को मिला। ऐसे प्रयास और समन्वय का आपातकालीन परिस्थितियों में विशेष महत्व होता है।
-सोमेंद्र मीना, पुलिस अधीक्षक
इन विभागों का रहा समन्वय
मॉकड्रिल के दौरान पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग, नागरिक सुरक्षा कोर, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं परिवहन विभाग की ओर से आपसी समन्वय का प्रदर्शन किया गया। प्रतीकात्मक रूप से प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन कार्यवाही, यातायात नियंत्रण, ब्लैक आउट अनुपालन का अभ्यास कराया गया।

कब और क्यों होता है ब्लैक आउट
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से साल में एक बार पूर्वाभ्यास होता है। मॉक ड्रिल के दौरान आधा घंटे का ब्लैक आउट रहता है। ब्लैक आउट का मतलब है कि सभी लाइट बंद करना करना, जिससे दुश्मनों की नजर शहर पर न पड़ सके। ब्लैक आउट तब होता है जब हवाई हमले के दौरान दुश्मन की नजर से बचा जा सके। इसमें एक तय समय के लिए पूरे इलाके की लाइटें बंद कर दी जाती हैं। यह किसी भी जंग के खतरे को देखते हुए इसका पूर्वाभ्यास होता है ताकि देश के लोग पहले से ही हमले को लेकर तैयार रहें।
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