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Maharajganj News: भोटेकोशी का जलस्तर बढ़ा, गंडक किनारे के इलाकों में प्रशासन सतर्क
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निचलौल। तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित भोटेकोशी नदी का शुक्रवार को फिर से जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवां समेत अन्य निचले इलाकों के गांवों में प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन सतर्कता के तहत लोगों से आवश्यक अपील कर रहा है।
भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद नेपाल से निकलकर भारत में आने वाली नारायणी-गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने की आशंका है। हालांकि बुधवार से गंडक नदी का जलस्तर लगभग स्थिर बना हुआ है लेकिन नेपाल से आने वाले तेज बहाव के साथ मलबा आने की आशंका के बीच खतरा अभी टला नहीं है। शुक्रवार शाम चार बजे नारायणी-गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बैराज पर 1.02 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया।
नदी में खतरे का निशान 359.80 फीट है जबकि वर्तमान जलस्तर 350.60 फीट है। बैराज पर पानी का स्तर फिलहाल स्थिर होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इसके बावजूद नेपाल से आने वाले पानी और मलबे के कारण जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका से ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
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नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बी गैप बांध से सटे नेपाल के नरसही, बेलाटारी, सकरदिनही, मरचहवा समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को समस्या हो सकती है। वहीं भारतीय क्षेत्र में निचलौल ब्लॉक के गेड़हवा, भेड़िहारी, तिलवारी, कटान टोला, बढ़ेया, डोमा, कलनही, चरभरिया और कनमिशवा समेत टापू क्षेत्र में बसे सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा की करीब 25 हजार आबादी भी सशंकित है।
वर्जन
भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से नारायणी नदी का जलस्तर कुछ अधिक होने की सूचना है लेकिन फिलहाल स्थिति सामान्य है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पहले से तैयार की गई टीमें तैनात हैं। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
- सिद्धार्थ गुप्ता, उपजिलाधिकारी निचलौल
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भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद नेपाल से निकलकर भारत में आने वाली नारायणी-गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने की आशंका है। हालांकि बुधवार से गंडक नदी का जलस्तर लगभग स्थिर बना हुआ है लेकिन नेपाल से आने वाले तेज बहाव के साथ मलबा आने की आशंका के बीच खतरा अभी टला नहीं है। शुक्रवार शाम चार बजे नारायणी-गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बैराज पर 1.02 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया।
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नदी में खतरे का निशान 359.80 फीट है जबकि वर्तमान जलस्तर 350.60 फीट है। बैराज पर पानी का स्तर फिलहाल स्थिर होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इसके बावजूद नेपाल से आने वाले पानी और मलबे के कारण जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका से ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
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नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बी गैप बांध से सटे नेपाल के नरसही, बेलाटारी, सकरदिनही, मरचहवा समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को समस्या हो सकती है। वहीं भारतीय क्षेत्र में निचलौल ब्लॉक के गेड़हवा, भेड़िहारी, तिलवारी, कटान टोला, बढ़ेया, डोमा, कलनही, चरभरिया और कनमिशवा समेत टापू क्षेत्र में बसे सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा की करीब 25 हजार आबादी भी सशंकित है।
वर्जन
भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से नारायणी नदी का जलस्तर कुछ अधिक होने की सूचना है लेकिन फिलहाल स्थिति सामान्य है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पहले से तैयार की गई टीमें तैनात हैं। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
- सिद्धार्थ गुप्ता, उपजिलाधिकारी निचलौल