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Maharajganj News: रहें सतर्क...सेहत के साथ व्रत भी न बिगाड़ दे मिलावट

Mon, 22 Sep 2025 12:50 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 12:50 AM IST
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Be cautious... adulteration should not spoil your health as well as your fast.
बाजार में बिक रहा कुट्टू का आटा।
महराजगंज। नवरात्र में फलाहार की सामाग्री खरीदने में सचेत रहे, थोड़ी सी लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। धंधेबाजों इस नवरात्र करीब एक करोड़ का मिलावटी सामान बाजार में खपाने की तैयारी में हैं। श्रद्धालु फलाहार में कुट्टू और सिंघाड़े का आटा इस्तेमाल करते हैं, जो काफी महंगा है। इससे कुछ दुकानदार मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट कर रहे हैं, तो कुछ कारोबारी पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को खपाने की कोशिश में लगे हैं। देसी घी और चंदन भी मिलावटी होने की आशंका है।
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विश्वसनीय दुकान से ही कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की खरीदारी करें। ज्यादातर कारोबारी गोरखपुर मंडी से थोक सामान मंगा रहे हैं। सबसे अधिक मांग, तिल के तेल, मुंगफली, कुट्टू का आटा, मखाना, लावा, घी की है। कारोबारी राकेश बताते हैं कि बाजार में सस्ते के चक्कर में फंसे तो खराब गुणवत्ता वाली सामाग्री मिल जाएगी। कुट्ट का आटा 65 से लेकर 70 रुपये किलो तक अगर मिले तो मान लिजिए मिलावटी है। वहीं बाजार में सांवा का चावल 60 रुपये किलो मिलावट वाला ही मिलेगा। बाजार में सिर्फ कुछ लोग ही अच्छे कारोबारियों का नाम खराब करने में लगे रहे हैं।
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किराना कारोबारी सत्येंद्र कुमार कहते हैं कि लोगों को सस्ते के चक्कर में नहीं अच्छी गुणवत्ता वाली सामाग्री की खरीदारी करनी चाहिए। प्रयास रहता है कि शुद्ध सामग्री की बिक्री की जाए। रविवार को शहर में एक दुकान पर बोरे में बोरे कुट्टू का आटा दिखा। पुरानी खाद्य सामग्री को भी नई पैकिंग में बेचा जा रहा है। यह खेल सबसे ज्यादा सिंघाड़े और कुट्टू के आटा में है। दूसरी ओर दीप जलाने के लिए तिल का तेल या देसी घी हो सबकी क्वालिटी ठीक नहीं है। उधर, देसी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई छोटी-छोटी कंपनियों के पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देशी घी बाजार में उपलब्ध है।
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मोम का प्रयोग कर कपूर में मिलावट : महराजगंज। कपूर में मिलावट की जा रही है। इसमें मोम का प्रयोग किया जाता है। दोनों की कीमतों में अंतर होने के कारण कपूर में मोम आसानी से मिला दिया जाता है।

सूत्रों की मानें तो बाजार ज्यादातर कपूर नकली है। नकली कपूर को हेक्सामाइन पाउडर से बनाया जाता है जो 80-90 रुपये किलो में मिल जाता है। बाद में इसमें असली कपूर मिलाया जाता है। मिलावट के बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया जाता है। इसे जलाने पर ज्यादा देर तक अगर कपूर जलता है तो समझिए की कपूर नकली है। क्योंकि हेक्सामाइन पाउडर ज्यादा देर तक जलता है। वहीं असली कपूर जल्दी उड़ जाता है। बाजार में वर्तमान में 100 रुपये से लेकर 1600 रुपये किलो तक में उपलब्ध है। ऐसे में असली और नकली के खेल को आसानी से समझा जा सकता है।
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