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Maharajganj News: रहें सतर्क...जिले की मंडियों में पहुंचा रंगा आलू

Fri, 31 Oct 2025 02:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 02:20 AM IST
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Be alert...coloured potatoes have reached the markets of the district.
मंडी में बिक रहा लाल आलू।
महराजगंज। गोरखपुर में रंगे हुए आलू को खाद्य सुरक्षा विभाग ने बरामद किया है। जिले की मंडियों में भी रंगा हुआ आलू पहुंच रहा है। इसे खरीदारी के दौरान सचेत रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही से सेहत को नुकसान हो सकता है। जिले में आलू की खपत उत्पादन से अधिक है। ऐसे में लोगों को बाहर से आने वाले आलू पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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जानकारों की मानें तो आलू को ताजा और चमकदार दिखाने के लिए अधिकतर सिंथेटिक डाई, मेटनिल येलो, रोडामाइन बी और कॉपर सल्फेट जैसे रसायनों का प्रयोग किया जाता है। यह केमिकल कपड़ा, पेंट और औद्योगिक उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। खाद्य पदार्थों पर इसका उपयोग हानिकारक होता है। शहर की मंडी में आलू कारोबारी बोरे को ठीक कराने में व्यस्त रहे। उन्होंने बताया कि शहर में मंडी में आलू आगरा से आता है। कुछ कारोबारी गोरखपुर से भी मंगाते हैं। 2500 क्विंटल एक मंडी की खपत तीन से चार दिन में होती है। कुछ लोग फरेंदा से मंगाते हैं। लाल आलू कन्नौज और बाराबंकी से आता है। वर्तमान में लाल आलू 17 से 18 रुपये प्रति किलो व सफेद आलू 10 से लेकर 14 रुपये किलो बिक रहा है। खरीदारी के दौरान ही सावधानी बरती जाती है।
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सूत्रों की मानें तो रंगा आलू का धंधा कुछ धंधेबाज कर रहे हैं। फोन पर ही बाहर-बाहर माल मंगाया जा रहा है और इसे बेचा जा रहा है। वहीं, जिले की अलग-अलग मंडियों में कुछ ऐसी दुकानें हैं जहां बस आलू व प्याज ही बिकता है। इन दुकानों पर रंगा आलू मंगाया जाता है और ये बाजार की अन्य दुकानों से सस्ते में बेचते हैं।
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जिले में होता है 285 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आलू का उत्पादन : जिले की मिट्टी आलू उत्पादन के लिए मुफीद होने के बाद भी उत्पादन का रकबा सिमटता जा रहा। कभी आठ हजार हेक्टेयर आलू का रकबा हुआ करता था लेकिन गिरते उत्पादन व मेहनत के मुताबिक रेट न मिलने से किसानों का मोहभंग होता गया। इस बार उद्यान विभाग की तमाम जागरूकता के बाद भी इसे 2900 हेक्टेयर तक पहंचाया जा सका है। उत्पादन की बात करें तो विभाग के मुताबिक 285 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है।
अगर विभागीय अनुमान को सही मानें तो सिर्फ 826 एमटी उत्पादन होगा। यह उत्पादन महज चार माह तक ही जनपद में आलू की मांग पूरी कर सकता क्योंकि सब्जी मंडी में आढ़त का कार्य करने वालों के मुताबिक जनपद में 200 एमटी औसत मांग हर महीने की जनपद में है जो सहालग आदि में घटता-बढ़ता रहता है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि जनपद में भंडारण की सुविधा नहीं है।
आठ कोल्ड स्टोरेज होने के बाद भी उत्पादन सीमित हो जाने से कोल्ड स्टोरेज बाहरी आलू को भंडारण की सहूलियत उपलब्ध करा कर संचालन में बने हुए हैं।
पशुओं से आलू फसल बचाना था मुश्किल : आलू के उत्पादन से मोहभंग का कारण तलाशने में उत्पादन का समय व जंगली पशुओं से फसल बचाने की समस्या के कारण किसानों ने इससे दूरी की बात कही।

किसान यूनियन जिलाध्यक्ष रामअशीष ने कहा कि आलू की फसल को जंगली जानवर साही, सुअर सर्वाधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। साथ ही किसान यहां उत्पादन लेट से करते हैं। जनवरी-फरवरी में लोकल आलू तैयार होता था वहीं बाजार में पश्चिम का आलू नवंबर से ही आने लगा लगता है जो अधिक रेट के कारण किसानों को मेहनत की भरपाई कर देता। वहीं स्थानीय आलू पैदा होते ही भाव 10 रुपये किलो तक पहुंच जाता है इसमें लागत तक नहीं निकल रही ऐसे में किसानों ने इससे दूर होते गए।
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