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Maharajganj News: बकरी अनुदान मामले में जांच के बीच सुविधा शुल्क वापसी का ऑडियो वायरल
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वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति अनुदान नहीं मिलने पर सुविधा शुल्क मांग रहा है वापस
जांच टीम गठित होने के आठ दिन बाद भी नहीं दर्ज हो सका है लाभार्थियों का बयान
महराजगंज। बकरी अनुदान मामले में गड़बड़ी की जांच के बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में सुविधा शुल्क वापसी संबंधित बातचीत सुनी जा सकती है। ऑडियो में एक व्यक्ति शिकायती लहजे में कह रहा है कि जब अनुदान का लाभ नहीं मिला तो पांच वापस करिए जबकि दूसरा व्यक्ति कह रहा है कि वह तो डूब गया।
हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करती है। वहीं सीवीओ ने जांच टीम को ऑडियो के सत्यता की पुष्टि के निर्देश दिए हैं।
जिले में निराश्रित, विधवा, अनुसूचित महिलाओं के आय सृजन के लिए पशु चिकित्सा विभाग की बकरी पालन अनुदान योजना है। इसमें चयनित लाभार्थी को 40 हजार रुपये चार बकरी और एक बकरा पंजीकृत फार्म से खरीदने के लिए मिलता है। अनुदान की बाकी राशि विभाग उक्त के उपचार, बीमा व टैगिंग पर खर्च करता है।
बीते तीन वर्ष में जिले में 77 को अनुदान लाभ मिला लेकिन अधिकतर अनुदान लाभार्थी व विभागीय मिली भगत से हजम कर लिया गया। यहां तक की पारदर्शिता के लिए ईयर टैगिंग की व्यवस्था में भी घालमेल कर दिया गया। लाभार्थी घरों के आसपास पाले गए गाय और भैंस को ईयर टैगिंग लगा दिया गया।
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मामले की शिकायत धानी बेलसड़ बी पैक्स सभापति प्रदीप ने डीएम से की तो सीवीओ की तरफ से पूरे जनपद में जांच के लिए चार जुलाई को टीम गठित कर दी गई। गठन को आज आठ दिन पूरे हो रहे हैं लेकिन अब तक किसी लाभार्थी का बयान जांच टीम नहीं दर्ज कर किया जा सका है। विभाग की इस लेटलतीफी का फायदा खेल में शामिल लोगों को मिल रहा और वह बचाव के लिए बकरियों को पहुंचाने में जुटे हैं।
पशु चिकित्सक व लाभार्थी का बताया जा रहा ऑडियो
जनपद में बकरी अनुदान मामले की गड़बड़ी का राजफाश होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ऑडियो जिले के एक विकासखंड में 11 वर्ष तैनात रहे पशु चिकित्सक व लाभार्थी के बीच का बताया जा रहा है। बातचीत में एक पैरावेट (पशु चिकित्सा विभाग में कृत्रिम पशु गर्भाधान का सीमन डालने के लिए रखे गए संविदा कर्मी) के नाम का जिक्र भी हो रहा है। इसकी तैनाती अभी जनपद में ही बताई जा रही है। मामले में इसकी भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ऑ़डियों में पहला व्यक्ति कह रहा है कि देखिए डॉक्टर साहब आपने काम के लिए पांच मांगा था हमने दिया। अनुदान नहीं मिला तो वह वापस करना चाहिए। जबकि दूसरा व्यक्ति कह रहा है कि वह तो डूब गया।
वर्जन
बकरी अनुदान योजना जांच की टीम बनी है। यह टीम अब वायरल ऑडियो के सत्यता की पुष्टि भी करेगी। इन दिनों शासन के निर्देश पर गोशाला कार्यों में पशु चिकित्सकों की ड्यूटी लगी है, इसलिए टीम अभी तक जांच नहीं शुरू कर सकी। लेकिन टीम को रिमाइंडर भेजकर मंगलवार तक जांच रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाएगा।
-डॉ. एजाज़ अहमद, सीवीओ, महराजगंज।
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जांच टीम गठित होने के आठ दिन बाद भी नहीं दर्ज हो सका है लाभार्थियों का बयान
महराजगंज। बकरी अनुदान मामले में गड़बड़ी की जांच के बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में सुविधा शुल्क वापसी संबंधित बातचीत सुनी जा सकती है। ऑडियो में एक व्यक्ति शिकायती लहजे में कह रहा है कि जब अनुदान का लाभ नहीं मिला तो पांच वापस करिए जबकि दूसरा व्यक्ति कह रहा है कि वह तो डूब गया।
हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करती है। वहीं सीवीओ ने जांच टीम को ऑडियो के सत्यता की पुष्टि के निर्देश दिए हैं।
जिले में निराश्रित, विधवा, अनुसूचित महिलाओं के आय सृजन के लिए पशु चिकित्सा विभाग की बकरी पालन अनुदान योजना है। इसमें चयनित लाभार्थी को 40 हजार रुपये चार बकरी और एक बकरा पंजीकृत फार्म से खरीदने के लिए मिलता है। अनुदान की बाकी राशि विभाग उक्त के उपचार, बीमा व टैगिंग पर खर्च करता है।
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बीते तीन वर्ष में जिले में 77 को अनुदान लाभ मिला लेकिन अधिकतर अनुदान लाभार्थी व विभागीय मिली भगत से हजम कर लिया गया। यहां तक की पारदर्शिता के लिए ईयर टैगिंग की व्यवस्था में भी घालमेल कर दिया गया। लाभार्थी घरों के आसपास पाले गए गाय और भैंस को ईयर टैगिंग लगा दिया गया।
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मामले की शिकायत धानी बेलसड़ बी पैक्स सभापति प्रदीप ने डीएम से की तो सीवीओ की तरफ से पूरे जनपद में जांच के लिए चार जुलाई को टीम गठित कर दी गई। गठन को आज आठ दिन पूरे हो रहे हैं लेकिन अब तक किसी लाभार्थी का बयान जांच टीम नहीं दर्ज कर किया जा सका है। विभाग की इस लेटलतीफी का फायदा खेल में शामिल लोगों को मिल रहा और वह बचाव के लिए बकरियों को पहुंचाने में जुटे हैं।
पशु चिकित्सक व लाभार्थी का बताया जा रहा ऑडियो
जनपद में बकरी अनुदान मामले की गड़बड़ी का राजफाश होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ऑडियो जिले के एक विकासखंड में 11 वर्ष तैनात रहे पशु चिकित्सक व लाभार्थी के बीच का बताया जा रहा है। बातचीत में एक पैरावेट (पशु चिकित्सा विभाग में कृत्रिम पशु गर्भाधान का सीमन डालने के लिए रखे गए संविदा कर्मी) के नाम का जिक्र भी हो रहा है। इसकी तैनाती अभी जनपद में ही बताई जा रही है। मामले में इसकी भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ऑ़डियों में पहला व्यक्ति कह रहा है कि देखिए डॉक्टर साहब आपने काम के लिए पांच मांगा था हमने दिया। अनुदान नहीं मिला तो वह वापस करना चाहिए। जबकि दूसरा व्यक्ति कह रहा है कि वह तो डूब गया।
वर्जन
बकरी अनुदान योजना जांच की टीम बनी है। यह टीम अब वायरल ऑडियो के सत्यता की पुष्टि भी करेगी। इन दिनों शासन के निर्देश पर गोशाला कार्यों में पशु चिकित्सकों की ड्यूटी लगी है, इसलिए टीम अभी तक जांच नहीं शुरू कर सकी। लेकिन टीम को रिमाइंडर भेजकर मंगलवार तक जांच रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाएगा।
-डॉ. एजाज़ अहमद, सीवीओ, महराजगंज।