{"_id":"669c41c7e8520c5e15064b74","slug":"attention-be-alert-if-you-receive-calls-for-help-in-the-voice-of-loved-ones-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-127187-2024-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: सावधान! अपनों की आवाज में या फिर मदद के लिए फोन आए तो सतर्क रहें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: सावधान! अपनों की आवाज में या फिर मदद के लिए फोन आए तो सतर्क रहें
विज्ञापन
महराजगंज। सावधान! आपकी आवाज की क्लोनिंग कर ठगी करने का खतरा बढ़ गया है। यानी हूबहू आपके जैसी आवाज निकालकर ठग आपके दोस्तों, परिचितों से ठगी कर सकते हैं, या फिर मदद करने के नाम पर आप ठगी के शिकार हो सकते हैं। इससे बचने के लिए फोन पर बात करते समय सतर्क रहने की जरूरत है।
जिले में मदद करने के नाम पर और आवाज की क्लोनिंग कर परिजन को फोन कर साइबर ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वह फोन पर बात करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
पुलिस ने बताया कि अगर आपका कोई रिश्तेदार, दोस्त परिचित या किसी विभाग से फोन कर इमरजेंसी में बताकर मदद मांग रहा है, या फिर मदद करने की बात कह रहा है। तो पहले यह जरूर जान लें, क्या सच में मदद की जरूरत है? साइबर जालसाज अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वायस क्लोनिंग टूल की मदद से आपके अपनों की आवाज को ठगी का माध्यम बना रहे हैं। अब तक इंटरनेट मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, ओटीपी समेत अन्य तरीकों से ठगी हो रही थी, लेकिन अब जालसाज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वायस क्लोनिंग टूल की मदद ले रहे हैं। यह टूल आपकी आवाज इतने सलीके से नकल करता है, कि अपनी व टूल की आवाज में अंतर नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन
इसके लिए साइबर क्रिमिनल सबसे पहले किसी शख्स को ठगी के लिए चुनते हैं। इसके बाद उसकी इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल को देखते हैं, और उसकी किसी ऑडियो व वीडियो को अपने पास रख लेते हैं। एआई की वायस क्लोनिंग टूल की मदद से उसकी आवाज क्लोन करते हैं। फिर उनके परिचित को उसकी आवाज में फोन कर बताया जाता है, कि उनका एक्सीडेंट हो गया है, या कोई भी इमरजेंसी स्थिति बताकर ठगी की जा रही है।
केस नंबर एक
- 18 जुलाई 2024 को नौतनवा नगर के गौतम बुद्ध नगर वार्ड निवासी अंबिका चौबे को सुबह व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। उनके पुत्र की आवाज में किसी ने कहा कि पापा मुझे बचा लीजिए, नहीं तो यह लोग मार डालेंगे। यह बात सुनकर वह अवाक रह गए। अभी वह कुछ आगे पूछते कि फोन किसी दूसरे व्यक्ति ने लेकर कहा कि वह सीबीआई से बोल रहा है। अंबिका चौबे सीबीआई वाले फ्राॅड काॅल को लेकर पहले से ही जागरूक थे। ऐसे में वह ज्यादा परेशान नहीं हुए, फिर पुलिस से शिकायत की। मामले में पुलिस आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पड़ताल में जुटी है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
केस नंबर दो
- 9 जुलाई 2024 को घुघली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक शख्स को साइबर ठगों ने लखनऊ क्राइम ब्रांच से बोलकर मदद के नाम पर उनसे 2.25 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित शख्स ने पुलिस को शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर साइबर ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
ऐसे बनाया जाता है दबाव
पीड़ितों के मुताबिक आम तौर पर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर ही व्यक्ति को निशाना बनाया जाता है। पुलिस कर्मी की फोटो वाले नंबर से व्हाट्सएप कॉल आती है और आवाज पीड़ित के करीबी की होती है, जिसमें वह डरा हुआ मदद की गुहार लगाता है। मिलती जुलती आवाज की वजह से लोग अक्सर हड़बड़ा जाते हैं। इसके बाद पुलिस कर्मी की डीपी लगे व्हाट्सएप नंबर से कॉल कर किसी अपराध में फंसने का हवाला देकर छोड़ने के एवज में हजारों लाखों रुपये की डिमांड करते हैं।
कॉल आए तो ये उठाएं कदम
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा कि अगर ऐसे कॉल आएं तो इस प्रकार का कदम उठाएं। 1930 नेशनल टोल फ्री नंबर पर जानकारी दें। साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें। साइबर हेल्प डेस्क पर तुरंत जानकारी दें। अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें। किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें। अगर मैसेज, फोन या वीडियो से कोई धमकी देता है, तो फौरन स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं। अगर आपसे गलती हुई है तो पुलिस को बताइए ताकि आपकी समय रहते मदद की जा सके।
विज्ञापन
जिले में मदद करने के नाम पर और आवाज की क्लोनिंग कर परिजन को फोन कर साइबर ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वह फोन पर बात करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
विज्ञापन
पुलिस ने बताया कि अगर आपका कोई रिश्तेदार, दोस्त परिचित या किसी विभाग से फोन कर इमरजेंसी में बताकर मदद मांग रहा है, या फिर मदद करने की बात कह रहा है। तो पहले यह जरूर जान लें, क्या सच में मदद की जरूरत है? साइबर जालसाज अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वायस क्लोनिंग टूल की मदद से आपके अपनों की आवाज को ठगी का माध्यम बना रहे हैं। अब तक इंटरनेट मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, ओटीपी समेत अन्य तरीकों से ठगी हो रही थी, लेकिन अब जालसाज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वायस क्लोनिंग टूल की मदद ले रहे हैं। यह टूल आपकी आवाज इतने सलीके से नकल करता है, कि अपनी व टूल की आवाज में अंतर नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन
इसके लिए साइबर क्रिमिनल सबसे पहले किसी शख्स को ठगी के लिए चुनते हैं। इसके बाद उसकी इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल को देखते हैं, और उसकी किसी ऑडियो व वीडियो को अपने पास रख लेते हैं। एआई की वायस क्लोनिंग टूल की मदद से उसकी आवाज क्लोन करते हैं। फिर उनके परिचित को उसकी आवाज में फोन कर बताया जाता है, कि उनका एक्सीडेंट हो गया है, या कोई भी इमरजेंसी स्थिति बताकर ठगी की जा रही है।
केस नंबर एक
- 18 जुलाई 2024 को नौतनवा नगर के गौतम बुद्ध नगर वार्ड निवासी अंबिका चौबे को सुबह व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। उनके पुत्र की आवाज में किसी ने कहा कि पापा मुझे बचा लीजिए, नहीं तो यह लोग मार डालेंगे। यह बात सुनकर वह अवाक रह गए। अभी वह कुछ आगे पूछते कि फोन किसी दूसरे व्यक्ति ने लेकर कहा कि वह सीबीआई से बोल रहा है। अंबिका चौबे सीबीआई वाले फ्राॅड काॅल को लेकर पहले से ही जागरूक थे। ऐसे में वह ज्यादा परेशान नहीं हुए, फिर पुलिस से शिकायत की। मामले में पुलिस आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पड़ताल में जुटी है।
केस नंबर दो
- 9 जुलाई 2024 को घुघली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक शख्स को साइबर ठगों ने लखनऊ क्राइम ब्रांच से बोलकर मदद के नाम पर उनसे 2.25 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित शख्स ने पुलिस को शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर साइबर ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
ऐसे बनाया जाता है दबाव
पीड़ितों के मुताबिक आम तौर पर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर ही व्यक्ति को निशाना बनाया जाता है। पुलिस कर्मी की फोटो वाले नंबर से व्हाट्सएप कॉल आती है और आवाज पीड़ित के करीबी की होती है, जिसमें वह डरा हुआ मदद की गुहार लगाता है। मिलती जुलती आवाज की वजह से लोग अक्सर हड़बड़ा जाते हैं। इसके बाद पुलिस कर्मी की डीपी लगे व्हाट्सएप नंबर से कॉल कर किसी अपराध में फंसने का हवाला देकर छोड़ने के एवज में हजारों लाखों रुपये की डिमांड करते हैं।
कॉल आए तो ये उठाएं कदम
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा कि अगर ऐसे कॉल आएं तो इस प्रकार का कदम उठाएं। 1930 नेशनल टोल फ्री नंबर पर जानकारी दें। साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें। साइबर हेल्प डेस्क पर तुरंत जानकारी दें। अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें। किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें। अगर मैसेज, फोन या वीडियो से कोई धमकी देता है, तो फौरन स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं। अगर आपसे गलती हुई है तो पुलिस को बताइए ताकि आपकी समय रहते मदद की जा सके।