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Maharajganj News: नवजात की देखभाल के लिए आशाओं को किया गया प्रशिक्षित
Thu, 21 Mar 2024 08:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 21 Mar 2024 08:28 PM IST
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महराजगंज। गृह आधारित नवजात शिशु की देखभाल के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण बृहस्पतिवार से सीएमओ कार्यालय में शुरू हुआ। सोमवार को समापन होगा। प्रशिक्षण में जिले के सभी विकास खंड से आशाएं दो बैच में प्रतिभाग कर रही हैं। जिन्हें पांच दिन तक शिशुओं की देखभाल के संबंध में जानकारी दी जा रही हैं। 5200 आशाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
मुख्यालय स्थित सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. केपी सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को घर पर नवजात शिशुओं की देखरेख के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्म के 45 दिन तक आशा कार्यकर्ता को कम से कम छह बार घर जाकर नवजात शिशु और उसकी मां की देखरेख करनी है। प्रशिक्षक भागवत सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी रूप से नवजात की देखरेख संबंधी में प्रशिक्षण दिया और इसका डेमो भी करके दिखाया।
उमेश शाही, सुनील वर्मा व ऋषभ ने भी आशा कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें गृह आधारित नवजात शिशु की देखरेख की महत्ता से रूबरू कराया। कहा बच्चे का शरीर ठंडा है, आवाज में दिक्कत, रोशनी करने पर बच्चे की गतिविधि, उम्र के हिसाब से बच्चे के वजन पर विशेष नजर रखें। कहीं भी किसी प्रकार की दिक्कत लगे तो निकटतम सीएचसी अथवा पीएचसी में बच्चे का इलाज कराना सुनिश्चित कराएं। माताओं को भी खानपान पर ध्यान देने के लिए जागरूक करें, जिससे स्तनपान करने वाला बच्चा कुपोषित न होने पाए। डाॅ. वैभव, बीसीपीएम लवली वर्मा सहित सभी एएनएम व आशाएं मौजूद रहीं।
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मुख्यालय स्थित सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. केपी सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को घर पर नवजात शिशुओं की देखरेख के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्म के 45 दिन तक आशा कार्यकर्ता को कम से कम छह बार घर जाकर नवजात शिशु और उसकी मां की देखरेख करनी है। प्रशिक्षक भागवत सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी रूप से नवजात की देखरेख संबंधी में प्रशिक्षण दिया और इसका डेमो भी करके दिखाया।
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उमेश शाही, सुनील वर्मा व ऋषभ ने भी आशा कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें गृह आधारित नवजात शिशु की देखरेख की महत्ता से रूबरू कराया। कहा बच्चे का शरीर ठंडा है, आवाज में दिक्कत, रोशनी करने पर बच्चे की गतिविधि, उम्र के हिसाब से बच्चे के वजन पर विशेष नजर रखें। कहीं भी किसी प्रकार की दिक्कत लगे तो निकटतम सीएचसी अथवा पीएचसी में बच्चे का इलाज कराना सुनिश्चित कराएं। माताओं को भी खानपान पर ध्यान देने के लिए जागरूक करें, जिससे स्तनपान करने वाला बच्चा कुपोषित न होने पाए। डाॅ. वैभव, बीसीपीएम लवली वर्मा सहित सभी एएनएम व आशाएं मौजूद रहीं।
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